भारत में अब रातें भी बन रहीं जानलेवा, बढ़ती गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ाईं

भारत में अब रातें भी बन रहीं जानलेवा, बढ़ती गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ाईं

प्रेषित समय :19:02:14 PM / Fri, May 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारत में गर्मी अब केवल दोपहर की झुलसाती धूप तक सीमित नहीं रह गई है. बदलते मौसम और तेजी से बढ़ते तापमान ने अब रातों की ठंडक भी छीन ली है. उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, वहीं देश के कई शहरों में रात का तापमान भी 30 डिग्री के करीब दर्ज किया जा रहा है. हालत यह है कि रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही. पंखे और कूलर चलने के बावजूद शरीर ठंडा नहीं हो पा रहा और लोग सुबह उठने से पहले ही थकान महसूस कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की गर्मी अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और “अनएस्केपेबल” होती जा रही है.

क्लाइमेट ट्रेंड्स की हालिया रिपोर्ट “व्हाय इंडिया’स हीटवेव्स फील मोर ब्रूटल दैन बिफोर” में दावा किया गया है कि भारत की हीटवेव अब केवल दिन की गर्मी नहीं रही, बल्कि लगातार बढ़ती गर्म रातें और उमस इसे और गंभीर बना रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हीटवेव की आवृत्ति और अवधि लगातार बढ़ रही है. भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1961 से अब तक इन क्षेत्रों में हीटवेव की आवृत्ति हर दशक 0.1 दिन और अवधि 0.44 दिन प्रति दशक बढ़ी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम विज्ञान में ऐसे छोटे दिखाई देने वाले बदलाव लंबे समय में समाज और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डालते हैं. इसका सीधा प्रभाव खेती, बिजली की मांग, मजदूरों की कार्यक्षमता और अस्पतालों पर बढ़ते दबाव के रूप में दिखाई देता है. रिपोर्ट के मुताबिक 2010 से 2024 के बीच भारत में औसत न्यूनतम तापमान लगभग 0.21 डिग्री प्रति दशक बढ़ा है. देश के 36 में से 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रातें पहले से ज्यादा गर्म हो रही हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार घर के भीतर तापमान लगातार 24 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे नींद, दिल और शरीर की रिकवरी पर असर पड़ता है. लेकिन भारत के कई हिस्सों में रात का तापमान अब इस सीमा से काफी ऊपर पहुंच चुका है. यही कारण है कि अब लोग केवल दिन में नहीं बल्कि रात में भी “हीट स्ट्रेस” का सामना कर रहे हैं.

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में राजस्थान और पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से आने वाली गर्म और सूखी हवाएं उत्तर और मध्य भारत में लगातार तापमान बढ़ा रही हैं. स्काईमेट वेदर के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार जब दिन में अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो जमीन और इमारतें रातभर गर्मी छोड़ती रहती हैं, जिससे तापमान नीचे नहीं आ पाता. यही वजह है कि रातें भी अब गर्म महसूस हो रही हैं.

हालांकि केवल तापमान ही इस संकट का कारण नहीं है. हवा में बढ़ती नमी भी गर्मी को और अधिक खतरनाक बना रही है. रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 से 2019 के मुकाबले 2020 से 2024 के बीच भारत की औसत आर्द्रता 67.1 प्रतिशत से बढ़कर 71.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है. हवा में बढ़ती नमी शरीर को पसीने के जरिए ठंडा होने से रोकती है. यही कारण है कि कई बार 40 डिग्री की सूखी गर्मी से ज्यादा खतरनाक 36 डिग्री की उमस भरी गर्मी साबित होती है.

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में आर्द्रता में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है. पिछले दशक में देश में “हॉट एंड ह्यूमिड” दिनों की संख्या 14 हजार से बढ़कर लगभग 17 हजार तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की गर्मी अब केवल “सूखी लू” नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे ट्रॉपिकल हीट स्ट्रेस में बदलती जा रही है.

शहरों का तेजी से फैलता कंक्रीट भी इस संकट को बढ़ा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सीमेंट, डामर, कम होते पेड़, बढ़ता ट्रैफिक और एयर कंडीशनर से निकलने वाली गर्म हवा शहरों को “हीट ट्रैप” में बदल रही है. कई शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 2 से 10 डिग्री तक ज्यादा गर्म हो चुके हैं. इसका सबसे अधिक असर गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है, जो दिनभर बाहर काम करते हैं और रात में भी गर्मी से राहत नहीं पा रहे.

क्लाइमेट ट्रेंड्स की संस्थापक आरती खोसला का कहना है कि भारत की हीटवेव अब केवल तापमान की कहानी नहीं है. बढ़ती नमी, गर्म रातें, शहरीकरण और क्लाइमेट चेंज मिलकर इसे ज्यादा लंबा, ज्यादा थकाने वाला और ज्यादा खतरनाक बना रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सूखी मिट्टी और कम बारिश भी हीटवेव को और तीखा बना रही है. जब जमीन में नमी नहीं होती तो सूरज की ऊर्जा मिट्टी को ठंडा करने के बजाय हवा को और गर्म करने में लगती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अब गर्मी केवल मौसम का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह शहरों की डिजाइन, जल संकट, जंगलों की कटाई, सामाजिक असमानता और बदलते पर्यावरण की भी कहानी बन चुकी है. यही कारण है कि अब लोग केवल यह नहीं पूछ रहे कि तापमान कितना पहुंचा, बल्कि यह सवाल भी उठा रहे हैं कि आखिर रातें भी इतनी गर्म क्यों हो गई हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-