-डॉ. अशोक कुमार वर्मा
विश्वभर में प्रतिवर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2018 में इस दिवस को औपचारिक मान्यता प्रदान की थी. इसका उद्देश्य लोगों को साइकिल के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों, पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका तथा सतत विकास में उसके योगदान के प्रति जागरूक करना है. साइकिल मानव सभ्यता का ऐसा साधन है जिसने न केवल परिवहन को सरल बनाया, बल्कि समाज को स्वास्थ्य, समानता, सादगी और आत्मनिर्भरता का संदेश भी दिया है.
आज का युग आधुनिकता और तकनीक का युग है. जीवन की गति इतनी तेज हो गई है कि व्यक्ति समय बचाने की दौड़ में अपने स्वास्थ्य को ही पीछे छोड़ता जा रहा है. कुछ कदम पैदल चलना भी लोगों को कठिन लगने लगा है. घर से बाजार, कार्यालय, विद्यालय अथवा अन्य छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी मोटरसाइकिल, स्कूटर और कार का उपयोग सामान्य बात बन गई है. परिणामस्वरूप शारीरिक श्रम लगातार कम हो रहा है और मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं.
यदि हम कुछ दशक पीछे लौटकर देखें तो स्थिति बिल्कुल भिन्न दिखाई देती है. लगभग तीस-चालीस वर्ष पहले अधिकांश परिवारों में साइकिल ही प्रमुख परिवहन साधन हुआ करती थी. गांवों में किसान खेतों तक साइकिल से जाते थे, विद्यार्थी विद्यालय और महाविद्यालय साइकिल पर पहुंचते थे तथा कर्मचारी अपने कार्यस्थलों तक इसी माध्यम से आते-जाते थे. उस समय लोगों का जीवन अधिक सक्रिय और स्वास्थ्य बेहतर होता था.
मुझे अपने परिवार के अनुभव आज भी स्मरण हैं. मेरे पिता श्री कली राम भारतीय सेना में कार्यरत थे और भारत-पाक सीमा पर तैनात रहते थे. उन दिनों मेरे दादा और ताऊजी कई किलोमीटर की दूरी साइकिल से तय करके उनसे मिलने जाते थे. आज यह बात असाधारण लग सकती है, लेकिन उस समय यह सामान्य जीवन का हिस्सा थी. लोग शारीरिक रूप से इतने सक्षम होते थे कि एक ही साइकिल पर दो या तीन व्यक्ति भी यात्रा कर लेते थे. रास्ते में मिलने वाले लोग एक-दूसरे का हालचाल पूछते, अपनापन जताते और आवश्यकता पड़ने पर सहायता भी करते थे. साइकिल केवल यात्रा का साधन नहीं थी, बल्कि सामाजिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं की भी वाहक थी.
साइकिल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पर्यावरण के लिए पूर्णतः अनुकूल साधन है. इसमें पेट्रोल, डीजल या गैस की आवश्यकता नहीं होती. इससे न धुआँ निकलता है, न वायु प्रदूषण फैलता है और न ही ध्वनि प्रदूषण होता है. यदि साइकिल में कोई तकनीकी समस्या आ भी जाए तो व्यक्ति उसे आसानी से चलाकर या साथ लेकर अपनी यात्रा जारी रख सकता है. यही इसकी सबसे बड़ी सरलता है.
आज विश्व के अधिकांश बड़े शहर प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. वाहनों से निकलने वाला धुआँ मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक सिद्ध हो रहा है. यदि लोग छोटी दूरियों के लिए साइकिल का उपयोग प्रारंभ कर दें तो प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है. वर्तमान समय में बढ़ती जनसंख्या और वाहनों की संख्या ने यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित किया है. सड़कों का विस्तार लगातार किया जा रहा है, फिर भी जाम की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही. दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, बेंगलुरु और अन्य महानगरों में लोग प्रतिदिन घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहते हैं. इससे समय, धन और ऊर्जा तीनों की हानि होती है. यदि छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग बढ़े तो यातायात का दबाव भी कम होगा और लोगों का समय भी बचेगा.
