ट्रंप-मोजतबा मुलाकात पर ईरान ने लगाया ब्रेक, 24 अरब डॉलर की मांग के साथ अमेरिका को दी बड़ी चेतावनी

ट्रंप-मोजतबा मुलाकात पर ईरान ने लगाया ब्रेक, 24 अरब डॉलर की मांग के साथ अमेरिका को दी बड़ी चेतावनी

प्रेषित समय :21:28:01 PM / Sun, Jun 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तेहरान/वॉशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के संबंधों में एक नया मोड़ आ गया है. ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और देश के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बीच संभावित मुलाकात की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है. साथ ही तेहरान ने अमेरिका के सामने 24 अरब डॉलर की जमी हुई ईरानी संपत्तियां जारी करने की शर्त रखी है और चेतावनी दी है कि यदि वार्ता पूरी तरह विफल हुई तो संघर्ष का दायरा हिंद महासागर से लेकर भूमध्य सागर तक फैल सकता है.

हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से इच्छा जताई थी कि वह ईरान के सर्वोच्च नेता से मिलना चाहेंगे और भविष्य में ऐसी मुलाकात संभव हो सकती है. लेकिन ईरानी नेतृत्व ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसी कोई बैठक नहीं होने जा रही है.

ईरान की एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल के सचिव और मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार Mohsen Rezaei ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत पहले ही गंभीर गतिरोध का शिकार है और इसके लिए अमेरिका जिम्मेदार है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने बातचीत की प्रक्रिया को ठप कर दिया है, इसलिए किसी उच्चस्तरीय मुलाकात का सवाल ही पैदा नहीं होता.

रजाई ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तव में रिश्तों में सुधार चाहता है तो उसे सबसे पहले विश्वास बहाली के कदम उठाने होंगे. इसी क्रम में उन्होंने अमेरिका में फ्रीज की गई लगभग 24 अरब डॉलर की ईरानी संपत्तियों को जारी करने की मांग रखी. उनके अनुसार यह धन ईरान का है और इसे वापस करना ट्रंप प्रशासन की नीयत की वास्तविक परीक्षा होगी. ईरान का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच विश्वास का माहौल बनाने में मदद मिल सकती है.

ईरानी नेतृत्व ने यह भी कहा कि अमेरिका को इजरायल के प्रभाव से स्वतंत्र होकर निर्णय लेने चाहिए, आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देनी चाहिए और ईरान के अधिकारों को स्वीकार करना चाहिए. तेहरान का कहना है कि जब तक इन मुद्दों पर ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक किसी भी राजनीतिक या कूटनीतिक सफलता की उम्मीद करना मुश्किल है.

इस बीच ईरान ने सुरक्षा और सैन्य मोर्चे पर भी कड़ा रुख अपनाया है. मोहसिन रजाई ने चेतावनी दी कि यदि वार्ता असफल होती है और ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति जारी रहती है, तो संघर्ष का विस्तार किया जा सकता है. उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में ईरान हिंद महासागर, बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य, लाल सागर और भूमध्य सागर तक सैन्य गतिविधियां बढ़ा सकता है. साथ ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है.

यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पश्चिम एशिया में किसी नए बड़े संघर्ष को लेकर चिंतित है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चेतावनियां दोनों देशों के बीच बढ़ती अविश्वास की खाई को दर्शाती हैं.

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी ट्रंप की मुलाकात संबंधी टिप्पणी को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल इच्छाएं व्यक्त करने से समाधान नहीं निकलता और सभी पक्षों को वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए. उनके अनुसार वर्तमान हालात किसी शिखर वार्ता के लिए अनुकूल नहीं हैं.

गौरतलब है कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मोजतबा खामेनेई ने देश की सर्वोच्च जिम्मेदारी संभाली है. रिपोर्टों के अनुसार पूर्व सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद मार्च में मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाया गया था. सुरक्षा कारणों से वह अब तक सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई दिए हैं और देश के प्रमुख मामलों का संचालन सीमित दायरे में कर रहे हैं.

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सर्वोच्च नेतृत्व की गतिविधियों को नियंत्रित रखा जा रहा है. ऐसे में ट्रंप और मोजतबा खामेनेई के बीच संभावित मुलाकात की चर्चाओं पर फिलहाल पूर्ण विराम लग गया है.

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ता अपनाकर गतिरोध खत्म कर पाएंगे या फिर बयानबाजी और टकराव की राजनीति संबंधों को और अधिक जटिल बना देगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-