भारतीय फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता और राजनेता Kamal Haasan ने देश की फिल्म इंडस्ट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को जारी अपने खुले पत्र में कमल हासन ने भारतीय सिनेमा जगत से अपील की कि वह बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए फिल्म निर्माण की प्रक्रिया में व्यावहारिक, टिकाऊ और जिम्मेदार तरीके अपनाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में फिल्म उद्योग को अनावश्यक खर्चों में कटौती कर अधिक अनुशासित और प्रभावी कार्यप्रणाली अपनाने की जरूरत है। कमल हासन का यह पत्र ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक दबावों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
अपने पत्र में कमल हासन ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट लगातार गहराता जा रहा है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और उत्पादन लागत में लगातार वृद्धि हो रही है और भारत भी इससे अछूता नहीं है। उनके अनुसार ईंधन, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और प्रोडक्शन की बढ़ती लागत का असर अब भारतीय फिल्म उद्योग पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण का बजट पहले से ही लगातार बढ़ रहा है और बाजार की रिकवरी भी अब तक पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई है।
कमल हासन ने चेतावनी दी कि बढ़ती महंगाई केवल फिल्म निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर दर्शकों की मनोरंजन पर खर्च करने की क्षमता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक दबाव बढ़ता है तो सिनेमाघरों, वितरकों, निर्माताओं, तकनीशियनों और पूरे फिल्म उद्योग पर इसका बोझ पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सिनेमा को आगे बढ़ाना है तो हर खर्च का उद्देश्य केवल फिल्म की गुणवत्ता होनी चाहिए, केवल भव्यता दिखाना नहीं।
अपने पत्र में कमल हासन ने विशेष रूप से फिल्म उद्योग में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे की संस्कृति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग में सुधार का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि मजदूरों और तकनीशियनों के वेतन, सुरक्षा या सम्मान में कटौती की जाए। उन्होंने कहा कि फिल्म सेट पर काम करने वाले लोगों की सुविधाओं, भोजन, यात्रा, रहने की व्यवस्था और मानवीय कार्य परिस्थितियों से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार सबसे ज्यादा मेहनत करने वाले लोगों पर आर्थिक बोझ डालना गलत होगा।
कमल हासन ने कहा कि सुधार की जरूरत कहीं और है। उन्होंने अनावश्यक खर्च, खराब योजना, जरूरत से ज्यादा लोगों के साथ यात्रा करने की प्रवृत्ति, बिना वजह विदेशी दौरों और शूटिंग में देरी को फिल्म उद्योग की बड़ी समस्या बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर प्रेम कहानी को पेरिस में ही क्यों दिखाना जरूरी समझा जाता है और हर हनीमून स्विट्जरलैंड में ही क्यों समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि रोमांस के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करना जरूरी नहीं है और भारतीय सिनेमा को अपने देश की खूबसूरती और सांस्कृतिक विविधता पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए।
कमल हासन ने भारतीय लोकेशनों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि देश के भीतर ही कई ऐसे सुंदर स्थान मौजूद हैं, जहां विश्वस्तरीय फिल्मों की शूटिंग की जा सकती है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की कि विदेशी शूटिंग की बजाय घरेलू लोकेशनों को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार इससे लागत कम होगी और देश के पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा।
अपने खुले पत्र में कमल हासन ने पूरे फिल्म उद्योग के बीच सामूहिक चर्चा की भी मांग की। उन्होंने कहा कि निर्माता, अभिनेता, निर्देशक, यूनियन, स्टूडियो, वितरक, सिनेमाघर संचालक, ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्म संगठनों को एक साथ बैठकर भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि फिल्म उद्योग को शूटिंग अनुशासन, सीमित समय में काम पूरा करने, गैरजरूरी लक्जरी खर्च कम करने, ऊर्जा संरक्षण और सेट निर्माण में टिकाऊ तरीकों को अपनाने पर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा की कई महान फिल्में अत्यधिक खर्च से नहीं बल्कि स्पष्ट सोच, अनुशासन और मजबूत दृष्टिकोण से बनी थीं। कमल हासन ने कहा कि कई बार उद्योग में भव्यता को ही सफलता और बड़े पैमाने का प्रतीक मान लिया जाता है, जबकि असली ताकत कहानी और सिनेमा की गुणवत्ता में होती है।
कमल हासन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार उपभोग और अनुशासन की जो बात कही गई है, वह हर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है और फिल्म उद्योग को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखने का है। उनके अनुसार भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज और संस्कृति को प्रभावित करने वाली बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग से जुड़े वरिष्ठ और सफल लोगों को खुद उदाहरण पेश करना चाहिए। यदि आज सिनेमा की आर्थिक संरचना को बचाया गया तो भविष्य में फिल्म उद्योग को स्थिर और मजबूत बनाए रखना आसान होगा। कमल हासन के इस पत्र के बाद फिल्म उद्योग में बहस तेज हो गई है। कई लोग उनके सुझावों को समय की जरूरत बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि बड़े बजट और विदेशी लोकेशन आज के वैश्विक सिनेमा का हिस्सा बन चुके हैं।
फिलहाल कमल हासन की यह अपील केवल खर्च कम करने तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे भारतीय फिल्म उद्योग के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव की मांग के रूप में देखा जा रहा है। बढ़ती लागत और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच उनका यह संदेश आने वाले समय में फिल्म उद्योग की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

