भोपाल. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) 2023-24 की रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य संबंधी चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है. रिपोर्ट के अनुसार राज्य में डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापा तथा तंबाकू और शराब के सेवन के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. सर्वेक्षण से पता चला है कि प्रदेश में लगभग हर पांचवां पुरुष शराब का सेवन करता है, जबकि डायबिटीज और मोटापे के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के 18.5 प्रतिशत पुरुष शराब का सेवन करते हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा 1.2 प्रतिशत है. वहीं तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या भी चिंताजनक बनी हुई है. राज्य में 47.7 प्रतिशत पुरुष और 11.6 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का उपयोग करती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.
डायबिटीज के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश की 14.5 प्रतिशत महिलाएं और 18.3 प्रतिशत पुरुष मधुमेह से प्रभावित हैं. वर्ष 2019 में यह आंकड़ा महिलाओं में 9.8 प्रतिशत और पुरुषों में 12.2 प्रतिशत था. यानी चार वर्षों में डायबिटीज के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की आदतों से जोड़कर देख रहे हैं.
मोटापा भी प्रदेश में तेजी से बढ़ती समस्या बनकर उभरा है. रिपोर्ट के अनुसार 22.2 प्रतिशत महिलाएं और 17.6 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में आ चुके हैं. वर्ष 2019 में महिलाओं में यह आंकड़ा 16.6 प्रतिशत और पुरुषों में 15.6 प्रतिशत था. महिलाओं में मोटापे की वृद्धि दर विशेष रूप से अधिक दर्ज की गई है.
सर्वेक्षण में जनसंख्या संरचना में भी बदलाव देखने को मिला है. प्रदेश में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की आबादी बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि 2019 में यह 10.9 प्रतिशत थी. वहीं पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों का प्रतिशत 8.2 से बढ़कर 8.4 प्रतिशत हो गया है.
इंटरनेट उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2019 में जहां 55.7 प्रतिशत पुरुष और 26.9 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती थीं, वहीं अब यह आंकड़ा क्रमशः 77.3 प्रतिशत और 62 प्रतिशत तक पहुंच गया है. डिजिटल पहुंच में आई यह वृद्धि राज्य में तकनीकी जागरूकता बढ़ने का संकेत मानी जा रही है.
सामाजिक संकेतकों में कुछ सकारात्मक बदलाव भी सामने आए हैं. 18 वर्ष की आयु से पहले विवाह करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 23.1 से घटकर 20 प्रतिशत हो गया है. वहीं 21 वर्ष की आयु से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का प्रतिशत 30.1 से घटकर 25 प्रतिशत पर आ गया है.
रिपोर्ट के अनुसार संस्थागत प्रसव में मामूली गिरावट दर्ज की गई है. यह आंकड़ा 90.7 प्रतिशत से घटकर 89.8 प्रतिशत रह गया है. हालांकि सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में वृद्धि हुई है. निजी स्वास्थ्य संस्थानों में सिजेरियन प्रसव का प्रतिशत 52 से बढ़कर 62 प्रतिशत और सरकारी अस्पतालों में 8.2 प्रतिशत से बढ़कर 10.4 प्रतिशत हो गया है.
बच्चों के टीकाकरण की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है. 12 से 23 माह आयु वर्ग के 81.5 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ है, जबकि पिछली रिपोर्ट में यह आंकड़ा 77.4 प्रतिशत था. महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े संकेतकों में भी सकारात्मक प्रगति देखी गई है. घरेलू निर्णयों में भागीदारी करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 86 से बढ़कर 90.4 प्रतिशत हो गया है. वहीं स्वयं के मोबाइल फोन का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या 38.5 प्रतिशत से बढ़कर 48.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ और सुरक्षित साधनों का उपयोग करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 61 से बढ़कर 65 हो गया है. इसके अलावा पति या जीवनसाथी द्वारा हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 28 से घटकर 21 प्रतिशत रह गया है, जिसे सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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