गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव पर भारत का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, कहा अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में लोकतंत्र का दिखावा स्वीकार नहीं

गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव पर भारत का पाकिस्तान को कड़ा संदेश, कहा अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र में लोकतंत्र का दिखावा स्वीकार नहीं

प्रेषित समय :19:46:15 PM / Fri, Jun 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा चुनाव को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है. भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव कराने के निर्णय पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए स्पष्ट कहा है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा पाकिस्तान का वहां चुनाव कराना पूरी तरह अवैध और अस्वीकार्य है. भारत ने पाकिस्तान को औपचारिक रूप से कड़ा विरोध पत्र सौंपते हुए कहा है कि इस प्रकार की गतिविधियां न तो जमीनी हकीकत बदल सकती हैं और न ही पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैधता प्रदान कर सकती हैं.

पाकिस्तान सरकार 7 जून को गिलगित-बाल्टिस्तान की 33 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव कराने जा रही है. यह चुनाव मूल रूप से जनवरी में प्रस्तावित थे, लेकिन क्षेत्र में खराब मौसम और बर्फबारी के कारण इन्हें स्थगित कर दिया गया था. अब चुनाव की नई तिथि घोषित होने के साथ ही भारत ने अपने पुराने और स्पष्ट रुख को दोहराते हुए पाकिस्तान की इस पहल का विरोध किया है.

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत ने पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्रों में तथाकथित “गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा” के लिए आम चुनाव आयोजित किए जाने के संबंध में कड़ा विरोध दर्ज कराया है. मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. यह स्थिति 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय के आधार पर स्थापित है.

भारत ने अपने बयान में यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा चुनाव कराने या प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करने जैसे कदम केवल एक राजनीतिक दिखावा हैं, जो वास्तविक समस्याओं को छिपाने का प्रयास भर हैं. भारत का कहना है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और नागरिक स्वतंत्रताओं के हनन जैसे गंभीर मुद्दे लगातार बने हुए हैं. चुनाव जैसे कदम इन वास्तविकताओं को नहीं बदल सकते.

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के भौतिक या प्रशासनिक परिवर्तन के प्रयासों को पूरी तरह खारिज करती है. भारत ने दोहराया कि पाकिस्तान का इन क्षेत्रों पर कोई वैध अधिकार नहीं है और उसे अंततः भारतीय क्षेत्रों से अपना अवैध कब्जा समाप्त करना होगा.

गिलगित-बाल्टिस्तान को लेकर भारत पहले भी कई बार पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज करा चुका है. इससे पूर्व भी जब पाकिस्तान ने वहां चुनाव कराए थे या प्रशासनिक ढांचे में बदलाव किए थे, तब भारत ने इसे अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया था. भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को लेकर भी आपत्ति जताई है, क्योंकि इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिसे भारत अपना क्षेत्र मानता है.

गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र लंबे समय से भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. हिमालय और काराकोरम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित यह इलाका सामरिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है. यही कारण है कि इस क्षेत्र को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से विवाद बना हुआ है.

पाकिस्तान ने वर्ष 2009 में गिलगित-बाल्टिस्तान को एक नई प्रशासनिक पहचान देते हुए पूर्व के नॉर्दर्न एरियाज का नाम बदलकर गिलगित-बाल्टिस्तान रखा था. इसके साथ ही उसे प्रांत जैसी कुछ प्रशासनिक शक्तियां भी प्रदान की गई थीं, हालांकि पाकिस्तान की संसद में उसे पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया. बाद में वर्ष 2018 में पाकिस्तान सरकार ने इस क्षेत्र से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक परिषद की कई शक्तियां स्थानीय विधानसभा को हस्तांतरित कर दी थीं. भारत ने इन सभी कदमों का विरोध किया था और उन्हें अवैध बताया था.

हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी. रिपोर्टों के अनुसार चुनाव के दौरान सुरक्षा बनाए रखने के लिए पांच हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जाए.

भारत का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा चुनाव आयोजित करना केवल एक प्रशासनिक गतिविधि नहीं, बल्कि विवादित क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास है. इसी कारण नई दिल्ली ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी भी कदम को मान्यता नहीं देता. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष भी समय-समय पर यह रुख रखा है कि पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में की जाने वाली राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां कानूनी वैधता नहीं रखतीं.

गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव को लेकर भारत की तीखी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच संवेदनशील बना हुआ है. चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में इस विषय पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां पाकिस्तान द्वारा कराया जा रहा चुनाव किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-