आईपीएल के मंच पर गूंजी भारतीय शास्त्रीय संगीत की धुनें, वायलिन बहनों रागिनी-नंदिनी शंकर ने रचा यादगार इतिहास

आईपीएल के मंच पर गूंजी भारतीय शास्त्रीय संगीत की धुनें, वायलिन बहनों रागिनी-नंदिनी शंकर ने रचा यादगार इतिहास

प्रेषित समय :21:29:42 PM / Thu, Jun 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

धर्मशाला. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को आमतौर पर चौकों-छक्कों, रोमांचक मुकाबलों और दर्शकों के उत्साह के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में धर्मशाला में आयोजित प्लेऑफ मुकाबले के दौरान क्रिकेट और संगीत का ऐसा संगम देखने को मिला जिसने हजारों दर्शकों के दिलों को छू लिया. वायलिन वादक बहनें रागिनी शंकर और नंदिनी शंकर ने अपने संगीत समूह “ताराना” के माध्यम से आईपीएल प्लेऑफ के दौरान लाइव प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नए और विशाल मंच पर पहुंचाया. उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि संगीत और खेल दोनों में लोगों को जोड़ने और भावनात्मक रूप से एक साथ लाने की अद्भुत शक्ति होती है.

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेले गए महत्वपूर्ण मुकाबले के मध्यांतर में दोनों बहनों ने हजारों दर्शकों के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया. स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने न केवल उनकी प्रस्तुति का आनंद लिया बल्कि उनके साथ गुनगुनाकर इस अनुभव को और भी यादगार बना दिया. रोशनी, आतिशबाजी, क्रिकेट के रोमांच और हजारों प्रशंसकों की मौजूदगी के बीच भारतीय शास्त्रीय संगीत की धुनों ने एक ऐसा माहौल बनाया जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

रागिनी शंकर ने इस अनुभव को अपने जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि क्रिकेट और संगीत दोनों ही लोगों को जोड़ने की अद्भुत क्षमता रखते हैं. उनके अनुसार उस शाम स्टेडियम में केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं चल रही थी, बल्कि वहां खुशी, उत्साह और सामूहिक भावनाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा था. उन्होंने कहा कि इतने बड़े मंच पर प्रदर्शन करना और दर्शकों की भावनाओं को सीधे महसूस करना उनके लिए अत्यंत भावुक अनुभव था.

रागिनी ने बताया कि आमतौर पर स्टेडियमों को खेल और दर्शकों के शोर-उत्साह से जोड़ा जाता है, लेकिन उस दिन संगीत भी उत्सव का अभिन्न हिस्सा बन गया. उन्होंने कहा कि जब हजारों लोग वायलिन की धुनों के साथ गाने गाने लगे और प्रस्तुति का हिस्सा बन गए, तब उन्हें महसूस हुआ कि संगीत की भाषा वास्तव में सार्वभौमिक होती है. चाहे व्यक्ति शास्त्रीय संगीत का नियमित श्रोता हो या नहीं, अच्छी प्रस्तुति हर किसी के दिल तक पहुंच सकती है.

दूसरी ओर नंदिनी शंकर ने भी इस अवसर को अविस्मरणीय बताया. उनके अनुसार क्रिकेट और संगीत दोनों भारत की लोकप्रिय सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं और जब दोनों का मेल होता है तो एक अनूठा वातावरण बनता है. उन्होंने कहा कि स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का उत्साह चरम पर था. हर ओर जयकारे, गीत और ऊर्जा दिखाई दे रही थी. ऐसे माहौल में प्रदर्शन करना किसी भी कलाकार के लिए विशेष अनुभव होता है.

नंदिनी ने कहा कि जब उन्होंने प्रस्तुति शुरू की तो उन्हें यह एहसास नहीं था कि दर्शक इतनी गर्मजोशी से प्रतिक्रिया देंगे. लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, पूरा स्टेडियम संगीत के साथ जुड़ता चला गया. उन्होंने कहा कि दर्शकों का हर सुर के साथ गुनगुनाना और प्रतिक्रिया देना यह दर्शाता है कि भारतीय संगीत की जड़ें कितनी गहरी हैं और लोग उससे कितना जुड़ाव महसूस करते हैं.

रागिनी और नंदिनी शंकर केवल सफल कलाकार ही नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक समृद्ध विरासत की प्रतिनिधि भी हैं. दोनों प्रसिद्ध वायलिन वादक और पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित डॉ. एन. राजम की पौत्रियां हैं. डॉ. राजम को भारतीय शास्त्रीय संगीत में वायलिन को नई पहचान देने और उसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है. ऐसे प्रतिष्ठित संगीत परिवार से आने वाली इन दोनों कलाकारों के लिए विरासत को आगे बढ़ाना गर्व और जिम्मेदारी दोनों का विषय है.

दोनों बहनों का मानना है कि परंपरा और आधुनिकता को एक साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है. वे भारतीय शास्त्रीय संगीत की मूल भावना को बनाए रखते हुए उसे नए मंचों और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं. आईपीएल जैसे विशाल खेल आयोजन में प्रस्तुति देना इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे ऐसे दर्शक भी शास्त्रीय संगीत के संपर्क में आते हैं जो सामान्य परिस्थितियों में शायद किसी शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में न जाएं.

संगीत विशेषज्ञों का भी मानना है कि आज के दौर में शास्त्रीय संगीत को नए मंचों पर प्रस्तुत करना आवश्यक हो गया है. इससे न केवल नई पीढ़ी का जुड़ाव बढ़ता है बल्कि कला के प्रति रुचि भी विकसित होती है. आईपीएल जैसे लोकप्रिय मंच पर रागिनी और नंदिनी की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल सभागारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भी उतना ही प्रभावशाली हो सकता है.

इस प्रस्तुति की एक और विशेषता यह रही कि इसमें देशभक्ति और प्रेरणा से जुड़े लोकप्रिय गीतों की धुनों को वायलिन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. इन धुनों ने स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया. खेल के रोमांच के बीच संगीत ने एक ऐसा क्षण निर्मित किया जिसने प्रतियोगिता को उत्सव में बदल दिया.

रागिनी और नंदिनी शंकर की यह प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय संगीत की नई संभावनाओं का प्रतीक बनकर उभरी है. उन्होंने यह दिखाया कि परंपरा को आधुनिक मंचों के साथ जोड़कर न केवल उसकी लोकप्रियता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि उसे नई पीढ़ियों तक भी पहुंचाया जा सकता है. धर्मशाला के स्टेडियम में गूंजी वायलिन की धुनों ने यह साबित कर दिया कि कला की कोई सीमा नहीं होती और जब संगीत और खेल साथ आते हैं तो एक ऐसा अनुभव जन्म लेता है जो लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-