जबलपुर. देश के विभिन्न शहरों में सामने आ रही अग्निकांड की घटनाओं के बाद जबलपुर नगर निगम ने भी शहर की फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है. नगर निगम ने ऐसे भवनों की पहचान शुरू कर दी है, जहां अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने बताया कि शहर में लगभग 350 ऐसी इमारतों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें फायर सेफ्टी संबंधी नोटिस जारी कर आवश्यक जानकारी मांगी गई है.
महापौर ने कहा कि कई व्यावसायिक और बहुमंजिला भवन ऐसे हैं, जहां नियमानुसार अग्नि सुरक्षा उपकरण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं. ऐसे भवनों के संचालकों और मालिकों से पूछा गया है कि उन्होंने अपनी इमारतों में फायर सेफ्टी के जरूरी प्रबंध क्यों नहीं किए. नगर निगम का उद्देश्य किसी पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संभावित हादसों को रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
नगर निगम के फायर विभाग की एक विशेष टीम लगातार शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण कर रही है. महापौर के अनुसार तीन सदस्यीय टीम प्रतिदिन अलग-अलग इलाकों में जाकर भवनों की जांच करती है. जहां भी फायर सेफ्टी के नियमों का उल्लंघन या लापरवाही सामने आती है, वहां तत्काल नोटिस जारी कर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाते हैं.
फायर सेफ्टी अधिकारी कुशाग्र सिंह ने बताया कि नियमों के अनुसार 5000 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल वाली इमारतों अथवा 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के लिए फायर सेफ्टी का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लेना अनिवार्य है. ऐसे भवनों में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, पानी की पर्याप्त व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होता है. इन मानकों का पालन नहीं करने पर भवन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में सबसे बड़ी चुनौती घनी आबादी वाले क्षेत्रों की है. कई इलाकों में सड़कें अपेक्षाकृत चौड़ी होने के बावजूद अवैध पार्किंग के कारण आवागमन बाधित रहता है. ऐसी स्थिति में यदि किसी भवन में आग लग जाए तो फायर ब्रिगेड वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाई होती है. इससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो सकते हैं.
फायर सेफ्टी अधिकारी कुशाग्र सिंह ने बताया कि घनी बस्तियों में अग्निकांड की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण होती है. कई क्षेत्रों में भवन एक-दूसरे से सटे हुए बने हैं और उनके बीच पर्याप्त खुला स्थान नहीं है. ऐसे में आग लगने पर वह तेजी से आसपास की इमारतों तक फैल सकती है. इसके अलावा संकरी गलियां और अव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था बचाव कार्यों को और अधिक कठिन बना देती है.
उन्होंने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि करीब दो महीने पहले सतना बिल्डिंग क्षेत्र के पीछे स्थित एक इमारत में आग लग गई थी. सौभाग्य से उस समय भवन में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था. उस भवन में कपड़े का कारखाना संचालित होता था और वहां तक पहुंचने के लिए केवल लगभग 10 फीट चौड़ा रास्ता था. भवन में प्रवेश और निकास का भी एक ही मार्ग था. यदि उस समय भवन में लोग मौजूद होते तो स्थिति गंभीर हो सकती थी.
अधिकारियों का कहना है कि जबलपुर में पहले भी अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कुछ वर्ष पहले एक अस्पताल में लगी आग में कई मासूम बच्चों की जान चली गई थी. उस दर्दनाक घटना के बाद शहर में फायर सेफ्टी को लेकर जागरूकता बढ़ी और भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा.
नगर निगम का मानना है कि नई इमारतों में अब फायर एग्जिट, अग्निशमन यंत्रों और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. फिर भी पुराने भवनों में अभी भी कई कमियां मौजूद हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है. इसी उद्देश्य से व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है.
नगर निगम ने भवन मालिकों, व्यवसायियों और नागरिकों से अपील की है कि वे फायर सेफ्टी नियमों का पालन करें और अपनी इमारतों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें. अधिकारियों का कहना है कि आग लगने की घटनाओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन उचित तैयारी और सुरक्षा उपायों के माध्यम से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. नगर निगम आने वाले दिनों में भी निरीक्षण अभियान जारी रखेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

