सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद, अदालत की टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग पर PIL दायर

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विवाद, अदालत की टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग पर PIL दायर

प्रेषित समय :20:38:16 PM / Sun, May 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसने सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस व्यंग्यात्मक समूह ने अदालत की मौखिक टिप्पणियों का दुरुपयोग करते हुए उन्हें प्रचार, ब्रांडिंग और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया। मामले में अदालत से कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही कथित फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत कर रहे लोगों की जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई है।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता Raja Choudhary द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक समूह ने न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों को सोशल मीडिया कैंपेन, डिजिटल प्रचार और कथित व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस पूरे मामले में अदालत की गरिमा और संवैधानिक प्रक्रियाओं का मजाक उड़ाया गया।

याचिका में कहा गया है कि हाल के दिनों में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने न्यायालय से जुड़ी टिप्पणियों को प्रतीकात्मक अभियान में बदल दिया। कथित तौर पर इन टिप्पणियों का इस्तेमाल ब्रांडिंग, ट्रेडमार्क दावों और ऑनलाइन प्रचार के लिए किया गया। याचिका के अनुसार यह न्यायिक विवादों का “व्यावसायीकरण” है, जो संवैधानिक संस्थाओं की गंभीरता को प्रभावित करता है।

मामले की पृष्ठभूमि में उन टिप्पणियों का जिक्र किया गया है, जो कथित तौर पर Surya Kant द्वारा एक सुनवाई के दौरान की गई थीं। बताया गया कि कुछ बेरोजगार युवाओं, स्वयंभू एक्टिविस्टों और कथित फर्जी डिग्रीधारी कानूनी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को “कॉकरोच” और “पैरासाइट” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर “Cockroach Janta Party” नाम तेजी से वायरल हो गया।

देखते ही देखते यह व्यंग्यात्मक समूह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और लाखों फॉलोअर्स जुटाने लगा। समूह ने खुद को “आलसी और बेरोजगारों की आवाज” बताते हुए कई पोस्ट और डिजिटल कैंपेन चलाए। X और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके अकाउंट तेजी से वायरल हुए, हालांकि बाद में इनमें से कई अकाउंट और वेबसाइट्स हटा दिए गए।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि न्यायालय की मौखिक टिप्पणियों के कथित दुरुपयोग और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ लोग कथित फर्जी डिग्री के आधार पर वकालत कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर खुद को कानूनी विशेषज्ञ बताकर लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की गई है।

याचिका में विशेष रूप से Central Bureau of Investigation से जांच कराने की मांग की गई है ताकि कथित फर्जी अधिवक्ताओं और उनके नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो सोशल मीडिया पर न्यायपालिका की टिप्पणियों का गलत इस्तेमाल बढ़ सकता है और अदालतों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोगों का मानना है कि न्यायिक टिप्पणियों का व्यावसायिक और राजनीतिक उपयोग गंभीर विषय है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है, जहां यह तय होगा कि अदालत इस विवाद को किस रूप में देखती है और आगे क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-