सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर मचे हंगामे के बाद सरकार सख्त, आईआईटी और PSU बैंकों को संभालनी पड़ी कमान

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर मचे हंगामे के बाद सरकार सख्त, आईआईटी और PSU बैंकों को संभालनी पड़ी कमान

प्रेषित समय :19:57:19 PM / Sun, May 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। Central Board of Secondary Education के पोस्ट रिजल्ट सर्विस पोर्टल पर लगातार सामने आ रही तकनीकी गड़बड़ियों और छात्रों की शिकायतों के बाद केंद्र सरकार को बड़ा हस्तक्षेप करना पड़ा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने रविवार को Indian Institute of Technology Madras और Indian Institute of Technology Kanpur के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की टीमों को भी सीबीएसई की मदद के लिए लगाने के निर्देश दिए। छात्रों द्वारा री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर पेमेंट फेल होने, वेबसाइट क्रैश होने, गलत फीस कटने और स्कैन कॉपियां नहीं मिलने जैसी शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार State Bank of India, Bank of Baroda, Canara Bank और Indian Bank को सीबीएसई के साथ जोड़ा गया है ताकि भुगतान प्रणाली को मजबूत बनाया जा सके और छात्रों को रिफंड तथा ट्रांजेक्शन से जुड़ी समस्याओं से राहत मिल सके। मंत्रालय ने कहा कि इन बैंकों की मदद से समय पर भुगतान, अतिरिक्त फीस का ऑटोमैटिक रिफंड और पेमेंट गेटवे की स्थिरता सुनिश्चित की जाएगी।

दरअसल इस वर्ष सीबीएसई ने पहली बार बड़े स्तर पर ऑन स्क्रीन मार्किंग यानी OSM सिस्टम लागू किया, जिसके तहत लगभग 98.66 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने आरोप लगाया कि इस नई प्रणाली के कारण उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं। कई छात्रों ने कहा कि गलत मूल्यांकन के चलते उनके विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश, स्कॉलरशिप और इंजीनियरिंग काउंसलिंग के अवसर खतरे में पड़ गए हैं।

कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक आयोजित की गई थीं और परिणाम 13 मई को घोषित किए गए। इस बार बोर्ड का कुल पास प्रतिशत घटकर 85.20 प्रतिशत रह गया, जो पिछले वर्ष 88.39 प्रतिशत था। यह 2019 के बाद सबसे कम परिणाम माना जा रहा है। परिणामों के बाद री-इवैल्यूएशन और स्कैन कॉपी के लिए छात्रों की भारी भीड़ पोर्टल पर उमड़ी, लेकिन वेबसाइट लगातार तकनीकी समस्याओं से जूझती रही।

झारखंड के बोकारो निवासी छात्र सर्वज्ञ सिंह ने दावा किया कि उन्होंने 89.7 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि उन्हें कम से कम 93 प्रतिशत की उम्मीद थी। गणित में केवल 71 प्रतिशत अंक मिलने से उनका University of Hong Kong में प्रवेश और 80 प्रतिशत स्कॉलरशिप खतरे में पड़ गई। छात्र ने कहा कि उन्होंने पांच उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए 500 रुपये जमा किए, लेकिन उन्हें कॉपियां समय पर नहीं मिलीं। उन्होंने री-इवैल्यूएशन पोर्टल को “अब तक का सबसे अस्थिर वेब एप्लिकेशन” बताया।

उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी देवेश अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने 94 प्रतिशत की उम्मीद की थी लेकिन केवल 85 प्रतिशत अंक मिले। छात्र के अनुसार उन्हें जो स्कैन कॉपियां मिलीं वे धुंधली थीं और कई पन्ने स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। उन्होंने दावा किया कि चार उत्तर पुस्तिकाओं में 15 से अधिक त्रुटियां मिली हैं। इसी तरह रांची के सार्थक सिद्धांत ने बताया कि 75 प्रतिशत पात्रता सीमा से नीचे अंक आने के कारण उनकी JoSAA काउंसलिंग प्रभावित हो सकती है।

कई छात्रों ने आरोप लगाया कि पोर्टल पर कभी 69 रुपये तो कभी 69,420 रुपये जैसी असामान्य फीस दिखाई जा रही थी। कुछ छात्रों ने बताया कि पेमेंट होने के बाद भी घंटों तक आवेदन सफल नहीं दिखा। कई छात्र रातभर जागकर या सुबह चार-पांच बजे वेबसाइट खोलने की कोशिश करते रहे ताकि कम ट्रैफिक के दौरान आवेदन कर सकें। दिल्ली की एक छात्रा ने बताया कि उन्होंने छह उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी के लिए भुगतान किया लेकिन कई दिनों तक कोई कॉपी प्राप्त नहीं हुई। छात्रा ने कहा कि वह सीयूईटी परीक्षा की तैयारी करने के बजाय हर दो घंटे में पोर्टल चेक करने को मजबूर थी।

इस बीच निजी स्कूलों के प्राचार्यों ने भी OSM प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दिल्ली के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि शिक्षकों को नई प्रणाली का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया और जल्दी-जल्दी मूल्यांकन कराने के दबाव में कई सही उत्तरों को अंक नहीं मिले। उनका कहना है कि स्कैनिंग में देरी और तकनीकी समस्याओं ने पूरे मूल्यांकन सिस्टम को अव्यवस्थित कर दिया।

लगातार बढ़ते विवाद के बाद सीबीएसई ने स्कैन कॉपी शुल्क 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये, सत्यापन शुल्क 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये और प्रति प्रश्न री-इवैल्यूएशन शुल्क 100 रुपये से घटाकर 25 रुपये कर दिया। बोर्ड ने यह भी घोषणा की कि यदि री-इवैल्यूएशन के बाद अंक बढ़ते हैं तो फीस वापस की जाएगी। इसके बावजूद छात्रों का गुस्सा कम नहीं हुआ और सोशल मीडिया पर #CBSEFail, #OSMSystem और #ReevaluationCrisis जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे।

23 मई को सीबीएसई ने आधिकारिक बयान जारी कर स्वीकार किया कि छात्रों को पोर्टल एक्सेस, भुगतान पुष्टि, धुंधली स्कैन कॉपी और अनचेक उत्तरों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। 24 मई को बोर्ड ने माना कि 21 और 22 मई को तकनीकी दिक्कतों के कारण कई छात्रों से गलत फीस कट गई थी। बोर्ड ने आश्वासन दिया कि अतिरिक्त राशि स्वतः वापस कर दी जाएगी और जिन छात्रों की फीस कम कटी है उन्हें अलग से सूचित किया जाएगा।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष री-इवैल्यूएशन के लिए 2.94 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 8.56 लाख उत्तर पुस्तिकाएं शामिल हैं। पिछले वर्ष यह संख्या केवल 1.31 लाख आवेदन और 2.82 लाख उत्तर पुस्तिकाओं तक सीमित थी। लगातार बढ़ते दबाव के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट कहा है कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और सीबीएसई को पारदर्शी, तेज और छात्र हितैषी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आईआईटी विशेषज्ञों और PSU बैंकों की मदद से सीबीएसई इस बड़े तकनीकी संकट से कितनी जल्दी बाहर निकल पाता है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-