सीबीएसई री-इवैल्यूएशन का IIT दाखिले पर बड़ा असर, जेईई एडवांस्ड पास छात्रों के सामने नई चुनौती

सीबीएसई री-इवैल्यूएशन का IIT दाखिले पर बड़ा असर, जेईई एडवांस्ड पास छात्रों के सामने नई चुनौती

प्रेषित समय :22:26:32 PM / Mon, Jun 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. सीबीएसई कक्षा 12वीं के परिणामों को लेकर चल रहा री-इवैल्यूएशन विवाद अब लाखों छात्रों के भविष्य से सीधे जुड़ गया है। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण हो गया है जिन्होंने जेईई एडवांस्ड 2026 परीक्षा में सफलता हासिल की है और अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में प्रवेश की प्रक्रिया की तैयारी कर रहे हैं। सीबीएसई द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और अंकों में संभावित बदलाव को लेकर उठे सवालों के बीच अब यह स्पष्ट हो गया है कि कक्षा 12वीं के अंकों में होने वाला कोई भी संशोधन आईआईटी प्रवेश प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

दरअसल, जेईई एडवांस्ड में सफल होने के बाद विद्यार्थियों को संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण यानी जोसा (JoSAA) की काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होना होता है। वर्ष 2026 के लिए जोसा पंजीयन प्रक्रिया 2 जून से प्रारंभ हो रही है। इसी बीच सीबीएसई का री-इवैल्यूएशन पोर्टल भी खुलना था, लेकिन परिणामों और पुनर्मूल्यांकन को लेकर जारी विवाद ने छात्रों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ऐसे में जिन विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया है, वे इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि यदि उनके अंक बाद में बदलते हैं तो इसका आईआईटी में प्रवेश पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आईआईटी में प्रवेश पूरी तरह जेईई एडवांस्ड की रैंक और प्रदर्शन के आधार पर होता है, न कि जेईई मेन के अंकों के आधार पर। हालांकि कक्षा 12वीं की परीक्षा आईआईटी प्रवेश के लिए एक अनिवार्य पात्रता शर्त है। यदि कोई छात्र इस पात्रता को पूरा नहीं करता है तो जेईई एडवांस्ड में सफलता मिलने के बावजूद उसे आईआईटी में प्रवेश नहीं मिल सकेगा।

आईआईटी में प्रवेश के लिए छात्रों को भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ कक्षा 12वीं या समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसके साथ ही सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक तथा एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 65 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। वैकल्पिक रूप से छात्र अपने बोर्ड के सफल विद्यार्थियों के शीर्ष 20 प्रतिशत में भी शामिल होना चाहिए। इन शर्तों में से किसी एक को पूरा करना अनिवार्य माना गया है।

यही कारण है कि सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन का प्रभाव सीधे पात्रता पर पड़ सकता है। यदि किसी छात्र के अंक पुनर्मूल्यांकन के बाद कम हो जाते हैं और वह निर्धारित पात्रता सीमा से नीचे पहुंच जाता है, तो उसे आईआईटी प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में यदि छात्र को सीट आवंटित भी हो चुकी हो या उसने सीट स्वीकार भी कर ली हो, तब भी उसका प्रवेश निरस्त किया जा सकता है। दस्तावेज सत्यापन या बाद के किसी भी चरण में यदि पात्रता पूरी नहीं पाई जाती है तो सीट रद्द की जा सकती है।

दूसरी ओर, यदि किसी छात्र के अंक पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़ जाते हैं और वह पहले की तुलना में अब पात्रता की शर्तें पूरी करने लगता है, तो उसके लिए राहत का प्रावधान भी मौजूद है। ऐसे छात्रों को संशोधित अंकसूची और प्रमाणपत्र के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर आईआईटी रुड़की स्थित जोसा प्रशासन को ईमेल के माध्यम से जानकारी देनी होगी। इसके बाद उन्हें आगे की सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

जोसा के नियमों के अनुसार ऐसे विद्यार्थियों को सीधे शुरुआती चरणों में शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन यदि उन्होंने समय पर पंजीयन और विकल्प भरने की प्रक्रिया पूरी कर ली है तो संशोधित पात्रता के आधार पर उन्हें बाद के राउंड में सीट आवंटित की जा सकती है। आवश्यक होने पर उनके लिए अतिरिक्त सीट का प्रावधान भी किया जा सकता है ताकि किसी छात्र के साथ अन्याय न हो।

इस वर्ष यह पूरा मामला इसलिए भी अधिक संवेदनशील हो गया है क्योंकि सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया है। कई विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं किया गया। कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ियों और अपेक्षा से कम अंक दिए जाने की शिकायत भी की है।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब एक छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि उसे उपलब्ध कराई गई भौतिकी की उत्तर पुस्तिका उसकी लिखावट से मेल नहीं खाती। इसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और सीबीएसई को स्पष्टीकरण देना पड़ा। बाद में बोर्ड ने संबंधित छात्र को संशोधित उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।

शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्रों के अंक पुनर्मूल्यांकन के बाद बदलते हैं तो इसका असर आईआईटी सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। कई छात्र अपनी पसंदीदा शाखा और संस्थान के चयन को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। उन्हें आशंका है कि परिणामों में बदलाव से उनकी पात्रता, रैंक आधारित विकल्प और सीट आवंटन प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल जोसा और सीबीएसई दोनों की प्रक्रियाएं समानांतर रूप से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करें और पुनर्मूल्यांकन से संबंधित किसी भी बदलाव की जानकारी तुरंत संबंधित संस्थानों को उपलब्ध कराएं। आने वाले दिनों में सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन और आईआईटी प्रवेश प्रक्रिया के बीच का यह तालमेल लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-