झारखंड में चैरिटेबल संस्थाओं के लिए जमीन आवंटन के नियम सख्त, तीन साल पुराना रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य

झारखंड में चैरिटेबल संस्थाओं के लिए जमीन आवंटन के नियम सख्त, तीन साल पुराना रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य

प्रेषित समय :20:30:24 PM / Thu, May 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

झारखंड सरकार ने गैर-लाभकारी और चैरिटेबल संस्थानों को रियायती दर पर सरकारी जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए नियमों को और सख्त कर दिया है. अब राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी जमीन लेने की इच्छुक किसी भी संस्था, ट्रस्ट या सोसाइटी के लिए कम से कम तीन साल पुराना रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य होगा. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जमीन आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और केवल गंभीर तथा अनुभवी संस्थाओं को ही इसका लाभ देना है.

इस संबंध में झारखंड सरकार के राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. यह संशोधन राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू किया गया है. विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक नया नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है.

नई अधिसूचना के अनुसार अब कोई भी संस्था, सोसाइटी या ट्रस्ट तभी आवेदन कर सकेगा, जब उसका पंजीकरण आवेदन की तिथि से कम से कम तीन वर्ष पूर्व हुआ हो. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजीकरण निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत होना चाहिए. इसमें इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1882, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 और कंपनी एक्ट 2013 के तहत पंजीकृत संस्थाएं शामिल होंगी.

इसके अलावा वे संस्थान भी पात्र माने जाएंगे, जो कंपनी एक्ट 1956 की धारा 25 या चैरिटेबल एंड रिलिजियस ट्रस्ट एक्ट 1920 के तहत आवेदन से कम से कम तीन साल पहले से पंजीकृत हों. सरकार ने साफ किया है कि केवल कागजी संस्थाओं या हाल ही में बने संगठनों को अब रियायती दर पर सरकारी जमीन का लाभ नहीं मिलेगा.

सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में चैरिटेबल संस्थानों और उनके उद्देश्यों की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है. अब “चैरिटेबल उद्देश्य” की परिभाषा आयकर अधिनियम 1961 की धारा 2(15) के अनुरूप तय की जाएगी. इसका अर्थ है कि केवल वही संस्थाएं पात्र होंगी, जो वास्तव में शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत, सामाजिक कल्याण या सार्वजनिक हित से जुड़े कार्यों में सक्रिय होंगी.

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी जमीन आवंटन प्रक्रिया में कई प्रकार की अनियमितताओं और विवादों की शिकायतें सामने आई थीं. कई ऐसी संस्थाओं ने भी जमीन हासिल करने का प्रयास किया, जिनका वास्तविक सामाजिक कार्यों से कोई संबंध नहीं था. ऐसे मामलों को रोकने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह संशोधन किया गया है.

विभाग के संयुक्त सचिव कमलाकांत गुप्ता के हस्ताक्षर से जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 24 नवंबर 2023 को जारी मूल अधिसूचना और मार्च 2024 में जारी शुद्धिपत्र के अन्य सभी प्रावधान पहले की तरह प्रभावी बने रहेंगे. केवल पात्रता संबंधी कुछ नियमों में संशोधन किया गया है.

सरकार के इस फैसले को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इससे फर्जी और कागजी संस्थाओं पर रोक लगेगी तथा सरकारी जमीन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा. वहीं कुछ छोटे और नए संगठनों को आशंका है कि तीन साल की अनिवार्य अवधि के कारण उन्हें सामाजिक परियोजनाओं के लिए जमीन प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी जमीन का आवंटन हमेशा संवेदनशील विषय रहा है, क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग होता है. ऐसे में सरकार द्वारा अनुभव और विश्वसनीयता को प्राथमिकता देना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जमीन वास्तव में शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित के कार्यों के लिए उपयोग हो.

फिलहाल नया नियम लागू होने के बाद अब राज्य में सरकारी जमीन के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं को अपने पंजीकरण, सामाजिक कार्यों और कानूनी पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की अधिक सख्ती से जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे जमीन आवंटन प्रणाली अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-