दो कौड़ी के लोग

दो कौड़ी के लोग

प्रेषित समय :20:55:32 PM / Tue, Jun 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

- डॉ. प्रियंका सौरभ

रील-शोहरत का लगा, अब तो ऐसा रोग।
 लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।।

लाइक-शेयर की भूख में, बेच रहे संस्कार, 
प्रसिद्धि की चाह ने, तोड़े सब व्यवहार। 
पाने सस्ती तालियाँ, करते गलत प्रयोग— 
लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।।

ज्ञान नहीं, बस शोर है, दिखता चारों ओर, 
भीतर खालीपन लिए, बाहर मचता शोर। 
सच की कीमत घट गई, झूठ हुआ उद्योग—
 लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।।

कपड़ों से पहचान का, करने लगे बयान, 
चरित्रों की धूल पर, लिखते झूठा मान। 
नंगेपन तक आ गए, ये कैसा दुर्योग—
 लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।।

‘सौरभ’ ये कैसा समय, कैसा यह बदलाव, 
मर्यादा की शाख पर, सूख गया अब छाँव।
लाइक-शेयर में ढूँढते, जीवन का संयोग— 
लाज-शरम सब बेचते, वाह-वाह के लोग।।
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-