नई दिल्ली. देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है और भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा आकलन के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में मानसून के और आगे बढ़ने की संभावना है. मौसम विभाग ने कहा है कि वर्तमान परिस्थितियां मानसून के विस्तार के लिए अनुकूल बनी हुई हैं, जिसके चलते महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार तथा पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं. वहीं केरल, कर्नाटक, गोवा और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी वर्षा होने का अनुमान जताया गया है.
मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 4 जून को केरल में प्रवेश किया था. सामान्य तौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी शुरुआत तीन दिन की देरी से हुई. हालांकि केरल पहुंचने के बाद मानसून ने तेजी दिखाई और पश्चिमी तट के बड़े हिस्से को कवर करते हुए 5 जून तक गोवा पहुंच गया. इसके बाद 6 जून को मानसून ने महाराष्ट्र में दस्तक दी, लेकिन आगे बढ़ने की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों और अन्य मौसमी प्रणालियों ने मानसूनी हवाओं के सामान्य प्रवाह को प्रभावित किया, जिससे इसकी प्रगति पर अस्थायी असर पड़ा.
आईएमडी के 12 जून के बुलेटिन के अनुसार मानसून अब उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पूरे क्षेत्र, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, पश्चिम बंगाल, बिहार तथा ओडिशा और झारखंड के कई क्षेत्रों तक पहुंच चुका है. इससे पूर्वी भारत में मानसूनी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है और कई स्थानों पर अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून और तेजी से आगे बढ़ सकता है.
महाराष्ट्र में मानसून की स्थिति पर पूरे देश की नजर बनी हुई है क्योंकि मुंबई सहित राज्य के कई बड़े शहर अभी मानसून की औपचारिक दस्तक का इंतजार कर रहे हैं. मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल तटीय महाराष्ट्र के हरनाई और आंतरिक क्षेत्र के सोलापुर से होकर गुजर रही है. यह स्थिति संकेत देती है कि मानसून मुंबई और आसपास के इलाकों के बेहद करीब पहुंच चुका है. अगले दो से तीन दिनों में मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पालघर और रायगढ़ समेत कोंकण क्षेत्र के अन्य हिस्सों में मानसून की औपचारिक एंट्री हो सकती है.
हालांकि मुंबई के लिए 16 जून तक किसी विशेष बारिश चेतावनी की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मौसम विभाग ने 12 से 18 जून के बीच कोंकण और गोवा क्षेत्र में छिटपुट से लेकर व्यापक वर्षा की संभावना जताई है. इसी अवधि में मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. विभाग ने कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना व्यक्त की है. दूसरी ओर मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों में अभी भी लू जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं. मराठवाड़ा में 12 और 13 जून तथा विदर्भ में 16 जून तक गर्म हवाओं का असर बना रह सकता है.
दक्षिण भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय है. केरल में लगातार बारिश के चलते कई जिलों में जलभराव और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं. कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में भी भारी वर्षा जारी है और प्रशासन ने निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है. गोवा में पर्यटन गतिविधियों के बीच मानसून ने जोर पकड़ा है और अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित हो रही हैं तथा अनेक जिलों में अच्छी वर्षा की उम्मीद है.
पूर्वी भारत में ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में मानसून का असर स्पष्ट दिखाई देने लगा है. ओडिशा के कई जिलों में बारिश ने तापमान में गिरावट ला दी है और किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं. पश्चिम बंगाल में भी कई स्थानों पर मानसूनी वर्षा दर्ज की गई है. बिहार और झारखंड में लंबे समय से गर्मी और उमस से परेशान लोगों को राहत मिली है तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों में तेजी आने लगी है. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में इन राज्यों में बारिश का दायरा और बढ़ेगा.
पूर्वोत्तर भारत में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है. कुछ क्षेत्रों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है. स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.
उत्तर भारत में मानसून की औपचारिक एंट्री अभी बाकी है, लेकिन प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं. दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी है. इससे तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि उमस अभी भी लोगों को परेशान कर रही है. मौसम विभाग के अनुसार यदि मानसून की वर्तमान गति बनी रहती है तो उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी जल्द मानसूनी परिस्थितियां बनने लगेंगी.
कृषि क्षेत्र के लिए मानसून की प्रगति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून के शुरुआती दिनों में देशभर में वर्षा सामान्य से कम रही है और मानसून की गति कुछ धीमी पड़ी थी. खरीफ फसलों की बुवाई के लिए जून का अंतिम सप्ताह और जुलाई का पहला पखवाड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण होगा. पर्याप्त और समय पर बारिश होने पर धान, सोयाबीन, कपास, मक्का और दालों की खेती को बड़ा लाभ मिल सकता है.
इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने 2026 के मानसून सीजन के दौरान एल-नीनो प्रभाव के मजबूत होने की संभावना भी जताई है. विशेषज्ञों के अनुसार एल-नीनो के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में वर्षा का वितरण प्रभावित हो सकता है और कहीं अधिक तो कहीं कम बारिश देखने को मिल सकती है. इसके बावजूद फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की प्रगति सामान्य बनी हुई है और आने वाले दिनों में इसके और अधिक सक्रिय होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. मौसम विभाग ने लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों पर नजर रखने तथा भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के दौरान आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

