भारत के रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता मिली है. भारतीय एआई वॉरफेयर कंपनी FWDA ने शुक्रवार को घोषणा की कि उसका स्वदेशी स्वायत्त युद्धक विमान “काल भैरव” अब यूरोप में भी निर्मित किया जाएगा. इसके लिए कंपनी ने पुर्तगाल की रक्षा तकनीक कंपनी SKETCHPIXEL के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. इस समझौते को भारत की रक्षा तकनीक और स्वदेशी सैन्य नवाचार के लिए बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बार है जब भारत में विकसित किसी एआई आधारित कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म को यूरोपीय रक्षा विनिर्माण नेटवर्क में शामिल किया गया है.
यह साझेदारी ऐसे समय सामने आई है जब भारत वैश्विक रक्षा निर्यातक और रक्षा निर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. “काल भैरव” को भारत की अगली पीढ़ी की स्वायत्त युद्ध प्रणाली के रूप में देखा जा रहा है. इसकी यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने से न केवल भारतीय रक्षा तकनीक की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत होगी, बल्कि भारत और यूरोप के बीच रक्षा सहयोग को भी नई दिशा मिलेगी.
जानकारी के अनुसार पुर्तगाल की कंपनी SKETCHPIXEL आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत सिमुलेशन सिस्टम विकसित करने के लिए जानी जाती है. कंपनी पहले भी F-16 Fighting Falcon जैसे लड़ाकू विमानों के लिए सिमुलेशन तकनीक तैयार कर चुकी है. अब यह कंपनी भारतीय “काल भैरव” परियोजना में सिमुलेशन तकनीक, एआई इंटीग्रेशन सिस्टम, संचार नेटवर्क और इंटरऑपरेबिलिटी क्षमता उपलब्ध कराएगी.
हालांकि इस साझेदारी के बावजूद विमान के स्वायत्त नियंत्रण प्रणाली और एयरफ्रेम डिजाइन से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार भारतीय कंपनी FWDA के पास ही रहेंगे. इसे भारत के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारतीय तकनीकी नियंत्रण और स्वदेशी अधिकार सुरक्षित रहेंगे.
“काल भैरव” को मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने वाले स्वायत्त युद्धक विमान के रूप में डिजाइन किया गया है. इसकी मारक क्षमता और तकनीकी विशेषताओं को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है. बताया गया है कि यह विमान लगभग 3000 किलोमीटर की रेंज के साथ 30 घंटे से अधिक समय तक लगातार संचालन कर सकता है. इसमें एआई आधारित लक्ष्य पहचान प्रणाली, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन नेटवर्क और स्वॉर्म कोऑर्डिनेशन जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं मौजूद हैं. रक्षा विशेषज्ञ इसे भविष्य की स्वायत्त युद्ध प्रणालियों की श्रेणी में रख रहे हैं.
“काल भैरव” परियोजना की खास बात यह भी है कि यह पारंपरिक मानव संचालित महंगे लड़ाकू विमानों की अवधारणा से अलग दिशा में काम करती है. FWDA स्वायत्त वायु शक्ति, ड्रोन स्वॉर्म तकनीक और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम पर आधारित एक व्यापक युद्धक इकोसिस्टम तैयार कर रही है. कंपनी का उद्देश्य भविष्य के युद्धों में मानव जोखिम को कम करना और एआई आधारित तेज निर्णय क्षमता विकसित करना है.
FWDA के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Suhas Tejaskanda ने इस साझेदारी को भारतीय रक्षा नवाचार के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारतीय एआई आधारित युद्ध तकनीकों में गंभीर रुचि दिखा रही है और यह समझौता इस बात का प्रमाण है कि भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक अब वैश्विक निर्माण नेटवर्क का हिस्सा बनने लगी है. उन्होंने कहा कि पुर्तगाल की रणनीतिक स्थिति और नाटो से जुड़े रक्षा नेटवर्क तक पहुंच कंपनी को यूरोप में नए सहयोग और वैश्विक विस्तार के अवसर प्रदान करेगी.
तेजस्कंदा ने कहा कि कंपनी का बड़ा उद्देश्य भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों की सूची में शामिल करना है. उनके अनुसार आने वाले समय में भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं बल्कि उन्नत सैन्य तकनीक निर्यात करने वाला वैश्विक केंद्र बन सकता है. उन्होंने कहा कि “काल भैरव” जैसे प्लेटफॉर्म भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं.
वहीं SKETCHPIXEL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Miguel Abrue ने कहा कि यह साझेदारी दोनों कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता को एक साथ लाएगी. उन्होंने कहा कि FWDA इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई सिस्टम और चिप विश्लेषण में मजबूत क्षमता रखती है, जबकि उनकी कंपनी सिमुलेशन, इंटरऑपरेबिलिटी और सैन्य एकीकरण में विशेषज्ञता रखती है. उनके अनुसार दोनों कंपनियां मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की युद्धक तकनीक विकसित करेंगी.
उन्होंने बताया कि विमान की संरचनात्मक डिजाइन, फर्मवेयर विकास, कम्युनिकेशन सिस्टम, नियंत्रण तंत्र और सुरक्षा सत्यापन जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं दोनों कंपनियां संयुक्त रूप से विकसित करेंगी. इन सभी प्रक्रियाओं को सख्त तकनीकी और सुरक्षा मानकों के तहत तैयार किया जाएगा.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को नई मजबूती दे सकती है. हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है. ड्रोन, मिसाइल, आर्टिलरी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में भारतीय कंपनियां लगातार नए प्रयोग कर रही हैं. “काल भैरव” की यूरोप में एंट्री को भारत की रक्षा तकनीक के वैश्विक स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है.
वैश्विक स्तर पर आधुनिक युद्ध तेजी से एआई, स्वायत्त प्रणालियों और ड्रोन तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे में भारत की यह उपलब्धि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि “काल भैरव” परियोजना सफल रहती है तो भारत आने वाले वर्षों में एआई आधारित रक्षा तकनीक के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

