नई दिल्ली. देशभर में नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर जारी विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों का संकेत दिया है. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रही है तथा अगले वर्ष से तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, हालांकि इतने बड़े स्तर पर बदलाव एक वर्ष में पूरी तरह लागू नहीं किए जा सकते.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर बेहद गंभीर है और लगातार नई व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके. उन्होंने संकेत दिए कि अगले वर्ष से कई प्रतियोगी परीक्षाएं पूरी तरह डिजिटल और तकनीक संचालित स्वरूप में आयोजित की जा सकती हैं.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज है. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए के अधिकारियों ने संसदीय स्थायी समिति को जानकारी दी कि प्रश्नपत्र पूरी तरह लीक नहीं हुआ था, बल्कि परीक्षा से पहले कुछ प्रश्न बाहर आए थे. सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने समिति को बताया कि एजेंसी की प्रणाली से कोई प्रत्यक्ष सेंधमारी नहीं हुई और मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई द्वारा की जा रही है.
संसदीय समिति के समक्ष एनटीए के महानिदेशक Abhishek Singh और उच्च शिक्षा सचिव Vineet Joshi ने परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी. अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सुझाए गए कई सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं, जबकि अन्य उपायों पर तेजी से काम जारी है.
बैठक के दौरान अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रश्नों के सीमित स्तर पर बाहर आने की जानकारी मिलने के बाद भी एजेंसी ने “शून्य सहनशीलता नीति” अपनाते हुए परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया. उनका कहना था कि यदि कुछ प्रश्न भी परीक्षा से पहले सार्वजनिक हो जाएं तो इससे प्रतियोगी परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित होती है और छात्रों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है.
सूत्रों के मुताबिक संसदीय समिति में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई. इनमें नीट-यूजी परीक्षा को अगले वर्ष से कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव भी शामिल है. अधिकारियों ने बताया कि तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से प्रश्नपत्र की सुरक्षा, निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सकेगा.
नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद के कारण देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी चिंता का माहौल बना हुआ है. यह परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 22 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था. बाद में प्रश्नपत्र लीक होने और अनियमितताओं के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द कर दी गई थी.
केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया है. पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी. इस बार परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे. मंत्रालय ने राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ाने, डिजिटल सुरक्षा तंत्र मजबूत करने और संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने की तैयारी की जा रही है.
नीट विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल भी लगातार गर्म बना हुआ है. विपक्षी दल केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियां छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं. वहीं सरकार का कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली प्रभावी ढंग से लागू की जाती है तो इससे पारंपरिक पेपर लीक की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है. हालांकि इसके लिए मजबूत डिजिटल ढांचा, साइबर सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी बड़ी चुनौती होगी.
फिलहाल लाखों छात्र पुनर्परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं और सभी की नजरें केंद्र सरकार तथा एनटीए द्वारा किए जा रहे सुधारों पर टिकी हुई हैं. आने वाले महीनों में परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जो देश की प्रतियोगी परीक्षाओं के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

