नई दिल्ली. देशभर के उपभोक्ताओं को राहत देने और खाद्य तेल बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब खाद्य तेल कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी आकार के पैकेट या बोतल बाजार में नहीं बेच सकेंगी. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने खाने के तेल और ब्लेंडेड खाद्य तेलों की पैकेजिंग के लिए निर्धारित मानक आकार लागू करने का निर्णय लिया है. इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रम से बचाना और विभिन्न ब्रांडों के उत्पादों की कीमत और मात्रा की तुलना को आसान बनाना है.
सरकार का यह निर्णय खाद्य तेल उद्योग के प्रमुख संगठनों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है. बताया गया है कि इन संगठनों का प्रतिनिधित्व देश के लगभग 90 प्रतिशत खाद्य तेल उद्योग पर है. लंबे समय से यह शिकायत सामने आ रही थी कि विभिन्न कंपनियां अलग-अलग और असामान्य पैकेट साइज बाजार में उतार रही हैं, जिससे ग्राहकों के लिए वास्तविक कीमत और मात्रा का आकलन करना कठिन हो जाता है.
नई व्यवस्था के तहत अब खाद्य तेल केवल निर्धारित मानक पैकेजिंग में ही बेचे जा सकेंगे. सरकार ने छोटे, मध्यम और बड़े पैकेटों के लिए स्पष्ट श्रेणियां तय कर दी हैं. छोटे पैकेटों में 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम तथा 500 मिलीलीटर या 500 ग्राम के पैक शामिल होंगे. मध्यम श्रेणी में 1 लीटर, 2 लीटर, 3 लीटर, 4 लीटर और 5 लीटर की पैकेजिंग को मान्यता दी गई है. वहीं बड़े उपभोक्ताओं और व्यावसायिक उपयोग के लिए 15 लीटर और 20 लीटर के टीन या बड़े कंटेनर निर्धारित किए गए हैं.
यह नियम पाम ऑयल, सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल, सरसों तेल, मूंगफली तेल, तिल तेल, राइस ब्रान ऑयल, कॉटनसीड ऑयल और मक्का तेल सहित अधिकांश प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू होगा. सरकार का मानना है कि एक समान पैकेजिंग व्यवस्था से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी.
हालांकि सरकार ने गरीब और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ छूट भी प्रदान की है. 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से छोटे पैकेटों को इस नियम के दायरे से बाहर रखा गया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम आय वाले उपभोक्ताओं को छोटे और सस्ते पैकेट पहले की तरह उपलब्ध होते रहें. इसके अलावा कुछ ऐसे खाद्य तेल जिन्हें बाजार में सीमित मात्रा में उपयोग किया जाता है, उन्हें भी इस नियम से छूट दी गई है.
नए नियम का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अब कंपनियों को केवल लीटर या मिलीलीटर में मात्रा दर्शाना पर्याप्त नहीं होगा. यदि किसी पैकेट पर तेल की मात्रा वॉल्यूम यानी लीटर या मिलीलीटर में लिखी गई है, तो उसके साथ उस तेल का वास्तविक वजन ग्राम या किलोग्राम में भी स्पष्ट रूप से अंकित करना अनिवार्य होगा.
विशेषज्ञों के अनुसार तापमान में बदलाव के कारण तेल की मात्रा और वजन में अंतर आ सकता है, जिससे कई बार उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है. नए नियम से ग्राहकों को यह स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि वे वास्तव में कितनी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल देश में उत्पादित खाद्य तेलों पर ही नहीं, बल्कि विदेशों से आयात किए जाने वाले तेलों पर भी समान रूप से लागू होगा. इससे घरेलू और आयातित दोनों प्रकार के उत्पादों के लिए एक समान मानक व्यवस्था सुनिश्चित होगी.
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए खाद्य तेल निर्माताओं, पैकेजिंग कंपनियों और आयातकों को तीन महीने का संक्रमण काल दिया गया है. इस अवधि के दौरान कंपनियां अपनी पैकेजिंग प्रणाली को नए मानकों के अनुरूप ढाल सकेंगी. हालांकि जो कंपनियां तुरंत नए नियमों को अपनाना चाहती हैं, वे बिना किसी प्रतीक्षा के इन्हें लागू कर सकती हैं.
उपभोक्ता मामलों के विभाग का कहना है कि यह कदम बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करेगा. सरकार का मानना है कि एक समान पैकेजिंग प्रणाली से ग्राहकों को सही जानकारी मिलेगी, कीमतों की तुलना आसान होगी और खरीदारी के दौरान किसी प्रकार के भ्रम या भ्रामक विपणन की संभावना कम हो जाएगी.
खाद्य तेलों की पैकेजिंग में किया गया यह बदलाव आने वाले समय में उपभोक्ताओं के लिए अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बाजार व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

