भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मौत मामले में रविवार को एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने इस पूरे मामले की जांच को एक नई दिशा दे दी है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कड़े और ऐतिहासिक आदेश के बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान दिल्ली एम्स की एक विशेष और उच्च स्तरीय फॉरेंसिक टीम शनिवार रात ही भोपाल पहुंच गई थी. रविवार सुबह इस चार सदस्यीय वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने भोपाल एम्स के डॉक्टरों के सहयोग से मृतका ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया. करीब तीन घंटे तक चली इस बेहद जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया को पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रोटोकॉल, उन्नत चिकित्सा पद्धतियों और कड़ी वीडियोग्राफी के साए में संपन्न कराया गया. पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा और उनकी भाभी ने शव की आधिकारिक रूप से पहचान की, जिसके बाद मेडिकल बोर्ड ने अपनी त्वरित कार्रवाई शुरू की.
इस हाई-प्रोफाइल मामले में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम केवल अस्पताल परिसर तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पोस्टमार्टम की लंबी प्रक्रिया को सफलता पूर्वक पूरा करने के ठीक बाद दिल्ली एम्स की यह टीम स्थानीय पुलिस अधिकारियों और भारी सुरक्षा बल के साथ कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के उस घर पर पहुंची, जहां ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी. फॉरेंसिक टीम ने घर के भीतर जाकर उस कमरे और आसपास के पूरे हिस्से का बेहद सूक्ष्मता और बारीकी से निरीक्षण किया, जहां पूर्व मॉडल और अभिनेत्री का शव फंदे पर लटका हुआ पाया गया था. विशेषज्ञों ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य जुटाए और कमरे की बनावट, ऊंचाई तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की. माना जा रहा है कि फॉरेंसिक टीम घटनास्थल से मिले इन तमाम तकनीकी तथ्यों और सबूतों का मिलान अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से करेगी, ताकि मौत के वास्तविक कारणों और समय का सटीक आकलन किया जा सके.
दिल्ली एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने इस पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि हिस्टोपैथोलॉजी, विसरा जांच और कुछ अन्य आवश्यक लैब परीक्षण अभी बाकी हैं, जिसके कारण अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने में थोड़ा समय लगेगा. मेडिकल टीम सोमवार को जांच से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सैंपल, तस्वीरें, वीडियोग्राफी के फुटेज और अपने प्रारंभिक लिखित निष्कर्षों के साथ दिल्ली के लिए रवाना होगी. जांच से जुड़े सभी संवेदनशील सैंपल और विसरा को फिलहाल भोपाल एम्स की अत्याधुनिक विंग में पूरी तरह से सुरक्षित और सीलबंद कर के रखा गया है. यह पूरी मेडिकल टीम अपनी अंतिम और विस्तृत रिपोर्ट को पूरी तरह से गोपनीय रखते हुए एक सीलबंद लिफाफे में सीधे अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसे इस मामले की कानूनी लड़ाई में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है.
दूसरी तरफ इस पूरी कानूनी और चिकित्सीय प्रक्रिया के संपन्न होने के बाद रविवार की शाम भोपाल का माहौल बेहद गमगीन और भावुक हो गया. संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पूरे 12 दिनों बाद आखिरकार मृतका ट्विशा शर्मा का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंपा गया. शव वाहन से पार्थिव शरीर को भोपाल एम्स से सीधे भदभदा विश्राम घाट ले जाया गया, जहां अंतिम विदाई की तैयारियां पहले से ही पूरी कर ली गई थीं. जैसे ही ट्विशा की अंतिम यात्रा निकालने के लिए अर्थी को सजाया जाने लगा, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. अपनी लाडली बेटी के शव को देखकर मां रेखा शर्मा पूरी तरह से बेसुध हो गईं और उनका रो-रोकर बुरा हाल था, जिन्हें परिवार की अन्य महिलाओं ने बमुश्किल संभाला.
शाम को ठीक 5 बजे भदभदा श्मशान घाट पर पूरे हिंदू रीति-रिवाजों और धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच ट्विशा शर्मा का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया, जहां उनके भाई मेजर हर्षित शर्मा ने नम आंखों से अपनी बहन को मुखाग्नि दी. इस बेहद दुखद और भावुक क्षण के दौरान ट्विशा के पिता नवनीधि शर्मा अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और उन्होंने अपनी बेटी को याद करते हुए कहा कि वह उनके लिए सिर्फ एक बेटी नहीं थी, बल्कि एक मां की तरह पूरे परिवार का ख्याल रखती थी और हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी रहती थी. इस अंतिम विदाई के मौके पर न केवल शर्मा परिवार के करीबी रिश्तेदार, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता, प्रशासनिक अधिकारी और पूर्व सैन्य अधिकारी भी भदभदा विश्राम घाट पहुंचे और उन्होंने ट्विशा शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया.
उल्लेखनीय है कि पूर्व मॉडल और अभिनेत्री रहीं 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा बीते 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे पर लटकी हुई पाई गई थीं, जिसके बाद से ही भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश और विवाद की स्थिति बनी हुई है. इस घटना के बाद से ही मृतका के मायके पक्ष और ससुराल पक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों का एक लंबा दौर चल रहा है. जहां एक तरफ मायके पक्ष के लोग ससुराल वालों पर गंभीर रूप से दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और हत्या करने जैसी संगीन धाराओं के तहत आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष और ससुराल वालों ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया था कि ट्विशा लंबे समय से नशे की लत और गहरे मानसिक तनाव से पीड़ित थीं, जिसके कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया.
स्थानीय पुलिस द्वारा शुरुआती दौर में की गई जांच और पहले पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर ट्विशा के परिजनों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर त्वरित सुनवाई करते हुए अदालत ने 22 मई को दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में दोबारा पोस्टमार्टम कराने का ऐतिहासिक निर्देश जारी किया था. परिजनों ने इस मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से कराने की पुरजोर मांग भी उठाई है, जिस पर आने वाले दिनों में देश की सर्वोच्च अदालत की विशेष पीठ द्वारा सुनवाई की जानी तय है. इस दूसरे पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक टीम के घटनास्थल के दौरे के बाद अब पूरे प्रदेश की नजरें मेडिकल बोर्ड की आने वाली सीलबंद रिपोर्ट और अदालत के अगले कड़े रुख पर टिकी हुई हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