साइकिल स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है. नियमित साइकिल चलाने से हृदय मजबूत होता है, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रक्त संचार बेहतर होता है तथा शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है. चिकित्सकों के अनुसार प्रतिदिन 30 से 45 मिनट तक साइकिल चलाना अनेक गंभीर रोगों के जोखिम को कम कर सकता है. यह मानसिक तनाव कम करने और मन को प्रसन्न रखने का भी प्रभावी माध्यम है.
विडंबना यह है कि आज अनेक लोग कार से जिम जाते हैं और वहां स्थिर साइकिल पर व्यायाम करते हैं. यदि वही लोग अपने दैनिक जीवन में वास्तविक साइकिल का उपयोग करें तो स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.
विश्व के कई देशों ने साइकिल संस्कृति को अपनाकर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है. नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी जैसे देशों में बड़ी संख्या में लोग साइकिल से कार्यालय जाते हैं. वहां सरकारों ने साइकिल लेन और सुरक्षित मार्ग विकसित किए हैं. परिणामस्वरूप प्रदूषण कम हुआ है और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर बना है. क्यूबा का उदाहरण भी प्रेरणादायक है, जहां आर्थिक चुनौतियों और ईंधन संकट के दौरान साइकिल को बड़े पैमाने पर अपनाया गया. इससे ईंधन की बचत हुई, पर्यावरण सुधरा और नागरिकों का स्वास्थ्य भी बेहतर हुआ.
हरियाणा में भी साइकिल के माध्यम से जनजागरण के अनेक प्रयास किए गए हैं. हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित साइक्लोथॉन यात्राओं ने नशा मुक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया. प्रेरणा समिति हरियाणा द्वारा वर्षों से आयोजित साइकिल रैलियाँ भी लोगों को स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति के प्रति जागरूक कर रही हैं.
मुझे यह संतोष है कि मैं स्वयं वर्षों से दैनिक जीवन में साइकिल का उपयोग कर रहा हूँ तथा विभिन्न जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को इसके लिए प्रेरित करता रहा हूँ. मेरी साइकिल पर लिखे संदेश—"साइकिल चलाओ, बीमारी भगाओ", "पर्यावरण बचाना है तो साइकिल अपनाना है", "अच्छे स्वास्थ्य के लिए साइकिल से करो आना-जाना" तथा "ईंधन बचाओ, देश को समृद्ध बनाओ"—लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित करते हैं और सकारात्मक संदेश पहुंचाते हैं.
आज आवश्यकता केवल विश्व साइकिल दिवस मनाने की नहीं, बल्कि साइकिल संस्कृति को पुनर्जीवित करने की है. विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए जिनसे लोग साइकिल अपनाने के लिए प्रेरित हों. सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल दिवस के रूप में मनाया जा सकता है. बच्चों को प्रारंभ से ही साइकिल के महत्व के बारे में बताया जाना चाहिए.
हम यह नहीं कहते कि मोटर वाहन पूरी तरह छोड़ दिए जाएं. आधुनिक जीवन में उनकी अपनी उपयोगिता है. लेकिन जहां साइकिल का उपयोग संभव हो, वहां मोटर वाहन का प्रयोग कम किया जाना चाहिए. छोटी दूरी की यात्रा, दैनिक कार्यों और आसपास के स्थानों तक पहुंचने के लिए साइकिल सर्वोत्तम विकल्प हो सकती है.
यदि प्रत्येक परिवार एक मोटर वाहन के साथ एक साइकिल को भी अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना ले, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य, पर्यावरण और आर्थिक बचत के क्षेत्र में आश्चर्यजनक परिणाम देखने को मिल सकते हैं. ईंधन की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा, सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर होगा.
हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण पर विशेष जोर दिया है. उन्होंने नागरिकों से पेट्रोल और डीजल का उपयोग केवल आवश्यकता होने पर करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कार-पूलिंग बढ़ाने तथा छोटी दूरी के लिए साइकिल का प्रयोग करने का आह्वान किया है.
विश्व साइकिल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि प्रगति का अर्थ केवल तेज गति नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल जीवन भी है. साइकिल सादगी, स्वास्थ्य, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. आइए, हम संकल्प लें कि अपने दैनिक जीवन में साइकिल को उचित स्थान देंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण के निर्माण में योगदान देंगे.
(लेखक हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं तथा वर्षों से साइकिल के माध्यम से नशा मुक्ति, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं.)
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

