जबलपुर। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से फैली बीमारी की घटना के बाद भी जबलपुर में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। शहर के कांचघर स्थित बीमा अस्पताल के पीछे बनी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में करीब पांच हजार घरों को जिस भूमिगत टैंक से पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसकी हालत अब स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गई है। करीब 50 साल पुराना यह टैंक खुले हाल में पड़ा हुआ है और उसके आसपास फैली गंदगी तथा झाड़ियों के कारण संक्रमण और महामारी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जलापूर्ति के लिए उपयोग में लाया जा रहा भूमिगत टैंक दिन-रात खुला रहता है। टैंक के आसपास न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है और न ही साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि किसी भी समय कोई जानवर जैसे कुत्ता, बिल्ली या अन्य जीव टैंक में गिर सकता है, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो सकता है। ऐसे में पूरे क्षेत्र में गंभीर बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है।
सोमवार को जब टैंक की स्थिति का जायजा लिया गया तो पता चला कि अब भी इस क्षेत्र की जलापूर्ति टैंकरों पर निर्भर है। नगर निगम के टैंकर खुले टैंक में पाइप के जरिए पानी भरते हैं। जिस स्थान से पानी भरा जाता है, वहां सुरक्षा के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। पानी भरने के बाद भी टैंक को ठीक तरीके से बंद नहीं किया जाता। वहीं दूसरी ओर जिस हिस्से से मोटर पंप के जरिए पाइपलाइन द्वारा कॉलोनी के घरों तक पानी पहुंचाया जाता है, वहां भी सुरक्षा मानकों का अभाव साफ दिखाई देता है।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार भूमिगत टैंक होने के कारण इसकी नियमित सफाई भी नहीं हो पाती। कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग ने स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नागरिकों ने बताया कि चार साल पहले इसी टैंक में एक बिल्ली गिर गई थी, जिससे पूरा पानी दूषित हो गया था और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद सुरक्षा और सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया।
लोगों का कहना है कि वर्तमान में भी कई घरों में गंदा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है। मजबूरी में लोग उसी पानी का उपयोग कर रहे हैं। कई परिवार बिना पानी उबाले या फिल्टर किए सीधे उपयोग कर रहे हैं, जिससे पेट संबंधी बीमारियों, संक्रमण और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं का खतरा लगातार बना हुआ है। भीषण गर्मी के बीच जलजनित बीमारियों की आशंका ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि इंदौर जैसी घटना के बाद प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए थी, लेकिन यहां स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है। क्षेत्र के नागरिकों ने मांग की है कि पुराने टैंक को तत्काल सुरक्षित तरीके से ढका जाए, नियमित सफाई कराई जाए और जल गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जाए ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
इस मामले में नगर निगम के कार्यपालन यंत्री कमलेश श्रीवास्तव ने बताया कि ‘अमृत योजना 2.0’ के तहत क्षेत्र में नई पानी की टंकी स्वीकृत हो चुकी है और उसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। उनका कहना है कि नई टंकी तैयार होने के बाद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा और नागरिकों को बेहतर एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि नई टंकी बनने में अभी समय लगेगा और तब तक हजारों लोगों की जिंदगी जोखिम में बनी रहेगी।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-




