दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार का बड़ा आदेश, 5 जून तक खाली करनी होगी 27 एकड़ जमीन

दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार का बड़ा आदेश, 5 जून तक खाली करनी होगी 27 एकड़ जमीन

प्रेषित समय :21:55:12 PM / Sat, May 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने राजधानी के प्रतिष्ठित Delhi Gymkhana Club को बड़ा झटका देते हुए उसके 27.3 एकड़ परिसर को 5 जून तक खाली करने का आदेश जारी किया है. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय यानी एलएंडडीओ ने क्लब को निर्देश दिया है कि वह सफदरजंग रोड स्थित अपनी पूरी संपत्ति निर्धारित समय सीमा तक सरकार को सौंप दे. आदेश में कहा गया है कि यह जमीन सार्वजनिक हित, रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

भूमि एवं विकास कार्यालय की ओर से जारी आदेश पर उप भूमि एवं विकास अधिकारी Suchit Goyal के हस्ताक्षर हैं. आदेश में कहा गया है कि क्लब का परिसर राजधानी के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में स्थित है तथा इसे सरकारी जरूरतों और राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजनाओं के लिए आवश्यक माना गया है. सरकार ने यह कार्रवाई मूल लीज डीड में मौजूद “सार्वजनिक उद्देश्य” संबंधी प्रावधान का उपयोग करते हुए की है.

सरकारी आदेश के अनुसार यह भूमि रक्षा अधोसंरचना, प्रशासनिक आवश्यकताओं और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं के लिए जरूरी है. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि आसपास की सरकारी जमीनों को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया के साथ इस भूमि का उपयोग समन्वित रूप से किया जाएगा.

लुटियंस दिल्ली के केंद्र में स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब राजधानी के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है. यह क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के बेहद करीब स्थित है. इसकी स्थापना वर्ष 1913 में “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” के रूप में हुई थी, जिसे स्वतंत्रता के बाद वर्तमान नाम दिया गया. वर्ष 1928 में इस क्लब को स्थायी लीज पर यह जमीन आवंटित की गई थी, जिसका उद्देश्य सामाजिक और खेल गतिविधियों के लिए क्लब संचालन था.

सरकार की यह कार्रवाई लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक और प्रबंधन विवाद के बीच सामने आई है. वर्ष 2022 में National Company Law Tribunal ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को क्लब की सामान्य समिति में निदेशकों की नियुक्ति की अनुमति दी थी. उस समय क्लब के प्रबंधन और संचालन में अनियमितताओं तथा कुप्रबंधन के आरोपों का उल्लेख किया गया था.

ताजा आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि क्लब 5 जून तक परिसर खाली नहीं करता है तो सरकार कानून के अनुसार कब्जा लेने की कार्रवाई करेगी. आदेश के मुताबिक परिसर की सभी इमारतें, संरचनाएं, लॉन और अन्य स्थायी निर्माण भारत के राष्ट्रपति के अधिकार में चले जाएंगे.

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आदेश की प्रति संबंधित पुलिस उपायुक्त को भी भेजी गई है. पुलिस प्रशासन को परिसर खाली कराने के दौरान आवश्यक सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि क्लब की ओर से इस पूरे मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

केंद्र सरकार की यह कार्रवाई हाल के महीनों में मध्य दिल्ली में भूमि पुनः अधिग्रहण की श्रृंखला का हिस्सा मानी जा रही है. इससे पहले मार्च में भूमि एवं विकास कार्यालय ने United News of India के रफी मार्ग स्थित परिसर को सील कर दिया था. दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा लीज शर्तों के उल्लंघन के आधार पर भूमि आवंटन रद्द किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया था.

इसी अवधि में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित झुग्गी बस्तियों को भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे. सरकार लगातार लुटियंस दिल्ली क्षेत्र में स्थित संवेदनशील परिसरों और संस्थागत जमीनों की समीक्षा कर रही है.

जानकारी के अनुसार भूमि एवं विकास कार्यालय दिल्ली में लगभग 60 हजार से अधिक आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और संस्थागत लीज संपत्तियों का प्रबंधन करता है. इनमें चाणक्यपुरी, जोरबाग, गोल्फ लिंक्स, सुंदर नगर और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं. कुल संपत्तियों में लगभग 1430 संस्थागत परिसरों का प्रबंधन एलएंडडीओ के अधीन है.

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में स्थित बड़ी संस्थागत जमीनों को लेकर सरकार अब अधिक सख्त रुख अपना रही है. वहीं दिल्ली जिमखाना क्लब जैसे ऐतिहासिक संस्थान पर हुई इस कार्रवाई ने नौकरशाही, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस भी छेड़ दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-