ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या पर बनेगा दुर्लभ महासंयोग, स्नान दान और पितृ तर्पण से मिलेगा अक्षय पुण्य

ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या पर बनेगा दुर्लभ महासंयोग, स्नान दान और पितृ तर्पण से मिलेगा अक्षय पुण्य

प्रेषित समय :22:19:14 PM / Wed, May 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है, लेकिन साल 2026 की ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या कई दुर्लभ संयोगों के कारण और भी खास मानी जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास का संयोग बना है, जिसके चलते इस महीने में दो अमावस्या तिथियां पड़ रही हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अधिक मास की अमावस्या पर किए गए दान, जप, तप और पितृ तर्पण का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है. यही कारण है कि इस बार की ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या को बेहद शुभ और दुर्लभ माना जा रहा है.

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई 2026 से हो चुकी है और इसका समापन 15 जून 2026 को होगा. इसी दिन अधिक मास की अमावस्या भी मनाई जाएगी. अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. हालांकि उदया तिथि के अनुसार 15 जून को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए स्नान, दान, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए 15 जून का दिन श्रेष्ठ माना गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, साधना और पितरों को स्मरण करने के लिए विशेष माना जाता है. अधिक मास में पड़ने वाली अमावस्या का महत्व सामान्य अमावस्या से कहीं अधिक होता है. कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का फल अक्षय होता है और व्यक्ति को कई गुना पुण्य प्राप्त होता है. श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, गरीबों को अन्न-वस्त्र दान और पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत शुभ मानते हैं.

इस बार ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या पर कई दुर्लभ और शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 15 जून को सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे. इस विशेष संक्रांति को मिथुन संक्रांति कहा जाता है और इसका आध्यात्मिक प्रभाव अत्यंत शुभ माना जाता है. इसके अलावा इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है. मान्यता है कि इन शुभ योगों में किए गए दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान का फल कभी नष्ट नहीं होता.

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है और इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भगवद्गीता का अध्ययन और पुरुषोत्तम माहात्म्य का श्रवण अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि अधिक मास में किए गए जप-तप और उपवास से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

पितृ दोष और पारिवारिक परेशानियों से मुक्ति के लिए भी यह अमावस्या बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम से जल अर्पित करने, तर्पण और पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है. कई लोग इस दिन ब्राह्मण भोजन, गौ सेवा और जरूरतमंदों को अन्नदान भी करते हैं.

धार्मिक जानकारों के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और पितरों का स्मरण करना शुभ रहेगा. पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करना, दीपक जलाना और गरीबों को दान देना विशेष फलदायी माना गया है. साथ ही इस दिन क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है.

ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन बेहद प्रभावशाली माना जा रहा है. मिथुन संक्रांति और शुभ योगों के साथ अधिक मास का समापन होने के कारण इस अमावस्या का असर धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है. श्रद्धालुओं के लिए यह दिन साधना, दान और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना जा रहा है.

देशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों पर इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होने की संभावना है. हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और वाराणसी जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ सकती है. धार्मिक संगठनों और ज्योतिषाचार्यों ने लोगों से इस दुर्लभ संयोग का लाभ उठाकर पूजा-पाठ और पुण्य कार्य करने की अपील की है.

साल 2026 की ज्येष्ठ अधिक मास अमावस्या केवल एक धार्मिक तिथि नहीं बल्कि श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का दुर्लभ संगम मानी जा रही है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किए गए शुभ कार्य जीवन में सकारात्मक बदलाव और सुख-समृद्धि का मार्ग खोल सकते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-