नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) से जुड़े विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. सीबीएसई चेयरमैन और सचिव का तबादला कर दिया गया है. इसके साथ ही बोर्ड में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक जांच समिति भी गठित की गई है. सीबीएसई चेयरमैन ढ्ढ्रस् राहुल सिंह बोर्ड की समग्र कार्य प्रणाली और परीक्षा सुधारों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. जबकि जबकि सचिव हिमांशु गुप्ता, आईएएस, प्रशासन, वित्त और संबद्धता से जुड़े मामलों की देखरेख कर रहे थे.
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई सीबीएसई की मूल्यांकन और डिजिटल सेवाओं से जुड़े मामलों पर उठ रहे सवालों के बीच की गई है. सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया में कहीं किसी तरह की अनियमितता या नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई.
टेंडर प्रक्रिया की भी जांच करेगी समिति
बताया जा रहा है कि गठित जांच समिति प्रोक्योरमेंट प्रोसेस, टेंडर प्रक्रिया और संबंधित कंपनियों की भूमिका की भी समीक्षा करेगी. समिति यह भी जांच करेगी कि सेवाओं के चयन में सभी तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं. सीबीएसई के भीतर हुए इस बड़े प्रशासनिक बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई लोग इसे बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं.
ये है विवाद का कारण
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सीबीएसई कक्षा 12 के छात्रों ने पहले कॉपी जांचने में गड़बड़ी और फिर स्कैन कॉपी बदल जाने जैसी शिकायतें की. कई छात्रों का दावा था कि उन्हें धुंधले पेज, गायब सेक्शन और बोर्ड की ऑनलाइन सेवाओं के इस्तेमाल में समस्याओं का सामना करना पड़ा. मामला तब और बढ़ गया जब ओएसएम प्लेटफॉर्म और उस टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे, जिसके जरिए डिजिटल मूल्यांकन का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था. वेंडर चयन प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और री-इवैल्युएशन सेवाओं में देरी को लेकर चर्चाओं ने विवाद को और बढ़ा दिया. इसके बाद सीबीएसई ने आवेदन की समयसीमा बढ़ाई, कई स्पष्टीकरण जारी किए और कहा कि छात्रों द्वारा उठाई गई हर वास्तविक चिंता की तय प्रक्रिया के तहत समीक्षा की जाएगी.
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