भीषण गर्मी के बीच हिमाचल में जंगलों की आग ने बढ़ाई चिंता, 232 घटनाओं से 3000 हेक्टेयर वन प्रभावित

भीषण गर्मी के बीच हिमाचल में जंगलों की आग ने बढ़ाई चिंता, 232 घटनाओं से 3000 हेक्टेयर वन प्रभावित

प्रेषित समय :20:44:23 PM / Wed, May 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

शिमला.भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच Himachal Pradesh में जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है. हालांकि राज्य सरकार और वन विभाग का दावा है कि हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं, लेकिन मौजूदा फायर सीजन में अब तक 232 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लगभग 3000 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है. वन विभाग के अनुसार अब तक करीब 67 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स Sanjay Sood ने बुधवार को  शिमला   में मीडिया से बातचीत के दौरान स्थिति की जानकारी दी.

संजय सूद ने बताया कि पिछले दो से तीन दिनों में राज्य के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ा है. ऊना में तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि शिमला जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भी सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कुछ वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन वन विभाग पूरी तरह सतर्क है और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में अब तक लगभग 232 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें छोटी जमीनी आग से लेकर बड़े स्तर की भीषण आग शामिल है. सबसे ज्यादा प्रभावित जिला मंडी रहा है, जहां करीब 85 घटनाएं सामने आई हैं. इसके बाद धर्मशाला क्षेत्र में 56 घटनाएं दर्ज की गईं. राजधानी शिमला में करीब 10 और सोलन में छह बड़ी आग की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं. विभाग का कहना है कि आग से प्रभावित वन क्षेत्र लगभग 2900 से 3000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है.

सोलन जिले में एयरफोर्स स्टेशन के नजदीक लगी भीषण आग को इस सीजन की सबसे गंभीर घटनाओं में माना जा रहा है. वन विभाग के अनुसार आग तेजी से आसपास के गांवों की ओर फैलने लगी थी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय वायुसेना, स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंचीं. आग पर काबू पाने में करीब 15 घंटे का समय लगा. संजय सूद ने बताया कि एयरफोर्स स्टेशन के पास आग पहुंचने के कारण हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई. हालांकि समय रहते स्थिति नियंत्रित कर ली गई और किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली.

वन विभाग का कहना है कि इस बार मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से ही आशंका थी कि जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने पहले ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी थीं. राज्यभर के लगभग 2000 संवेदनशील वन क्षेत्रों में विशेष अग्निशमन कर्मियों और फील्ड स्टाफ की तैनाती की गई है. इसके अलावा सर्किल स्तर पर रैपिड रिस्पॉन्स टीमें भी गठित की गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.

वन विभाग ने आग पर नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है. संजय सूद ने बताया कि अत्यधिक संवेदनशील इलाकों में 10 से 12 ड्रोन तैनात किए गए हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी. विभाग ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है. उन्होंने कहा कि जैसे ही कहीं आग लगने की सूचना मिलती है, संबंधित अधिकारियों तक कुछ ही सेकंड में अलर्ट पहुंच जाता है, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हुआ है.

राज्य में जंगलों में आग फैलने से रोकने के लिए लगभग 3000 किलोमीटर लंबी फायर लाइनें बनाई और उनका रखरखाव किया गया है. इसके अलावा करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नियंत्रित दहन यानी कंट्रोल्ड बर्निंग भी की गई है ताकि सूखी घास और पत्तियों के कारण आग तेजी से न फैल सके. विभाग का दावा है कि इन उपायों के कारण कई बड़े हादसों को टाला जा सका है.

वन विभाग ने इस वर्ष आग से निपटने की तैयारियों और नियंत्रण कार्यों पर लगभग 15 से 16 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. संजय सूद ने बताया कि केंद्र सरकार की फॉरेस्ट फायर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट योजना के तहत हिमाचल प्रदेश को इस वर्ष करीब 8 करोड़ रुपये मिले हैं. यह राशि मंडी, बिलासपुर और अन्य संवेदनशील जिलों में उपयोग की जा रही है. राज्य सरकार ने केंद्र से मांग की है कि इस योजना का दायरा और जिलों तक बढ़ाया जाए क्योंकि कई अन्य क्षेत्र भी आग की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. इसके अलावा फ्रांस समर्थित एक बाहरी सहायता प्राप्त परियोजना के तहत राज्य को करीब 9 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मदद भी मिली है.

वन विभाग के अनुसार आग पर नियंत्रण में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी अहम भूमिका निभा रही है. विभाग ने एक लाख से अधिक लोगों को मोबाइल कम्युनिकेशन सिस्टम से जोड़ा है. जैसे ही कहीं आग लगती है, आसपास के लोगों को तुरंत सूचना भेजी जाती है. युवा मंडल, महिला मंडल और स्थानीय समुदाय सक्रिय रूप से आग बुझाने के प्रयासों में शामिल हो रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि पहले सूचना मिलने में देरी होती थी, लेकिन अब ऐप आधारित अलर्ट सिस्टम और स्थानीय सहयोग के कारण टीमें तेजी से घटनास्थल तक पहुंच रही हैं.

फायर सीजन को देखते हुए कई संवेदनशील जिलों जैसे बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना में वन विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियों पर भी रोक लगा दी गई है. विभाग का कहना है कि मानसून के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन किया जाएगा क्योंकि कई वन क्षेत्र प्राकृतिक रूप से फिर से विकसित हो जाते हैं. साथ ही कुछ मामलों में जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका को लेकर भी जांच की जा रही है.

संजय सूद ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जंगलों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने नागरिकों से जंगलों में आग रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय सहयोग की अपील की.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-