जबलपुर.बरगी क्रूज हादसे के बाद नर्मदा नदी में नावों के संचालन पर लगी रोक अब हजारों लोगों की परेशानी का कारण बन गई है. पिछले 16 दिनों से गौरीघाट और तिलवारा घाट पर नौकायान पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे नर्मदा पार बसे करीब 50 गांवों के लोगों का जनजीवन प्रभावित हो गया है. एक ओर जहां ग्रामीणों को अब कई किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर शहर पहुंचना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर नाविकों के सामने रोजगार और परिवार चलाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. प्रशासन का कहना है कि अब सुरक्षा मानकों के तहत नए नियमों के साथ ही नावों का संचालन दोबारा शुरू किया जाएगा.
इस बीच विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट के पंचवटी घाट पर रविवार से नौकायान फिर शुरू कर दिया गया है. इससे पर्यटकों और नाविकों दोनों को राहत मिली है. लंबे समय तक नावें बंद रहने के कारण पंचवटी और बंदरकूदनी जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटक मायूस लौट रहे थे. नाव संचालन शुरू होने के बाद वहां दोबारा रौनक लौटने लगी है.
बरगी क्रूज हादसे के बाद नगर निगम प्रशासन ने सुरक्षा इंतजामों की कमी को देखते हुए गौरीघाट और तिलवारा घाट पर नाव संचालन पर रोक लगा दी थी. इसके बाद से नर्मदा नदी के उस पार बसे गांवों के लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. मंगेली, सनद पिपरिया, बढ़ैयाखेड़ा, सिवनी टोला, नारायणपुर और मानेगांव सहित कई गांवों के लोग पहले नाव के जरिए बेहद कम समय में शहर पहुंच जाते थे. ग्रामीण अपने दोपहिया वाहन तक बड़ी नावों में रखकर नदी पार करते थे और रोजमर्रा के काम, रोजगार, व्यापार तथा दूध सप्लाई जैसे कार्य आसानी से कर लेते थे.
अब स्थिति यह है कि जिन लोगों को पहले केवल एक किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, उन्हें अब भटौली की ओर बने नर्मदा ब्रिज से होकर आठ से दस किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है. वहीं कुछ गांवों के लोगों को तिलवारा मार्ग से करीब 15 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. इससे ग्रामीणों का समय, पैसा और श्रम तीनों बढ़ गए हैं. सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर वर्ग, किसानों, दूध विक्रेताओं और छोटे व्यापारियों को हो रही है, जो रोजाना शहर आकर काम करते थे.
स्थानीय लोगों का कहना है कि नाव बंद होने से उनका पूरा जीवन प्रभावित हो गया है. कई मजदूर समय पर काम पर नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि छात्रों और छोटे व्यापारियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गांव के लोगों का कहना है कि नावें उनके लिए केवल परिवहन का साधन नहीं थीं बल्कि शहर और गांव के बीच जीवन रेखा की तरह काम करती थीं.
नाव संचालन बंद होने का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है. नर्मदा नदी के उस पार स्थित गुरुद्वारे में रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु मत्था टेकने जाते थे, लेकिन अब नाव बंद होने के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बुजुर्ग और महिलाएं लंबा रास्ता तय नहीं कर पा रहे हैं, जिससे धार्मिक स्थलों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है.
इधर नाविकों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. गौरीघाट पर लगभग 100 नावों का संचालन होता है, जिनमें से करीब 68 नावों को नगर निगम से लाइसेंस मिला हुआ है. इन नावों से जुड़े सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पूरी तरह नौकायान पर निर्भर है. नाविकों का कहना है कि पिछले 16 दिनों से उनकी आमदनी पूरी तरह बंद हो चुकी है. नाविक संजीव मल्लाह ने बताया कि प्रशासन द्वारा नाव बंद करने के आदेश के बाद से अधिकांश नाविक बेरोजगार हो गए हैं और अब परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है.
प्रशासन का कहना है कि हादसे के बाद बिना सुरक्षा उपायों के नाव संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती. नगर निगम और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब हर नाव में लाइफ जैकेट और अन्य सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होंगे. लेकिन नाविकों का कहना है कि सुरक्षा मानकों को पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है. जानकारी के अनुसार एक लाइफ जैकेट की कीमत 700 से 900 रुपये तक है और अधिकांश नाविक इतने महंगे सुरक्षा उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं हैं. वर्तमान में केवल लगभग 10 नाविक ही पूरी संख्या में लाइफ जैकेट खरीद पाए हैं.
नगर निगम के अनुसार नाव संचालन शुरू करने से पहले सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कराया जाएगा. रामपुर जोन के अधिकारी पवन आसाटी ने कहा कि गौरीघाट में नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा इंतजामों को लेकर चर्चा की गई है. उन्होंने बताया कि कुछ नाविक ही अभी निर्धारित मानकों को पूरा कर पा रहे हैं और एक सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास किया जाएगा. प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा गाइडलाइन के अनुसार दोबारा ठेका प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नाव संचालन की अनुमति दी जाएगी.
हालांकि भेड़ाघाट में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कई पर्यटकों ने आरोप लगाया है कि कुछ नाविक केवल औपचारिकता के तौर पर लाइफ जैकेट पहना रहे हैं. कुछ जैकेट पुराने और फटे हुए बताए जा रहे हैं. कई मामलों में जैकेट को सही तरीके से बांधा भी नहीं जा रहा. ऐसे में बरगी हादसे के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत नहीं दिखाई दे रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बरगी क्रूज हादसे ने प्रशासन और नाव संचालकों दोनों की तैयारियों की पोल खोल दी है. लंबे समय से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही थी, लेकिन हादसे के बाद अब प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है. हालांकि लोगों का कहना है कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही आम जनता और नाविकों की समस्याओं का भी त्वरित समाधान किया जाना चाहिए.
फिलहाल नर्मदा किनारे बसे गांवों के लोग जल्द से जल्द नाव संचालन बहाल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. वहीं नाविकों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा. बरगी हादसे के बाद अब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा और आम लोगों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना बन गई है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

