विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर छत्तीसगढ़ में बड़ा अभियान: 20 बच्चों का रेस्क्यू, उरला की फैक्ट्री में मिले 9 नाबालिग

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर छत्तीसगढ़ में बड़ा अभियान: 20 बच्चों का रेस्क्यू, उरला की फैक्ट्री में मिले 9 नाबालिग

प्रेषित समय :20:44:57 PM / Fri, Jun 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रायपुर. विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई. इस दौरान रायपुर, बिलासपुर और रेलवे स्टेशनों से कुल 20 बच्चों को रेस्क्यू कर संरक्षण में लिया गया.

राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक लोहे की फैक्ट्री में औचक निरीक्षण के दौरान 9 नाबालिग बच्चे काम करते पाए गए. आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में हुई कार्रवाई में बच्चों को तत्काल सुरक्षित निकालकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया.

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली और पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं. बच्चों ने बताया कि उन्हें बिहार के एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था. मामले में बाल तस्करी और अवैध श्रम से जुड़े पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है. बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

वहीं, बिलासपुर में आरपीएफ की कार्रवाई के दौरान 7 बच्चों को और रायपुर जीआरपी द्वारा 4 बच्चों को संरक्षण में लिया गया. इस तरह पूरे प्रदेश में कुल 20 बच्चों को बाल श्रम और संभावित शोषण की स्थिति से मुक्त कराया गया.

प्रकरण में बच्चों से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने और उनके साथ शोषण के आरोपों के आधार पर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है. संबंधित ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है.

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है. आयोग बाल श्रम और बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है.

रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को परामर्श, चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है ताकि उनका भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-