एनसीआर में पेट्रोल-डीजल कैब पर हरियाणा सरकार का बड़ा प्रहार, मोदी की ईंधन बचाओ मुहिम को मिला नया बल

एनसीआर में पेट्रोल-डीजल कैब पर हरियाणा सरकार का बड़ा प्रहार, मोदी की ईंधन बचाओ मुहिम को मिला नया बल

प्रेषित समय :19:25:39 PM / Tue, May 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन खपत को कम करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नए एग्रीगेटर लाइसेंसिंग नियमों को मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत अब कैब एग्रीगेटर कंपनियों, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल होने वाले सभी नए वाहन केवल सीएनजी, इलेक्ट्रिक, बैटरी ऑपरेटेड या अन्य स्वच्छ ईंधन आधारित होंगे। इस फैसले को प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचत और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की राष्ट्रीय मुहिम से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

सरकार के इस फैसले के अनुसार 1 जनवरी 2026 से एनसीआर क्षेत्र में किसी भी एग्रीगेटर कंपनी के बेड़े में नया पेट्रोल या डीजल वाहन शामिल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा ऑटो-रिक्शा श्रेणी में भी केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति मिलेगी। हरियाणा सरकार ने यह कदम केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की गाइडलाइन और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम के निर्देशों के अनुरूप उठाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला एनसीआर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। दिल्ली-एनसीआर लंबे समय से प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। हर साल सर्दियों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। प्रदूषण के प्रमुख कारणों में वाहनों से निकलने वाला धुआं सबसे बड़ी वजह माना जाता है। ऐसे में यदि टैक्सी, डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेक्टर में नए पेट्रोल-डीजल वाहनों की एंट्री बंद होती है तो आने वाले वर्षों में प्रदूषण स्तर में कमी देखने को मिल सकती है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। भारत सरकार लगातार ईंधन बचत को लेकर जागरूकता अभियान चला रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में नागरिकों से ईंधन की बचत करने, गैर जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने और सादगी अपनाने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि यदि पेट्रोल और डीजल आधारित वाहनों की संख्या कम होगी तो देश की ईंधन निर्भरता भी घटेगी और विदेशी मुद्रा का दबाव कम होगा।

हरियाणा सरकार के नए नियम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं बल्कि इनमें यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। नए ढांचे के तहत एग्रीगेटर कंपनियों और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। कंपनियों को ड्राइवर और वाहन पंजीकरण, यात्री सुरक्षा, शिकायत निवारण, प्रशिक्षण कार्यक्रम, साइबर सुरक्षा और किराया नियंत्रण जैसे कई नियमों का पालन करना होगा।

सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी कड़े प्रावधान किए हैं। नियमों के अनुसार प्रत्येक यात्री के लिए कम से कम पांच लाख रुपये का बीमा कवर देना होगा। वहीं ड्राइवरों के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और न्यूनतम दस लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर जैसी सुविधाएं अनिवार्य होंगी।

नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को 24 घंटे संचालित होने वाले कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी स्थापित करने होंगे ताकि यात्रियों की शिकायतों का तत्काल समाधान किया जा सके। सरकार डिजिटल पारदर्शिता पर भी जोर दे रही है। वाहन और ड्राइवरों की जानकारी VAHAN और SARATHI पोर्टल के माध्यम से सत्यापित की जाएगी। कंपनियों को अपने सभी ड्राइवरों और वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा।

हरियाणा सरकार ने इस नीति में दिव्यांगजन के लिए सुलभ वाहनों को बढ़ावा देने और चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने का भी प्रावधान किया है। परिवहन मंत्री Anil Vij ने बताया कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 100 प्रतिशत टैक्स छूट देने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर हरियाणा में भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर पूर्ण टैक्स छूट लागू की जा सकती है ताकि लोग तेजी से ईवी अपनाएं।

वर्तमान में हरियाणा में इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन शुल्क पर 20 प्रतिशत की छूट दी जाती है। सरकार का मानना है कि यदि टैक्स पूरी तरह माफ कर दिया जाए तो इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेजी आएगी। इसी दिशा में राज्य सरकार ने 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की योजना भी बनाई है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में एनसीआर के प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। डीजल और पेट्रोल आधारित वाहनों से निकलने वाले पीएम 2.5 और पीएम 10 कण वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ने से इन प्रदूषकों में कमी आने की उम्मीद है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल नियम बना देना काफी नहीं होगा। इसके लिए मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त सीएनजी स्टेशन, बैटरी तकनीक और कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। यदि सरकार इन क्षेत्रों में तेजी से निवेश करती है तो हरियाणा का यह मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण बन सकता है।

हरियाणा सरकार का यह कदम अब सिर्फ एक परिवहन नीति नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और भविष्य की स्वच्छ मोबिलिटी की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर न केवल एनसीआर की हवा पर बल्कि देश की ऊर्जा नीति और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर भी दिखाई दे सकता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-