भोपाल. चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पीड़ित परिवार ने पहली बार खुलकर मीडिया के सामने आकर अपना दर्द, गुस्सा और न्याय की मांग रखी। राजधानी भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मृतका के पिता नवीनिधि शर्मा और भाई मेजर हर्षित शर्मा ने जांच प्रक्रिया, पुलिस कार्रवाई और आरोपी पक्ष के कथित प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे भावुक और संवेदनशील पहलू वह रहा जब परिवार ने आरोप लगाया कि उनकी दिवंगत बेटी का सुनियोजित तरीके से चरित्र हनन किया जा रहा है। परिवार ने कहा कि पहले उनसे उनकी बेटी छीन ली गई और अब उसकी इज्जत पर हमला कर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मृतका के पिता नवीनिधि शर्मा बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने मीडिया और समाज से अपील करते हुए कहा कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है और वह अपने बचाव में कुछ कहने की स्थिति में भी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग उसके चरित्र पर सवाल उठाकर उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी मृत व्यक्ति, खासकर किसी महिला पीड़िता की इस तरह से चरित्र हत्या करना न केवल अमानवीय है बल्कि कानूनी रूप से भी अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सुनियोजित तरीके से ऐसे नैरेटिव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं जिससे पूरा मामला भटक जाए और आरोपी पक्ष को फायदा पहुंचे।
नवीनिधि शर्मा ने मीडिया से भी संवेदनशीलता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार की बेटी की मौत हो चुकी हो, उस समय उसके चरित्र पर सवाल उठाना पीड़ित परिवार के लिए दोहरी सजा जैसा होता है। उन्होंने कहा कि किसी भी रिपोर्ट या चर्चा से पहले यह जरूर सोचना चाहिए कि उस परिवार पर क्या गुजर रही होगी जिसकी बेटी अब कभी लौटकर नहीं आने वाली। उन्होंने कहा कि मीडिया को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर पीड़िता की गरिमा की रक्षा करनी चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मृतका के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने जांच एजेंसियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में शुरुआत से ही कई चीजें संदिग्ध नजर आ रही हैं। हर्षित शर्मा ने कहा कि पुलिस को घटना की सबसे पहली सूचना उनके परिवार की ओर से दी गई थी, न कि आरोपियों की तरफ से। उन्होंने कहा कि आरोपी पक्ष यह दावा कर रहा है कि वे ट्विशा को बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे थे, लेकिन घटना से जुड़े वीडियो कुछ और कहानी बयान करते हैं।
हर्षित शर्मा ने कहा कि वीडियो में आरोपी पक्ष की सदस्य गिरिबाला सिंह बेहद शांत तरीके से सीढ़ियों पर आती-जाती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वास्तव में घर में कोई गंभीर स्थिति थी तो वहां घबराहट या तत्काल मदद बुलाने की कोशिश क्यों नहीं दिखी। उन्होंने यह भी कहा कि गिरिबाला सिंह न्यायिक व्यवस्था को अच्छी तरह समझती हैं और उनका घर पुलिस थाने से महज कुछ सेकंड की दूरी पर है, फिर भी पुलिस को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई।
मेजर हर्षित शर्मा ने एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए तीन दिन तक संघर्ष करना पड़ा और आखिरकार 15 मई की रात करीब ढाई बजे मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले ही आरोपी पक्ष ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर दिया था, जिससे पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस शुरुआत में ही निष्पक्ष और तेज कार्रवाई करती तो शायद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे।
हर्षित शर्मा ने अदालत द्वारा एक आरोपी को राहत दिए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अदालत में आरोपी पक्ष को 63 वर्षीय प्रतिष्ठित महिला और गैर-खतरनाक बताते हुए राहत दी गई, लेकिन वही महिला अब उनके परिवार को धमकाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट परिसर में उनके 61 वर्षीय पिता को डराने और धमकाने के लिए लोगों को भेजा गया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही हैं कि उन्हें पीटा जाएगा और चुप रहने के लिए मजबूर किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेजर हर्षित शर्मा ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया कि मामले का मुख्य आरोपी समर्थ सिंह आखिर कहां है और वह अब तक फरार क्यों है। उन्होंने कहा कि मीडिया और जांच एजेंसियों का ध्यान इस अहम सवाल की ओर क्यों नहीं जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों की वजह से मामले की दिशा बदलने की कोशिश की जा रही है। हर्षित शर्मा ने यह भी मांग की कि मामले में दूसरी पोस्टमार्टम जांच की संभावना पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए ताकि मौत की परिस्थितियों को लेकर किसी भी तरह का संदेह दूर हो सके।
परिवार ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, लेकिन उन्हें यह भी महसूस हो रहा है कि प्रभावशाली लोगों के कारण न्याय मिलने में देरी हो रही है। नवीनिधि शर्मा ने कहा कि अदालत में खुद पुलिस ने यह स्वीकार किया कि आरोपियों का प्रभाव इतना ज्यादा है कि उन्हें आसानी से जमानत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके परिवार की सिर्फ एक मांग है कि निष्पक्ष जांच हो, सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनकी बेटी को न्याय मिले।
इस पूरे मामले ने भोपाल ही नहीं बल्कि देशभर में बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर परिवार का आरोप है कि कुछ लोग लगातार पीड़िता की छवि खराब करने में लगे हैं ताकि असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा सके। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पिता और भाई दोनों की आंखों में दर्द साफ दिखाई दे रहा था। परिवार ने कहा कि उनकी लड़ाई केवल अपनी बेटी के लिए नहीं बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए है जो घरेलू प्रताड़ना, मानसिक दबाव और सामाजिक अपमान के बीच न्याय की उम्मीद लगाए बैठी हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

