लंदन। एयर इंडिया की उड़ान एआई-171 दुर्घटना को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन इस भीषण हादसे से प्रभावित परिवारों का दर्द अब भी कम नहीं हुआ है। ब्रिटेन में रहने वाले पीड़ित परिवार आज भी हादसे के कारणों, जांच की पारदर्शिता और न्याय की उम्मीद में जवाब तलाश रहे हैं। हादसे की पहली बरसी पर समुदाय के नेताओं और पीड़ित परिवारों ने स्पष्ट किया है कि उनके जख्म अभी भी भरे नहीं हैं और वे चाहते हैं कि जांच एजेंसियां तथा संबंधित संस्थाएं उन्हें स्पष्ट जानकारी और न्याय उपलब्ध कराएं।
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की उड़ान एआई-171 उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित कुल 260 लोगों की मौत हो गई थी। जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी इस दुर्घटना में अपनी जान गंवाई थी। यह हादसा भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के लिए एक बड़ी त्रासदी बनकर सामने आया था।
ब्रिटेन के लीसेस्टर शहर में रहने वाले सामुदायिक नेता और संकट प्रबंधन सलाहकार संजीव पटेल का कहना है कि हादसे की खबर ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया था। लीसेस्टर में बड़ी संख्या में गुजराती मूल के परिवार रहते हैं और उनमें से कई सीधे तौर पर इस दुर्घटना से प्रभावित हुए थे। उनके अनुसार दुर्घटना की खबर मिलते ही पूरा समुदाय सदमे, अविश्वास और गहरे दुख में डूब गया था।
संजीव पटेल, जो पिछले एक वर्ष से कई पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं, का कहना है कि परिवार अब भी मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार की त्रासदी से उबरने के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की जा सकती। कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए, जबकि अनेक लोग आज भी मानसिक आघात से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को सबसे अधिक आवश्यकता स्पष्ट जवाब, पारदर्शिता और न्याय की है ताकि वे जीवन में आगे बढ़ने की दिशा में कदम उठा सकें।
हादसे के बाद लीसेस्टर स्थित बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर पीड़ित परिवारों के लिए सांत्वना और प्रार्थना का केंद्र बन गया था। यहां विभिन्न धर्मों के लोगों ने एक साथ श्रद्धांजलि सभाओं में हिस्सा लिया और मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। समुदाय ने प्रभावित परिवारों को भावनात्मक सहारा देने का प्रयास किया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि वे इस कठिन समय में अकेले नहीं हैं।
हादसे के एकमात्र जीवित बचे यात्री विश्वासकुमार रमेश की स्थिति भी अभी सामान्य नहीं हो सकी है। संजीव पटेल, जो उनके पारिवारिक मित्र हैं, पिछले एक वर्ष से उनकी सहायता कर रहे हैं। उनके अनुसार विश्वासकुमार अभी भी गंभीर मानसिक आघात से गुजर रहे हैं। वे सामाजिक सहायता पर निर्भर हैं और बिना सहयोग के घर से बाहर निकलने में भी कठिनाई महसूस करते हैं। चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक उपचार का सिलसिला अब भी जारी है।
एयर इंडिया ने भी बयान जारी कर कहा है कि वह इस दुर्घटना से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी का कहना है कि पीड़ित परिवारों और जीवित बचे यात्री के प्रतिनिधियों के साथ रचनात्मक बातचीत जारी है तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हादसे की जांच अभी भी जारी है। अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार एक वर्ष के भीतर अंतिम जांच रिपोर्ट जारी करने का प्रयास किया जाता है, हालांकि जटिल मामलों में इसमें अधिक समय भी लग सकता है। ऐसे में पीड़ित परिवारों की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। उनका मानना है कि केवल सच्चाई सामने आने और जिम्मेदारियों के निर्धारण से ही उन्हें कुछ हद तक मानसिक शांति मिल सकेगी।
हादसे की पहली बरसी पर परिवारों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि समय बीतने के बावजूद उनका दर्द कम नहीं हुआ है। वे अब भी न्याय, जवाबदेही और पारदर्शिता की उम्मीद में हैं, ताकि अपने प्रियजनों की यादों के साथ जीवन की नई शुरुआत कर सकें।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

