जबलपुर। एमपी के जबलपुर में यहूदियों के कब्रिस्तान पर भू-माफिया की नजर है। करीब 100 साल पहले ब्रिटिश सरकार ने रानीताल श्मशान घाट के पास यहूदियों को बसाया था। कब्रिस्तान के लिए 5 हजार वर्ग फीट जमीन भी दी थी। उस वक्त यहां 200 परिवार रहा करते थे लेकिन आजादी के बाद ज्यादातर यहूदी इजराइल जाकर बस गए।
अब शहर में इनके केवल 4 परिवार ही बचे हैं। उनका कहना है कि यहां मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का एकमात्र कब्रिस्तान है। इसकी जमीन पर भू-माफिया अवैध कब्जा करना चाह रहा है। 3 पीढिय़ों से दफन पूर्वजों की कब्रों के ताबूत तोड़ दिए गए। कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल टूट चुकी है। गेट भी चोरी हो गया है। इसकी जानकारी तब लगी, जब एक बुजुर्ग कब्रिस्तान पहुंचे। उन्होंने मामला एसडीएम कोर्ट में लगाया। फैसला यहूदियों के पक्ष में आया तो भू-माफिया जिला कोर्ट पहुंच गए। हालांकि, वहां भी फैसला बरकरार रखा गया। जिस व्यक्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगा है, उसका कहना है कि यह पैतृक जमीन है। कब्रिस्तान की जमीन पर तो बस्ती बसी है। उसने हाईकोर्ट में 3 जून 2026 को याचिका दायर कर दी है।
प्रेयर करने गए तो तोडफ़ोड़ का पता चला-
जबलपुर के सिविल लाइन में रहने वाले डेनियल इब्राहिम वर्ष 2021 में प्रार्थना करने के लिए रानीताल स्थित आगा चौक पर इस कब्रिस्तान गए थे। उन्होंने देखा कि बाउंड्रीवॉल कई जगह से टूटी है, गेट भी गायब है। पास में ही रहने वाला लखन केवट उस पर कब्जा करने की कोशिश में जुटा है। डेनियल ने इसकी शिकायत लॉर्डगंज थाना पुलिस और एसडीएम से कर दी। प्रशासन की जांच में सामने आया कि कब्रिस्तान की जमीन का रकबा नंबर 407/2 शासकीय अभिलेखों में दर्ज है, जिसे कई दशक पहले कब्रिस्तान के लिए दिया गया था। लखन केवट की जमीन का रकबा नंबर 407/1 है। 14 अप्रैल 2025 को एसडीएम कोर्ट ने जमीन को यहूदी समुदाय की मानते हुए कब्जा दिलाने का आदेश दिया। साथ ही केवट परिवार को भविष्य में कब्रिस्तान की जमीन पर दखलअंदाजी नहीं करने और यहूदी समुदाय को परेशान नहीं करने की हिदायत भी दी।
यहूदी समुदाय के कार्यक्रम में उठाया विवाद-
5 जनवरी 2026 को कब्रिस्तान में यहूदी समुदाय का एक कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम के दौरान लखन केवट अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचा और विवाद करने लगा। इसकी शिकायत पुलिस से की गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने केवट परिवार को समझाइश देते हुए हिदायत दी। इसके बाद उसने एसडीएम और जिला कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
स्वतंत्रता सेनानियों की भी कब्रें होने का दावा-
डेनियल इब्राहिम ने बताया कि रानीताल स्थित आगा चौक के इस कब्रिस्तान में उनके परिवार की तीन पीढिय़ां आज भी दफन हैं। पूर्वजों की इन कब्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इनमें कुछ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे हैं। ब्रिटिशकालीन यह कब्रिस्तान ऐतिहासिक धरोहर है।
केवट परिवार ने कहा- हमारे पास पूरे दस्तावेज-
हाईकोर्ट में यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा का कहना है कि कुछ लोग कब्रिस्तान की जमीन अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। भू-माफिया को लग रहा है कि कब्रिस्तान की देखरेख करने वाला कोई नहीं बचा है, इसलिए जमीन पर कब्जा किया जा सकता है। वहीं, लखन केवट का कहना है कि यह हमारी पैतृक जमीन है। इसके पूरे दस्तावेज हैं। हमने तहसीलदार को सीमांकन के लिए एक पत्र भी लिखा है। सीमांकन के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर यह जमीन हमारी है। जो जमीन कब्रिस्तान के लिए यहूदियों को दी गई थी, उस पर बस्ती बसी है। जिस जमीन को यहूदी अपनी बता रहे हैं, वह सालों से हमारे पास है। उस जमीन के खसरा, बही से लेकर पूरे दस्तावेज हैं। पूरे सबूत हाईकोर्ट के सामने रखेंगे।
महापौर बोले- फैसले के बाद करेंगे क ार्यवाही-
जबलपुर महापौर जगत बहादुर अन्नू ने कहा कि रानीताल के पास स्थित कब्रिस्तान यहूदी समुदाय का है। मामला एसडीएम कोर्ट और जिला कोर्ट के बाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय आना बाकी है। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद नगर निगम अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करेगा।




