जबलपुर. एमपी के जबलपुर में संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ अजय मौर्य ने सबसे पहले फर्जी डिग्री 10 लाख रुपए में खरीदी थी. इस डिग्री की मदद से ही उसने जबलपुर में शासकीय संजीवनी क्लिनिक में पदस्थ होकर मरीजों का इलाज शुरु कर दिया.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार एमबीबीएस की फर्जी डिग्री बेचने वाले मास्टर माइंड को पुलिस ने भोपाल से गिरफ्तार किया. जिससे पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए है. उक्त डिग्रियां ग्वालियर में बनती, रैकेट के सक्रिय सदस्यों द्वारा 8 से 10 लाख रुपए में बेची जाती थी. पहली डिग्री मुरैना के अजय मौर्य को बेची गई थी, जिसकी मदद से अजय मौर्य जबलपुर के संजीवनी क्लीनिक में पदस्थ होकर मरीजों का इलाज कर रहा था. गौरतलब है कि तीन फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद कोतवाली पुलिस ने भोपाल और ग्वालियर में दबिश दी, जिसमें भोपाल से एक अहम आरोपी को पकड़ा है. यही युवक फर्जी डिग्री तैयार कराने और नौकरी दिलाने के पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था.
डिग्री उपलब्ध कराने का काम ग्वालियर का एक एमबीबीएस डॉक्टर करता था. जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है. अब तक इस मामले में आरोपियों की संख्या छह हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि अभी तक की जांच में सामने आया है कि ग्वालियर के एक डॉक्टर ने भोपाल निवासी संदीप के साथ मिलकर फर्जी अंकसूची और एमबीबीएस डिग्री बनाने का नेटवर्क खड़ा किया था. सबसे पहले मुरैना निवासी अजय मौर्य को फर्जी डिग्री बेची गई. अजय मौर्य इस फर्जी डिग्री की मदद से जबलपुर के संजीवनी क्लीनिक में करीब दो साल से कार्यरत रहा. गौरतलब है कि सबसे पहले दमोह में पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए दो फर्जी डाक्टरों को पकड़ा, इसके बाद परत दर परत मामला खुलता चला गया.
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