कोर्ट से जेल तक आरोपी को मिली वीआईपी एंट्री, प्राइवेट लग्जरी कार में ले जाने का वीडियो वायरल, पुलिस जवानों से मांगा जवाब

कोर्ट से जेल तक आरोपी को मिली वीआईपी एंट्री, प्राइवेट लग्जरी कार में ले जाने का वीडियो वायरल, पुलिस जवानों से मांगा जवाब

प्रेषित समय :21:18:33 PM / Mon, May 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर। शाहपुरा क्षेत्र से सामने आए एक वायरल वीडियो ने पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायालय में पेशी के बाद एक विचाराधीन आरोपी को जेल ले जाने के दौरान उसे कथित तौर पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में आरोपी को पुलिस सुरक्षा के बीच सरकारी वाहन की बजाय एक लग्जरी प्राइवेट कार में बैठाकर जेल ले जाते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और संबंधित जवानों से जवाब तलब किया गया है।

जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब 11 बजे कोर्ट परिसर से वाहनों का एक काफिला निकला। शुरुआत में लोगों को लगा कि किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी या रसूखदार नेता की आवाजाही हो रही है, लेकिन कुछ ही देर बाद स्पष्ट हुआ कि काफिले की आगे चल रही कार में कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक गंभीर आपराधिक मामले का आरोपी बैठा हुआ था। आरोपी को पुलिस जवानों की मौजूदगी में प्राइवेट वातानुकूलित कार से सीधे जेल ले जाया गया।

इस घटनाक्रम को किसी व्यक्ति ने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया और लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। आम तौर पर किसी भी आरोपी या विचाराधीन कैदी को कोर्ट से जेल ले जाने के लिए पुलिस की कैदी वैन या वज्र वाहन का उपयोग किया जाता है। सुरक्षा मानकों के तहत निजी वाहनों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होती, लेकिन इस मामले में नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि आरोपी पूरी सुविधा और आराम के साथ कार में बैठा हुआ है, जबकि पुलिस जवान उसकी सुरक्षा में तैनात हैं। यही कारण है कि अब यह मामला सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे प्रभाव और रसूख के इस्तेमाल से जोड़कर भी देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आम आरोपी को ऐसी सुविधा नहीं मिलती तो फिर इस व्यक्ति को विशेष व्यवस्था क्यों दी गई।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आरोपी को निजी वाहन से जेल ले जाना गंभीर सुरक्षा चूक मानी जाती है। कोर्ट से जेल के रास्ते में आरोपी के फरार होने, हमला होने या अन्य किसी अप्रिय घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है। ऐसे में तय पुलिस प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य होता है। निजी वाहन के उपयोग से न केवल सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया। प्रारंभिक जांच में उन पुलिस जवानों और सुरक्षाकर्मियों की पहचान कर ली गई है जो आरोपी को कोर्ट लेकर आए थे और फिर उसे प्राइवेट कार में जेल लेकर गए। विभागीय अधिकारियों ने संबंधित जवानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि आखिर किसके निर्देश पर आरोपी को इस प्रकार की सुविधा दी गई।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के सामने सभी समान हैं और किसी भी आरोपी को विशेष सुविधा देना स्वीकार्य नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक विचाराधीन आरोपी को ऐसा व्यवहार क्यों दिया गया जो आमतौर पर किसी बड़े वीआईपी के लिए देखा जाता है। कई लोगों ने इसे पुलिस व्यवस्था की निष्पक्षता पर धब्बा बताया है।

मामले को लेकर पुलिस महकमे के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो इससे पुलिस की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। फिलहाल विभाग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-