इंदौर. महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई में आय से अधिक संपत्ति का बड़ा खुलासा हुआ है. लोकायुक्त विभाग द्वारा की गई छापामार कार्रवाई में अब तक लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और 25 लाख रुपये मूल्य का सोना बरामद होने की जानकारी सामने आई है. प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कंडवाल की कुल संपत्ति उनके पूरे सेवाकाल में प्राप्त सरकारी वेतन की तुलना में लगभग 300 गुना अधिक है. मामले ने प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में सनसनी फैला दी है.
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान लक्ष्मीनारायण कंडवाल के बैंक खातों और निवेश संबंधी दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल की गई. इसी क्रम में बैंक ऑफ इंडिया की सांठा बाजार शाखा में मौजूद उनके बैंक लॉकर को खुलवाया गया. लॉकर की तलाशी में करीब 25 लाख रुपये मूल्य का सोना बरामद हुआ. इसके अलावा अधिकारियों को एक अन्य बैंक खाते की भी जानकारी मिली, जिसे तत्काल प्रभाव से सीज करा दिया गया है. खाते में जमा राशि और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है.
जांच में यह भी सामने आया है कि कंडवाल ने कथित रूप से अवैध कमाई के जरिए इंदौर की स्कीम-103 में करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से एक चार मंजिला आलीशान भवन का निर्माण कराया था. लगभग चार वर्ष पहले तैयार हुई इस इमारत का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था. भवन के भूतल पर उनके पुत्रों द्वारा एक डिपार्टमेंटल स्टोर संचालित किया जा रहा था, जबकि दूसरी मंजिल को जिम संचालन के लिए किराये पर दिया गया था. अधिकारियों को दी गई जानकारी के अनुसार जिम से प्रतिमाह लगभग एक लाख रुपये किराया प्राप्त होता था, जबकि डिपार्टमेंटल स्टोर से भी करीब एक लाख रुपये मासिक आय होने का दावा किया गया है. इस प्रकार केवल इन दोनों स्रोतों से ही करीब ढाई लाख रुपये प्रतिमाह की आमदनी होने की बात सामने आई है.
लोकायुक्त जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि कंडवाल ने सबसे अधिक निवेश धार जिले में किया. उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र तारापुर के अलावा बनेड़िया और बेकल्या क्षेत्रों में भी बड़ी मात्रा में जमीनें खरीदीं. खास बात यह है कि अपने लगभग 30 वर्षों के सेवाकाल में वे कभी भी धार जिले में पदस्थ नहीं रहे, फिर भी वहां बड़े पैमाने पर संपत्ति अर्जित की गई. इसी असामान्य निवेश पैटर्न ने जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया था.
सूत्रों के अनुसार लोकायुक्त को कंडवाल की संपत्तियों और निवेशों को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद गोपनीय जांच शुरू की गई. जांच के दौरान जमीनों, प्लॉटों और अन्य निवेशों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए. इसके बाद उनके विभिन्न ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की गई. तलाशी के दौरान अधिकारियों ने घर में मौजूद दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों का डेटा भी खंगाला है.
हालांकि छापे के दौरान घर से बड़ी मात्रा में नकदी या अतिरिक्त कीमती आभूषण नहीं मिले, लेकिन दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर संपत्तियों का बड़ा नेटवर्क सामने आया है. लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि कंडवाल ने प्रदेश के अन्य जिलों या राज्यों में भी कहीं निवेश किया है या नहीं. जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

