मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो का सख्त रुख, बोले ठेकेदारों की पैरवी की तो दिल्ली आकर देना होगा जवाब

मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो का सख्त रुख, बोले ठेकेदारों की पैरवी की तो दिल्ली आकर देना होगा जवाब

प्रेषित समय :19:49:00 PM / Fri, May 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नगर निगम और अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि श्रमिकों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. शुक्रवार को सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने नगर निगम के अपर आयुक्त को उस समय जमकर फटकार लगाई, जब आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम भुगतान किए जाने के मामले में उन्होंने ठेकेदार के पक्ष में तर्क देने का प्रयास किया.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने नगर निगम, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित 12 विभागों के अधिकारियों के साथ मानवाधिकार संबंधी शिकायतों और लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की. बैठक के दौरान विभिन्न विभागों में श्रमिकों, नागरिकों और कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों की जानकारी ली गई. समीक्षा के दौरान गौरीघाट क्षेत्र में कार्यरत आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया.

दरअसल, एक दिन पहले गौरीघाट निरीक्षण के दौरान प्रियंक कानूनगो ने वहां कार्यरत चार सफाई कर्मचारियों से सीधे बातचीत की थी. कर्मचारियों ने बताया था कि उन्हें ठेकेदार की ओर से मात्र सात से आठ हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है, जबकि निर्धारित न्यूनतम मजदूरी इससे कहीं अधिक है. कर्मचारियों की शिकायत सुनने के बाद जब समीक्षा बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई तो नगर निगम के अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह चौहान ने संभावना जताई कि शायद ठेकेदार द्वारा कुछ राशि अग्रिम भुगतान के रूप में दी गई हो, जिसके कारण वेतन कम दिखाई दे रहा हो.

अपर आयुक्त का यह जवाब सुनते ही मानवाधिकार आयोग के सदस्य नाराज हो गए. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकारियों का दायित्व शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराना है, न कि ठेकेदारों के बचाव में तर्क प्रस्तुत करना. उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक को निर्धारित वेतन नहीं मिल रहा है तो यह गंभीर विषय है और इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. कानूनगो ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि अधिकारी इस प्रकार ठेकेदारों की तरफदारी करते पाए गए तो उन्हें दिल्ली आकर जवाब देना पड़ सकता है.

बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में भी प्रियंक कानूनगो ने श्रमिक शोषण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि केवल नगर निगम ही नहीं, बल्कि अन्य संस्थानों में भी ठेका कर्मचारियों के साथ अन्याय की शिकायतें सामने आ रही हैं. उन्होंने रेलवे में कार्यरत ठेका कर्मचारियों की स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया कि चंदन वाल्मीकि नामक कर्मचारी ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसका निर्धारित वेतन लगभग 15 हजार रुपये है, लेकिन उसे वास्तविक रूप से सात से आठ हजार रुपये ही प्राप्त होते हैं.

कानूनगो ने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार उसका एटीएम कार्ड भी ठेकेदार के कब्जे में है. आरोप है कि वेतन खाते में राशि जमा होते ही ठेकेदार स्वयं एटीएम के माध्यम से बड़ी रकम निकाल लेता है और कर्मचारी को केवल आंशिक भुगतान करता है. उन्होंने कहा कि यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो यह न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि कर्मचारियों के मानवाधिकारों का भी गंभीर हनन है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने कहा कि इस मामले में संबंधित विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा गया है और आवश्यक पत्राचार किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों को गंभीरता से ले रहा है और जहां कहीं भी शोषण की शिकायत मिलेगी, वहां जवाबदेही तय की जाएगी.

समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि मानवाधिकार से जुड़े मामलों के निराकरण में लापरवाही न बरती जाए. शिकायतों की नियमित निगरानी, समयबद्ध जांच और पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि आम नागरिकों और कर्मचारियों का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास बना रहे.

प्रियंक कानूनगो की इस सख्त टिप्पणी और अधिकारियों को दी गई चेतावनी के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. श्रमिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि आयोग के निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ तो आउटसोर्स कर्मचारियों और ठेका श्रमिकों के शोषण पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा. वहीं अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर निगम और संबंधित विभाग इन शिकायतों की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-