प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना होगा और महंगा, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी फीस बढ़ाने की इजाजत

प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना होगा और महंगा, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी फीस बढ़ाने की इजाजत

प्रेषित समय :18:08:34 PM / Sat, May 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. दिल्ली के प्राइवेट और अनएडेड स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों की जेब पर अब अतिरिक्त बोझ पडऩे वाला है. दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए निजी स्कूलों को आगामी शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2027 से फीस में बढ़ोतरी करने की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय के उन पुराने आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिनके तहत स्कूलों के फीस बढ़ाने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया था.

अदालत ने साफ किया कि स्कूल अब अपनी उस आखिरी प्रस्तावित योजना के तहत फीस बढ़ा सकेंगे, जिसे उन्होंने मंजूरी के लिए शिक्षा निदेशालय को भेजा था. हालांकि, इस फैसले में हाईकोर्ट ने अभिभावकों और छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्मण रेखा भी खींची है. अदालत ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि कोई भी स्कूल पिछले शैक्षणिक सत्रों के लिए माता-पिता या छात्रों से कोई भी पिछला बकाया या अन्य शुल्क बैक-डेट से नहीं मांग सकता और न ही उसकी वसूली कर सकता है.

नया सत्र शुरू होने पर इजाजत की जरूरत नहीं

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनूप भंभानी ने शिक्षा निदेशालय के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि निदेशालय द्वारा स्कूलों के प्रस्तावों को खारिज करने का आदेश कानूनन सही नहीं है. अदालत ने पुराने कानूनी फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी प्राइवेट, अनएडेड और मान्यता प्राप्त स्कूल को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर अपनी फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से किसी पूर्व अनुमति या मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है.

स्कूलों की एकमात्र जिम्मेदारी

कानून के मुताबिक स्कूलों की एकमात्र वैधानिक बाध्यता यह है कि उन्हें नया सत्र शुरू होने से पहले अपनी प्रस्तावित फीस का पूरा विवरण शिक्षा निदेशालय के पास जमा करना होता है. शिक्षा निदेशालय की अनुमति केवल तब अनिवार्य होती है, जब कोई स्कूल बीच शैक्षणिक सत्र (चलते हुए साल) के दौरान अचानक फीस बढ़ाना चाहता हो.

संतुलन बनाने की कोशिश

हाईकोर्ट ने माना कि शिक्षा निदेशालय कई सालों तक स्कूलों के प्रस्तावों पर कुंडली मारकर बैठा रहा, जिससे कई स्कूल गंभीर वित्तीय संकट में आ गए. अदालत ने कहा कि अगर साल 2016-17 से अटके इन प्रस्तावों को आज लागू कर दिया जाता और पिछला एरियर वसूलने की छूट दी जाती, तो अभिभावकों पर असहनीय और भारी-भरकम आर्थिक बोझ पड़ जाता. इसलिए बीच का रास्ता निकालते हुए कोर्ट ने पुराना एरियर वसूलने पर रोक लगा दी है, लेकिन अप्रैल 2027 से नए सत्र के लिए फीस बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-