भारतीय वैज्ञानिक Kuljeet Kaur Marhas ने अंतरराष्ट्रीय विज्ञान जगत में इतिहास रच दिया है। प्रोफेसर कुलजीत कौर मारहास को दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थाओं में शामिल The Meteoritical Society का फेलो चुना गया है। वह यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। ग्रह विज्ञान और उल्कापिंड अनुसंधान के क्षेत्र में इसे दुनिया के सबसे बड़े सम्मानों में गिना जाता है।
यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का क्षण मानी जा रही है। प्रोफेसर मारहास अब उन चुनिंदा वैश्विक वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हो गई हैं, जिनके शोध ने ग्रहों की उत्पत्ति, अंतरिक्षीय पदार्थों और सौर मंडल के विकास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
साल 1933 में स्थापित द मेटियोरिटिकल सोसाइटी पिछले 90 वर्षों से ग्रह विज्ञान और उल्कापिंड अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को फेलो के रूप में सम्मानित करती आ रही है। यह संस्था विशेष रूप से उल्कापिंडों और अंतरिक्ष से जुड़े पदार्थों के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती है, जिससे सौर मंडल की उत्पत्ति और विकास को बेहतर तरीके से समझा जा सके।
प्रोफेसर कुलजीत कौर मारहास अपने शोध कार्यों के लिए वैश्विक स्तर पर पहचानी जाती हैं। उन्होंने अंतरिक्षीय पदार्थों में पाए जाने वाले शॉर्ट-लिव्ड रेडियोन्यूक्लाइड्स और स्थिर आइसोटोप्स पर महत्वपूर्ण शोध किया है। उनका काम प्री-सोलर ग्रेन्स, कैल्शियम-एल्यूमिनियम रिच इंक्लूज़न यानी CAIs, कोंड्रूल्स और उल्कापिंडों में मौजूद ऑर्गेनिक मैटर के अध्ययन से जुड़ा रहा है।
उन्होंने कई प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों से पृथ्वी पर लाए गए नमूनों का भी अध्ययन किया है। इनमें Stardust, Hayabusa और Apollo program जैसे ऐतिहासिक मिशन शामिल हैं। इन मिशनों से प्राप्त अंतरिक्षीय नमूनों के विश्लेषण ने वैज्ञानिकों को सौर मंडल के शुरुआती दौर को समझने में नई जानकारी दी है।
प्रोफेसर मारहास ने अपने शोध में अत्याधुनिक Secondary Ion Mass Spectrometry यानी SIMS और nanoSIMS तकनीकों का इस्तेमाल किया। इन तकनीकों की मदद से उन्होंने प्राचीन अंतरिक्षीय पदार्थों में सुरक्षित आइसोटोपिक संकेतों का अध्ययन किया। उनके निष्कर्षों ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि सौर मंडल का निर्माण और विकास किस तरह हुआ।
द मेटियोरिटिकल सोसाइटी की फेलो चुने जाने के अलावा प्रोफेसर कुलजीत कौर मारहास American Geophysical Union की भी फेलो हैं। उन्हें ग्रह विज्ञान और अंतरिक्षीय पदार्थों के अध्ययन में योगदान के लिए देवेंद्र लाल मेमोरियल मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।
वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि प्रोफेसर मारहास की यह उपलब्धि देश की युवा महिला वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा बनेगी और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगी।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

