नई दिल्ली। एक युवा उद्यमी की संघर्षभरी कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। महज 25 वर्ष की उम्र में लगभग एक करोड़ रुपये के कर्ज में फंसने वाले एक युवक ने ऑनलाइन मंच रेडिट पर अपनी आर्थिक स्थिति साझा करते हुए लोगों से सलाह मांगी है। रेस्टोरेंट व्यवसाय में असफलता के बाद भारी कर्ज के बोझ तले दबे इस युवक ने पूछा कि बिना नया ऋण लिए वह अपनी वित्तीय स्थिति को कैसे सुधार सकता है। उसकी पोस्ट पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी और अधिकांश ने उसे दोबारा उसी व्यवसाय में उतरने से बचने की सलाह दी।
रेडिट के इंडिया बिजनेस फोरम पर साझा की गई पोस्ट में युवक ने बताया कि वह पहले एक बीपीओ कंपनी में कार्यरत था। वर्ष 2021 से नौकरी करने के बाद कंपनी का एक बड़ा प्रोजेक्ट बंद होने के कारण उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसी दौरान उसकी रुचि खाद्य व्यवसाय की ओर बढ़ी और उसने अपना खुद का कैफे या रेस्टोरेंट शुरू करने का सपना देखा। वर्ष 2023 में उसने रिश्तेदारों से दो लाख रुपये उधार लेकर एक छोटा क्लाउड किचन और कैफे शुरू किया।
युवक के अनुसार शुरुआती दौर में व्यवसाय अच्छा चला और ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ी। बढ़ती मांग को देखते हुए उसने व्यवसाय का विस्तार करना शुरू किया। पहले अतिरिक्त जगह ली गई और बाद में बड़े स्थान पर शिफ्ट होने का निर्णय लिया गया। हालांकि विस्तार की पूरी प्रक्रिया लगातार उधार लिए गए धन पर आधारित थी। धीरे-धीरे दो लाख रुपये से शुरू हुआ यह कारोबार करीब एक करोड़ रुपये के कर्ज तक पहुंच गया।
उसने बताया कि कुल कर्ज में लगभग 45 लाख रुपये का मॉर्गेज लोन शामिल था, जबकि 40 से 45 लाख रुपये निजी साहूकारों और उधारदाताओं से लिए गए थे। सबसे बड़ी समस्या इन निजी ऋणों पर लगने वाला भारी ब्याज था। कुछ ऋणदाताओं ने प्रति माह 10 प्रतिशत तक ब्याज लिया, जबकि कुछ ने प्रतिदिन मूलधन का एक प्रतिशत चुकाने जैसी शर्तें रखीं। परिणामस्वरूप व्यवसाय से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा ब्याज और किस्तों में ही चला जाता था।
युवक ने बताया कि रेस्टोरेंट में ग्राहकों की कमी नहीं थी और आय भी हो रही थी, लेकिन कर्ज का दबाव इतना अधिक हो गया कि व्यवसाय को संभालना असंभव हो गया। आर्थिक तनाव का असर उसकी सेहत पर भी पड़ा और उसका वजन कम समय में लगभग 25 किलोग्राम घट गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि परिवार के सदस्य भी चिंतित हो गए।
बाद में उसकी मां के परिवार ने हस्तक्षेप करते हुए लगभग 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिससे कुल कर्ज एक करोड़ रुपये से घटकर 70 लाख रुपये रह गया। हालांकि यह मदद एक शर्त के साथ दी गई थी कि युवक अपना रेस्टोरेंट व्यवसाय पूरी तरह बंद कर देगा। वर्तमान में उसके ऊपर लगभग 70 लाख रुपये का कर्ज बाकी है, जिसमें केवल मॉर्गेज की मासिक ईएमआई ही 67 हजार रुपये है।
युवक ने बताया कि उसकी मां की मासिक आय 15 हजार रुपये और बहन की आय 36 हजार रुपये है। वहीं उसका सिबिल स्कोर भी खराब हो चुका है। उसके पास कुछ रसोई उपकरण अभी भी बचे हुए हैं, जिन्हें बेचा नहीं जा सका है। उसने आगे की योजना के तौर पर बहुत छोटे स्तर पर दो लाख रुपये की लागत से एक नया कैफे या फास्ट फूड आउटलेट शुरू करने की इच्छा जताई। इसके साथ थ्रिफ्ट स्टोर का मॉडल जोड़कर अतिरिक्त आय अर्जित करने का विचार भी सामने रखा।
हालांकि सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उसकी इस योजना का समर्थन करने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी। सबसे अधिक पसंद किए गए एक कमेंट में लिखा गया कि जीवन में एक ही गलती दो बार नहीं दोहरानी चाहिए। कई लोगों ने कहा कि पहले के अनुभव से सीख लेकर कर्ज और खर्च बढ़ाने के बजाय बिक्री और नकदी प्रवाह बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
एक अन्य उपयोगकर्ता, जिसने स्वयं गोवा में बार व्यवसाय चलाने का अनुभव साझा किया, ने युवक को सलाह दी कि वह फिलहाल किसी स्थिर कॉर्पोरेट नौकरी की तलाश करे और सबसे पहले कर्ज कम करने पर ध्यान दे। उसका मानना था कि भारत में वर्तमान समय में खाद्य व्यवसाय बेहद प्रतिस्पर्धी हो चुका है और छोटे फूड स्टॉल या रेहड़ी मॉडल कई बार बड़े रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन से अधिक सफल साबित हो रहे हैं। फिर भी उसने स्पष्ट रूप से सलाह दी कि जब तक कर्ज काफी हद तक समाप्त न हो जाए, तब तक किसी नए व्यवसाय में निवेश करना जोखिम भरा होगा।
कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर अधिकांश लोगों की राय यही रही कि युवक को पहले आर्थिक स्थिरता हासिल करनी चाहिए, नियमित नौकरी के माध्यम से कर्ज कम करना चाहिए और उसके बाद ही किसी नए व्यावसायिक प्रयास पर विचार करना चाहिए। यह कहानी उद्यमिता के सपनों और अनियोजित विस्तार के खतरों दोनों की एक महत्वपूर्ण सीख बनकर सामने आई है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

