अहमदाबाद. नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच गुजरात में पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच राज्य सरकार और गुजरात राज्य स्कूल पाठ्यपुस्तक मंडल ने बड़ा आश्वासन दिया है. मंडल ने कहा है कि वैश्विक परिस्थितियों और कानूनी बाधाओं के कारण कागज आयात में लगभग तीन महीने की देरी होने के बावजूद पाठ्यपुस्तकों का वितरण युद्धस्तर पर किया जा रहा है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी छात्र की पढ़ाई प्रभावित न हो.
गुजरात राज्य स्कूल पाठ्यपुस्तक मंडल के कार्यवाहक अध्यक्ष मनुभाई पवारा ने शुक्रवार को बताया कि राज्य के सभी माध्यमों के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों तक निर्धारित समय सीमा के भीतर पाठ्यपुस्तकें पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन तथा शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न वाजा और राज्य मंत्री रिवाबा जडेजा के नेतृत्व में संचालित की जा रही है.
मनुभाई पवारा के अनुसार वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में विद्यार्थियों के हित में कुछ नए विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. इसके चलते पाठ्यपुस्तकों के निर्माण और प्रकाशन की प्रक्रिया समय पर शुरू कर दी गई थी. हालांकि कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित हुई. उन्होंने बताया कि कानूनी मामलों और न्यायालयीन प्रक्रियाओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न अस्थिर परिस्थितियों का भी असर पड़ा. विशेष रूप से ईरान सहित विभिन्न देशों से जुड़े वैश्विक तनावों के कारण कागज के आयात में लगभग ढाई से तीन महीने की देरी हुई.
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद पाठ्यपुस्तक मंडल की पूरी टीम लगातार कार्य कर रही है ताकि छात्रों की शिक्षा पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े. मंडल ने उत्पादन, मुद्रण और वितरण प्रक्रिया को तेज करते हुए सभी आवश्यक संसाधनों का उपयोग किया है. अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय और कानूनी बाधाओं के बावजूद शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे प्रयास किए जा रहे हैं.
राज्य सरकार ने इस दौरान एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. कागज की लागत और आयात संबंधी समस्याओं के बावजूद पाठ्यपुस्तकों की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की गई है. मनुभाई पवारा ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि वैश्विक परिस्थितियों का अतिरिक्त आर्थिक बोझ अभिभावकों पर पड़े. इसलिए पुस्तकों के मूल्य पूर्ववत रखे गए हैं, जिससे विद्यार्थियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी.
पाठ्यपुस्तकों के वितरण की वर्तमान स्थिति पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि निजी और गैर-अनुदानित विद्यालयों के लिए निर्धारित मूल्य वाली पुस्तकें समय पर वितरकों को उपलब्ध करा दी गई हैं और अब वे विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा रही हैं. वहीं सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के लिए निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली सभी पुस्तकों को आगामी ‘शाला प्रवेशोत्सव’ से पहले प्रत्येक तालुका स्तर तक पहुंचाने की विस्तृत योजना बनाई गई है. प्रशासनिक स्तर पर माइक्रो प्लानिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में पुस्तकों की कमी न हो.
इसके अतिरिक्त सरकारी, अनुदानित माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में भी पाठ्यपुस्तकों की समय पर आपूर्ति के लिए विभिन्न सरकारी एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं. परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़े सभी विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं ताकि वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए.
राज्य सरकार ने संभावित देरी की स्थिति से निपटने के लिए डिजिटल विकल्प भी तैयार रखा है. पाठ्यपुस्तक मंडल ने सभी माध्यमों की पाठ्यपुस्तकों को ई-बुक के रूप में उपलब्ध करा दिया है. इन्हें मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी दूरस्थ या भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में मुद्रित पुस्तकें पहुंचने में थोड़ी देरी भी होती है तो विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी.
डिजिटल व्यवस्था के तहत शिक्षक और विद्यार्थी शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ से ही वेबसाइट पर उपलब्ध अध्यायों और पुस्तकों को डाउनलोड कर सकेंगे तथा उनका उपयोग अध्ययन और अध्यापन में कर सकेंगे. इससे पाठ्यक्रम की शुरुआत समय पर हो सकेगी और विद्यार्थियों को किसी प्रकार की शैक्षणिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
मनुभाई पवारा ने कहा कि राज्य सरकार और पाठ्यपुस्तक मंडल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और शैक्षणिक हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, प्रत्येक छात्र तक शिक्षा की सुविधाएं पहुंचाने और अध्ययन प्रक्रिया को निर्बाध बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य है कि नए शैक्षणिक सत्र में कोई भी विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों के अभाव में अपनी पढ़ाई से वंचित न रहे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी तक समान रूप से पहुंचे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

