नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसके ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से जुड़े ऑनमार्क पोर्टल में सुरक्षा संबंधी कुछ कमजोरियां पाई गई थीं. हालांकि बोर्ड ने दावा किया है कि इन खामियों को नियंत्रित कर लिया गया है और पोर्टल को पहले से अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं. सीबीएसई की इस स्वीकारोक्ति के बाद डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और छात्रों के डेटा की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है.
सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सार्वजनिक मंचों और विभिन्न माध्यमों से सामने आई सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बोर्ड लगातार नजर बनाए हुए था. इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के विशेषज्ञों की मदद ली गई. पिछले कई दिनों से विशेषज्ञों की टीम पोर्टल की सुरक्षा को मजबूत करने और उसे अधिक सुरक्षित डिजिटल वातावरण में स्थानांतरित करने की दिशा में काम कर रही है.
बोर्ड के अनुसार, जिन सुरक्षा कमजोरियों की पहचान की गई थी, उन्हें दूर कर दिया गया है. इसके साथ ही तकनीकी विशेषज्ञ लगातार पूरे सिस्टम की समीक्षा कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में किसी प्रकार की नई या शेष कमजोरियों का दुरुपयोग न किया जा सके. सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा और मूल्यांकन संबंधी डेटा की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर पिछले कई सप्ताह से विवाद और सवाल उठ रहे थे. साइबर सुरक्षा शोधकर्ता निसर्ग अधिकारी ने दावा किया था कि क्लास 12 की उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों से संबंधित कुछ डिजिटल दस्तावेज कमजोर क्लाउड कॉन्फिगरेशन के कारण ऑनलाइन उपलब्ध हो सकते थे. इन दावों के बाद छात्रों की गोपनीयता और सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए थे.
ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्लेटफॉर्म को इस वर्ष लागू किए जाने के बाद से ही छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से कई शिकायतें सामने आई थीं. उत्तर पुस्तिकाओं के मिश्रण, पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों, रिकॉर्ड तक पहुंच में कठिनाई, स्कैन की गई प्रतियों के धुंधले होने और मूल्यांकन की सटीकता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. इन शिकायतों ने डिजिटल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ा दी थी.
इससे पहले सीबीएसई यह कहता रहा था कि मुख्य मूल्यांकन पोर्टल किसी साइबर हमले या डेटा लीक का शिकार नहीं हुआ है और जिन मामलों की चर्चा हो रही है, वे केवल एक परीक्षण मंच से जुड़े थे, जहां नमूना डेटा रखा गया था. लेकिन अब बोर्ड ने यह स्वीकार किया है कि सेवा प्रदाता के ऑनमार्क पोर्टल में कुछ सुरक्षा कमजोरियां वास्तव में मौजूद थीं, जिनके समाधान के लिए तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा.
सीबीएसई ने उन एथिकल हैकर्स और जागरूक नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने संभावित सुरक्षा खामियों की जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई. बोर्ड ने बताया कि कुछ लोगों से सीधे संपर्क कर अतिरिक्त तकनीकी सुझाव भी प्राप्त किए गए हैं. साथ ही बोर्ड ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी कमजोरी या सुरक्षा जोखिम का पता चलता है तो वह इसकी सूचना आधिकारिक माध्यमों से सीधे सीबीएसई की सुरक्षा टीम को दे.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक पोर्टल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की डिजिटल परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है. ऐसे में सीबीएसई के लिए यह चुनौती होगी कि वह छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों का भरोसा कायम रखते हुए अपनी डिजिटल संरचना को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाए. फिलहाल बोर्ड का कहना है कि सुरक्षा मजबूत करने की प्रक्रिया जारी है और परीक्षा संबंधी डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

