हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद जबलपुर में सरकारी जमीन कब्जों पर मचा बवाल सोशल मीडिया पर भू-माफियाओं के खिलाफ फूटा गुस्सा

हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद जबलपुर में सरकारी जमीन कब्जों पर मचा बवाल सोशल मीडिया पर भू-माफियाओं के खिलाफ फूटा गुस्सा

प्रेषित समय :20:22:27 PM / Sun, May 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. गोलबाजार स्थित सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में Madhya Pradesh High Court द्वारा कलेक्टर और निगमायुक्त को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद शहर में सरकारी जमीन कब्जों को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है. अदालत के आदेश के सार्वजनिक होते ही Facebook, X, Instagram और स्थानीय डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा. आम नागरिकों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रशासनिक तंत्र और भू-माफियाओं की कथित मिलीभगत पर सवाल उठाते हुए बड़े कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है.

शहर के विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुप्स और लोकल कम्युनिटी पेजों पर लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों द्वारा सरकारी जमीनों पर वर्षों से अवैध कब्जे किए जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने से बचता रहा है. वहीं गरीब रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों पर तुरंत कार्रवाई कर दी जाती है. लोगों ने इसे दोहरी नीति बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो और तस्वीरें भी वायरल होने लगीं, जिनमें शहर के विभिन्न इलाकों में सरकारी जमीन, पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर कथित अवैध निर्माण दिखाई दे रहे हैं. कुछ नागरिकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि वर्षों से सरकारी भूमि पर कब्जे बने हुए हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने कभी सख्त कदम नहीं उठाए. Facebook और X पर “सरकारी जमीन बचाओ” और “भू-माफिया हटाओ” जैसे हैशटैग के साथ पोस्ट लगातार वायरल हो रहे हैं.

उधर प्रशासनिक हलकों में भी हाई कोर्ट के आदेश के बाद हलचल तेज हो गई है. नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों ने शहर में सरकारी भूमि का सर्वे शुरू करने की तैयारी कर ली है. सूत्रों के मुताबिक कई संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार की जा रही है, जहां लंबे समय से अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं. अधिकारियों का कहना है कि अदालत के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन किया जाएगा और सरकारी जमीनों को मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जाएगा.

हालांकि सोशल मीडिया पर लोग केवल औपचारिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं. बड़ी संख्या में नागरिकों का कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे और अस्थायी अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन प्रभावशाली लोगों पर भी होनी चाहिए जिन्होंने करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर स्थायी निर्माण कर लिए हैं. कई यूजर्स ने प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि इस बार भी केवल दिखावटी कदम उठाए गए तो जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट के इस आदेश ने आम जनता को अपनी आवाज बुलंद करने का एक बड़ा मंच दे दिया है. सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अदालत के निर्देशों के बाद प्रशासन सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने के अभियान को कितनी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ाता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-