नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने NEET-SS 2025 काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान तमिलनाडु में खाली रह गई 151 सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल सीटों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन रिक्त सीटों का पूरा विवरण तत्काल स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) को उपलब्ध कराए, ताकि उन्हें अखिल भारतीय मेरिट सूची के आधार पर योग्य अभ्यर्थियों से भरा जा सके. इस आदेश से देशभर के मेडिकल उम्मीदवारों के लिए इन सीटों पर प्रवेश का रास्ता खुल गया है.
न्यायमूर्ति पामिडिघंटम श्री नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की खंडपीठ ने यह आदेश उस याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया, जिसमें तमिलनाडु राज्य कोटे के अंतर्गत खाली रह गई डीएम और एम.सीएच. सुपर स्पेशियलिटी सीटों को ऑल इंडिया कोटा में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने से मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को नुकसान होगा, इसलिए इन सीटों को राष्ट्रीय स्तर की मेरिट सूची के माध्यम से भरा जाना चाहिए.
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह मामला पहले दिए गए एक फैसले के अनुरूप निपटाया जा सकता है. उस फैसले में तमिलनाडु सरकार को सेवा में कार्यरत डॉक्टरों के लिए आरक्षित सीटों को भरने की अनुमति दी गई थी. साथ ही यह भी व्यवस्था दी गई थी कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी यदि सीटें खाली रह जाती हैं तो केंद्र सरकार उन्हें अखिल भारतीय मेरिट सूची के आधार पर भर सकती है.
इसी कानूनी आधार को अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि वह राज्य कोटे में खाली पड़ी 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटों की जानकारी डीजीएचएस को उपलब्ध कराए. इसके बाद केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकरण इन सीटों पर राष्ट्रीय मेरिट सूची के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को प्रवेश दे सकेंगे.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी अनुरोध किया था कि राज्य कोटे की सभी रिक्त सुपर स्पेशियलिटी सीटों को ऑल इंडिया कोटा में शामिल करते हुए NEET-SS 2025 काउंसलिंग के दूसरे चरण में जोड़ा जाए. वैकल्पिक रूप से उन्होंने अतिरिक्त काउंसलिंग राउंड आयोजित करने की मांग भी की थी, ताकि देशभर के पात्र अभ्यर्थियों को इन सीटों पर आवेदन का अवसर मिल सके.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय ने अदालत को बताया कि वर्तमान काउंसलिंग प्रक्रिया में लागू कट-ऑफ को बरकरार रखा जाएगा, जब तक कि उसमें किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता महसूस न हो. उन्होंने कहा कि सीटों को भरने की प्रक्रिया स्थापित नियमों और मेरिट के आधार पर ही पूरी की जाएगी.
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है. अदालत ने कहा कि इस आदेश को भविष्य के मामलों में सामान्य मिसाल या बाध्यकारी नजीर के रूप में नहीं माना जाएगा. प्रत्येक मामले का निर्णय उसकी परिस्थितियों और कानूनी तथ्यों के आधार पर किया जाएगा.
कानूनी और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटें खाली रहने से न केवल संस्थानों की क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में रिक्त सीटों को राष्ट्रीय मेरिट के आधार पर भरने का निर्णय स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक माना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब तमिलनाडु राज्य कोटे में खाली पड़ी 151 सुपर स्पेशियलिटी सीटों पर देशभर के पात्र उम्मीदवारों को प्रवेश मिलने की संभावना बढ़ गई है. इससे उन अभ्यर्थियों को भी अवसर मिलेगा जो उच्च मेरिट के बावजूद सीटों की कमी के कारण प्रवेश से वंचित रह गए थे. चिकित्सा शिक्षा जगत में इस फैसले को एक महत्वपूर्ण राहत और व्यावहारिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

