बाघ की मौत की हाईटेक जांच में जुटीं भोपाल-बरेली की भी लैब, शरीर पर मिले चोट के निशानों से गहराई गुत्थी

बाघ की मौत की हाईटेक जांच में जुटीं भोपाल-बरेली की भी लैब, शरीर पर मिले चोट के निशानों से गहराई गुत्थी

प्रेषित समय :19:13:39 PM / Wed, May 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. बाघ की मौत की असली वजह जानने के लिए अब जबलपुर, भोपाल और बरेली की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं सक्रिय हो गई हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए बाघ के शव से लिए गए करीब 15 महत्वपूर्ण सैंपलों की जांच अलग-अलग विशेषज्ञ लैब में कराई जा रही है. प्रारंभिक पोस्टमार्टम में बाघ के पेट और पूंछ के पास चोट के निशान मिलने से मामला और अधिक रहस्यमय हो गया है, वहीं लू और डिहाइड्रेशन जैसे संकेत भी सामने आए हैं. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा.

जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ का शव मिलने के बाद वन विभाग ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के स्कूल आफ वाइल्ड लाइफ फोरेंसिक भेजा. यहां विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम ने अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक पद्धति से पोस्टमार्टम किया. जांच के दौरान बाघ के शरीर के विभिन्न हिस्सों से करीब 15 सैंपल एकत्रित किए गए, जिनमें रक्त, लीवर, किडनी, फेफड़े, आंत, त्वचा और अन्य ऊतकों के नमूने शामिल हैं.

पोस्टमार्टम के दौरान विशेषज्ञों ने बाघ के पेट और पूंछ के आसपास चोट के निशान पाए हैं. इन चोटों को लेकर फिलहाल कई संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि चोटें किसी अन्य वन्यजीव के साथ संघर्ष में लगीं, किसी दुर्घटना का परिणाम हैं या फिर मौत के बाद की परिस्थितियों से जुड़ी हैं. यही कारण है कि प्रत्येक पहलू की गहन वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है.

बाघ के सैंपलों को भोपाल स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रयोगशाला और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान की विशेष लैब में भेजा गया है. इन संस्थानों में विष विज्ञान, ऊतक विज्ञान और रोग परीक्षण से जुड़े अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से मौत की वास्तविक वजह तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी. जांच में यह भी देखा जाएगा कि बाघ किसी संक्रमण, वायरस, बैक्टीरिया या अन्य बीमारी से पीड़ित तो नहीं था.

सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक परीक्षण में बाघ के शरीर में डिहाइड्रेशन और अत्यधिक गर्मी से प्रभावित होने जैसे संकेत मिले हैं. मध्यप्रदेश सहित पूरे क्षेत्र में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और जंगलों में कई जल स्रोत सूखने लगे हैं. ऐसे में वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में लू या पानी की कमी के कारण मौत की पुष्टि होती है तो यह वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी होगी.

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में बाघ जैसे बड़े वन्यजीवों को पर्याप्त पानी और सुरक्षित क्षेत्र की आवश्यकता होती है. यदि जंगलों में जल स्रोत कम हो जाते हैं तो वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति भी बन सकती है. कई बार पानी की तलाश में बाघ अपने क्षेत्र से बाहर निकल आते हैं, जिससे तनाव और शारीरिक कमजोरी बढ़ जाती है. ऐसे हालात में संक्रमण या अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने पूरी जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से संचालित करने का निर्णय लिया है. हिस्टोपैथोलॉजी और टॉक्सिकोलॉजी परीक्षण के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि बाघ के शरीर के अंगों और ऊतकों में किसी विषैले तत्व, रासायनिक पदार्थ या असामान्य जैविक परिवर्तन के संकेत तो मौजूद नहीं हैं. यदि किसी प्रकार के जहर या विषैले पदार्थ की पुष्टि होती है तो मामला और गंभीर हो सकता है.

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. रिपोर्ट आने तक सभी संभावित कारणों को खुला रखा गया है. विशेषज्ञों की टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों, बीमारी, संघर्ष या पर्यावरणीय दबाव का संयुक्त परिणाम तो नहीं है. जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई और संरक्षण संबंधी कदम तय किए जाएंगे.

इधर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत की खबर सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण से जुड़े संगठनों में चिंता का माहौल है. बांधवगढ़ देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में शामिल है और यहां बाघों की बड़ी संख्या पाई जाती है. ऐसे में किसी भी बाघ की असामान्य मौत को बेहद गंभीरता से लिया जाता है. वन विभाग ने रिजर्व क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और जल स्रोतों की स्थिति की भी समीक्षा शुरू कर दी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना को देखते हुए जंगलों में कृत्रिम जल स्रोतों की व्यवस्था और निगरानी को मजबूत करना जरूरी होगा. साथ ही वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता भी बताई जा रही है, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाया जा सके.

फिलहाल पूरे मामले में वन विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों की निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बांधवगढ़ के इस बाघ की मौत के पीछे असली वजह क्या थी. तब तक रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई इस मौत ने वन्यजीव संरक्षण तंत्र के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-