6 से 11 जून तक रहेगा मृत्यु पंचक परमा और निर्जला एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ी उत्सुकता

6 से 11 जून तक रहेगा मृत्यु पंचक परमा और निर्जला एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ी उत्सुकता

प्रेषित समय :21:38:45 PM / Thu, Jun 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 जून माह का दूसरा सप्ताह धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पंचांग के अनुसार 6 जून 2026, शनिवार की शाम 7 बजकर 3 मिनट से 11 जून 2026, गुरुवार की सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक मृत्यु पंचक प्रभावी रहेगा. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह पांच दिवसीय अवधि विशेष सावधानी बरतने वाली मानी जाती है. पंचक का आरंभ शनिवार से होने के कारण इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है, जिसे धार्मिक परंपराओं में अपेक्षाकृत संवेदनशील समय माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है. विशेष रूप से गृह निर्माण से जुड़े कार्य, छत डालना, कुछ मांगलिक आयोजन और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले पंचांग एवं विद्वानों की सलाह लेने की परंपरा रही है. हालांकि आवश्यक कार्य उचित धार्मिक उपायों और विधि-विधान के साथ किए जा सकते हैं.

इस वर्ष मृत्यु पंचक का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका समापन होते ही उसी दिन परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार परमा एकादशी की तिथि 11 जून को रात्रि 12 बजकर 57 मिनट से प्रारंभ होकर उसी दिन रात्रि 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार श्रद्धालु 11 जून, गुरुवार को भगवान विष्णु की आराधना करते हुए परमा एकादशी का व्रत रखेंगे.

धर्मशास्त्रों में परमा एकादशी को विशेष फलदायी एकादशी माना गया है. इस दिन व्रत, जप, दान और भगवान विष्णु के पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से पापों का क्षय होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है.

जून माह में इसके बाद 25 जून को निर्जला एकादशी का व्रत भी मनाया जाएगा. एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर 25 जून की रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा. इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशियों में गिना जाता है.

धार्मिक मान्यता है कि निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक पालन करने से वर्षभर की समस्त एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. इसी कारण देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं.

धर्माचार्यों का कहना है कि 6 जून की शाम से 11 जून की सुबह तक का मृत्यु पंचक काल, उसके तुरंत बाद आने वाली परमा एकादशी और फिर माह के अंत में पड़ने वाली निर्जला एकादशी जून 2026 को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष बना रहे हैं. श्रद्धालु इन तिथियों को लेकर पहले से ही पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य की तैयारियों में जुट गए हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-