आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, ईएमआई पर राहत की उम्मीदों को लगा झटका

आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, ईएमआई पर राहत की उम्मीदों को लगा झटका

प्रेषित समय :11:06:18 AM / Fri, Feb 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक ने मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग के बाद बड़ा ऐलान किया है. आरबीआई ने इस बार रेपो रेट में कटौती नहीं की है. रेट अब भी 5.25 प्रतिशत ही रहेगा. इससे पहले बीते एक सालों में आरबीआई ने 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती थी. मगर इस बार फरवरी 2026 में हुई मीटिंग में रेपो रेट बरकरार रखा गया है. उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.

भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (आरबीआई) ने शुक्रवार को एफवाई27 की पहली और दूसरी तिमाही के लिए महंगाई के अपने अनुमान को बढ़ाकर 4त्न और 4.2% कर दिया, जो पहले के तेज महंगाई कम होने की उम्मीदों से अलग संकेत देता है.

यह बदलाव आरबीआई की तीन-दिवसीय पॉलिसी समीक्षा के आखिर में हुआ, जिसमें सेंट्रल बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है. यह कदम बताता है कि आरबीआई महंगाई के आउटलुक को लेकर ज्यादा सतर्क हो रहा है, भले ही वह ब्याज दर के मामले में स्थिर रुख बनाए हुए है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हाल के समय में हुई डील्स से ग्रोथ का आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है. गवर्नर ने कहा की भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.

कटौती का नहीं था अनुमान

आरबीआई गवर्नर ने मीटिंग के बाद रेपो रेट में कटौती न करने का ऐलान किया है मगर इससे पहले ही इसके अनुमान लगाए गए थे. एक्सपर्ट का मानना था कि फरवरी में रेपो रेट में कटौती होने की संभावना कम है और ऐसा ही हुआ. क्योंकि केंद्रीय बजट 2026 में कैपेक्स को 12त्न बढ़ाने और राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य रखा गया है. बाहरी माहौल भी थोड़ा बेहतर दिख रहा है. अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए हैं और भारत- ईयू एफटीए से ट्रेड और पूंजी प्रवाह को सहारा मिलने की उम्मीद है. इस सब पॉजिटिव संकेतों को ध्यान में रखते हुए ही आरबीआई ने यह फैसला लिया है.

एक साल में हुई थी 4 बार कटौती

आरबीआई ने बीते साल आम आमदी की ईएमआई खूब कम करवाई थी. फरवरी 2025 से लेकर दिसंबर 2025 के बीच में 4 बार यानी रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी. फरवरी 2025 में 0.25 प्रतिशत, अप्रैल में 0.25 प्रतिशत और जून में 0.5 प्रतिशत की कटौती हुई. अगस्त और अक्टूबर में रोक के बाद दिसंबर में फिर 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-