कोटा/जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा रेल मंडल प्रशासन ने रेल सुरक्षा में गंभीर लापरवाही बरतने पर कड़ा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ खंड अभियंता संतोष बौरासी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. अल्ट्रासोनिक जांच के बावजूद पटरी की दरार न पकड़ पाना और पूर्व के भ्रष्टाचार के आरोप संतोष की बर्खास्तगी का मुख्य कारण बने. उल्लेखनीय है कि श्री बौरासी के पक्ष में पमरे मजदूर संघ ने लगातार प्रदर्शन किया था और जबलपुर मुख्यालय तक कार्रवाई रुकवाने का प्रयास किया था. किंतु इस कार्य में संघ को सफलता नहीं मिल सकी.
बताया जाता है कि संतोष बौरासी की वर्तमान तैनाती शामगढ़ में थी, जहां उन पर यूएसएफडी (अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन) मशीन के जरिए रेल पटरियों की आंतरिक खामियों की जांच करने की जिम्मेदारी थी. पिछले दिनों संतोष ने पटरी की जांच की थी, लेकिन वे उसमें मौजूद गंभीर गड़बड़ी को पकडऩे में नाकाम रहे. जांच के कुछ ही दिनों बाद वह रेल पटरी टूट गई. गनीमत रही कि समय रहते रेल फ्रैक्चर का पता चल गया और एक बड़ा ट्रेन हादसा टल गया.
रेलवे बोर्ड, पमरे मुख्यालय जबलपुर तक मामला पहुंचा
बताया जाता है कि यह लापरवाही इतनी गंभीर थी कि इसकी गूंज कोटा मंडल और जबलपुर मुख्यालय से होते हुए रेलवे बोर्ड तक पहुंच गई. बोर्ड के संरक्षा से जुड़े विषयों में सख्त निर्णय के बाद एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया.
मजदूर संघ का विरोध रहा बेअसर
वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ को इस कार्रवाई का अंदेशा पहले ही हो चुका था. प्रशासन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से संघ ने पिछले दिनों डीआरएम कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन भी किया था. हालांकि, रेल सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में प्रशासन ने नरम रुख अपनाने के बजाय सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी और प्रदर्शन का कोई असर नहीं हुआ.
लकड़ी बेचने का भी आरोपी है बर्खास्त एसएसई
बर्खास्त इंजीनियर संतोष बौरासी का विवादों से पुराना नाता रहा है. कुछ वर्ष पहले उन पर रेलवे के पेड़ कटवाकर उनकी लकड़ी बेचने का गंभीर आरोप लगा था. विजिलेंस की जांच में सामने आया था कि संतोष ने सरकारी लकड़ी से न केवल अपने घर का फर्नीचर बनवाया, बल्कि कुछ लकड़ी आरा मशीन पर बेच भी दी थी. इस मामले में आरपीएफ ने मुकदमा भी दर्ज किया था.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

