बरगी क्रूज हादसे की जांच में नया मोड़, आयोग के सामने जनहित याचिका, कई अहम सवाल उठे

बरगी क्रूज हादसे की जांच में नया मोड़, आयोग के सामने जनहित याचिका, कई अहम सवाल उठे

प्रेषित समय :22:20:30 PM / Mon, Jun 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. बरगी डेम में हुए बहुचर्चित और दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के बीच सोमवार को एक नया मोड़ सामने आया, जब हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता वाले एकल न्यायिक जांच आयोग के समक्ष एक जनहित याचिका प्रस्तुत की गई. याचिका में हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण और अब तक अनुत्तरित सवाल उठाते हुए आयोग से व्यापक जांच की मांग की गई है. जनहित याचिकाकर्ता का कहना है कि हादसे की वास्तविक वजहों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान के लिए सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है.

जबलपुर निवासी अखिलेश त्रिपाठी की ओर से प्रस्तुत इस जनहित याचिका में सबसे प्रमुख सवाल हादसे का शिकार हुए क्रूज को लेकर उठाया गया है. याचिका में पूछा गया है कि दुर्घटना के बाद क्रूज को तोड़ने या हटाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया और क्या इसके लिए किसी अधिकृत तकनीकी विशेषज्ञ या सक्षम प्राधिकरण की सलाह प्राप्त की गई थी. याचिकाकर्ता का तर्क है कि किसी भी दुर्घटना की जांच में संबंधित वाहन या संरचना महत्वपूर्ण साक्ष्य का कार्य करती है, ऐसे में उसके साथ की गई कार्रवाई की जांच भी जरूरी है.

याचिका में मौसम विभाग की भूमिका को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है. इसमें कहा गया है कि मौसम विभाग ही ऐसा अधिकृत संस्थान है जो संभावित मौसम परिवर्तनों और खतरनाक परिस्थितियों की पूर्व सूचना उपलब्ध कराता है. रेलवे, विमानन और अन्य विभागों को नियमित रूप से मौसम संबंधी चेतावनियां भेजी जाती हैं. ऐसे में यह जांच का विषय है कि हादसे वाले दिन मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग या संबंधित अधिकारियों को किसी प्रकार की चेतावनी जारी की थी या नहीं. यदि चेतावनी जारी की गई थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई और यदि नहीं की गई तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है.

याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या बरगी डेम क्षेत्र में मौजूद अधिकारियों द्वारा पर्यटकों को किसी संभावित खतरे की सूचना देने के लिए हूटर या अन्य चेतावनी प्रणाली का उपयोग किया गया था या नहीं. याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि मौसम खराब होने की आशंका थी तो पर्यटकों को पहले से सचेत किया जाना चाहिए था, जिससे हादसे की गंभीरता को कम किया जा सकता था.

जनहित याचिका में पर्यटकों और क्रूज से जुड़े बीमा संबंधी पहलुओं को भी प्रमुखता से उठाया गया है. याचिकाकर्ता ने आयोग से जांच करने का अनुरोध किया है कि बरगी डेम आने वाले पर्यटकों का बीमा किया जाता था या नहीं. साथ ही दुर्घटनाग्रस्त क्रूज का बीमा था या नहीं और यात्रियों के लिए किसी प्रकार की बीमा सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी या नहीं. इसके अतिरिक्त पर्यटकों के आवागमन में उपयोग किए जाने वाले वाहनों की बीमा स्थिति की भी जांच किए जाने की मांग की गई है. याचिका में भेड़ाघाट और गौरीघाट जैसे अन्य पर्यटन स्थलों पर संचालित नौकायन और जल पर्यटन गतिविधियों को भी जांच के दायरे में शामिल करने का सुझाव दिया गया है.

याचिका में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा विंड मेजरमेंट डिवाइस अर्थात हवा की गति मापने वाले उपकरणों की अनुपस्थिति को लेकर उठाया गया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि बरगी डेम जैसे बड़े जल पर्यटन स्थलों पर ऐसे उपकरणों की स्थापना अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि पर्यटकों और संचालकों को वास्तविक समय में हवा की गति की जानकारी मिल सके. इससे खतरनाक परिस्थितियों का पूर्वानुमान लगाकर आवश्यक सावधानी बरती जा सकती है और संभावित हादसों को रोका जा सकता है.

राहत और बचाव कार्यों को लेकर भी याचिका में गंभीर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता के अनुसार दुर्घटना के बाद जारी आधिकारिक जानकारी में यह सामने आया था कि मौके पर एसडीआरएफ या एनडीआरएफ की कोई टीम तत्काल मौजूद नहीं थी. इसके बजाय बरगी क्षेत्र में संचालित एक अन्य परियोजना के कर्मचारियों ने सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया था. ऐसे में यह जांच का विषय है कि आपदा प्रबंधन की जिम्मेदार एजेंसियां समय पर मौके पर क्यों नहीं पहुंच सकीं और इस देरी के लिए कौन जिम्मेदार था.

सोमवार को आयोग के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता और उनके अधिवक्ता पंकज दुबे ने लगभग एक घंटे तक अपने पक्ष और तर्क प्रस्तुत किए. इस दौरान उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं को जांच का हिस्सा बनाया जाए तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान नए सिरे से दर्ज किए जाएं. उनका कहना था कि केवल तकनीकी कारणों की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि प्रशासनिक, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन संबंधी पहलुओं की भी गहराई से समीक्षा की जानी चाहिए.

सुनवाई के दौरान आयोग ने प्रस्तुत तथ्यों और तर्कों को गंभीरता से सुना. आयोग की ओर से संकेत दिया गया कि जनहित याचिका में उठाए गए बिंदुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकता है. बरगी डेम क्रूज हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद से पूरे प्रदेश की नजरें इस जांच पर टिकी हुई हैं और उम्मीद की जा रही है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट से हादसे की वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-