मुंबई पर चढ़ा बेंगलुरु के स्वाद का जादू, बेन्ने डोसा से फिल्टर कॉफी तक बदल रही है फूड कल्चर की तस्वीर

मुंबई पर चढ़ा बेंगलुरु के स्वाद का जादू, बेन्ने डोसा से फिल्टर कॉफी तक बदल रही है फूड कल्चर की तस्वीर

प्रेषित समय :20:21:34 PM / Tue, Jun 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी और बेंगलुरु की सुकून भरी कैफे संस्कृति के बीच एक दिलचस्प मेल दिखाई देने लगा है. कभी दक्षिण भारतीय भोजन का मतलब मुंबई में केवल पारंपरिक उडुपी रेस्तरां, इडली-सांभर और मसाला डोसा तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. बेंगलुरु के लोकप्रिय कैफे, दरशिनी और टिफिन संस्कृति ने मुंबई के खानपान जगत में नई जगह बना ली है. चर्चगेट में द रामेश्वरम कैफे की एंट्री और बेंगलुरु के चर्चित कैफे ब्रांड्स को लेकर बढ़ती दिलचस्पी इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है.

दरअसल, मुंबई केवल बेंगलुरु का खाना नहीं अपना रही, बल्कि उसके पूरे फूड कल्चर को गले लगा रही है. यह संस्कृति सुबह के जल्दी नाश्ते, खड़े होकर भोजन करने, फिल्टर कॉफी के साथ बातचीत और दिनभर उपलब्ध आरामदायक भोजन के इर्द-गिर्द घूमती है. यही वजह है कि आज बेन्ने डोसा, केसरी बाथ, खारा बाथ, बिसी बेले भात और फिल्टर कॉफी जैसे व्यंजन मुंबई के फूड लवर्स की पसंद बनते जा रहे हैं.

खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद लोगों की जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया है. लोग अब केवल पेट भरने के लिए नहीं बल्कि अनुभव हासिल करने के लिए बाहर खाना पसंद कर रहे हैं. ऐसे में बेंगलुरु की कैफे संस्कृति, जो स्वाद, सादगी और आरामदायक माहौल का मिश्रण है, मुंबई के लोगों को खूब आकर्षित कर रही है.

बेंगलुरु की प्रसिद्ध दरशिनी संस्कृति भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है. दरशिनी ऐसे छोटे भोजनालय होते हैं जहां लोग जल्दी-जल्दी नाश्ता करते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. यह मॉडल मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी से काफी मेल खाता है. जैसे मुंबई में वड़ा पाव और सैंडविच का कल्चर है, वैसे ही बेंगलुरु में इडली, वडा और डोसा का त्वरित भोजन लोकप्रिय है. यही समानता दोनों शहरों को एक-दूसरे के और करीब ला रही है.

बेंगलुरु के भोजन की खासियत केवल स्वाद नहीं बल्कि उसकी सादगी और लगातार एक जैसी गुणवत्ता भी है. यहां के कैफे और टिफिन सेंटर ऐसे भोजन परोसते हैं जो हर उम्र के लोगों को पसंद आता है. यही कारण है कि मुंबई जैसे महानगर में भी इन व्यंजनों को तेजी से स्वीकार किया जा रहा है.

अगर बेंगलुरु के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों की बात करें तो बेन्ने डोसा सबसे ऊपर आता है. यह डोसा सामान्य मसाला डोसा से अलग होता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में मक्खन यानी 'बेन्ने' का उपयोग किया जाता है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम यह डोसा फिल्टर कॉफी के साथ एक बेहतरीन संयोजन बनाता है.

बेन्ने डोसा की सामग्री

चावल – 3 कप
उड़द दाल – 1 कप
मेथी दाना – 1 छोटा चम्मच
नमक – स्वादानुसार
सफेद मक्खन – आवश्यकतानुसार
तेल – थोड़ा सा

बेन्ने डोसा बनाने की विधि

चावल, उड़द दाल और मेथी दाना अलग-अलग धोकर लगभग छह घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद इन्हें पीसकर मुलायम घोल तैयार करें और रातभर खमीर उठने के लिए छोड़ दें. अगले दिन नमक मिलाएं. गर्म तवे पर थोड़ा तेल लगाकर पतला डोसा फैलाएं. ऊपर से भरपूर मात्रा में सफेद मक्खन डालें और दोनों तरफ सुनहरा होने तक सेंकें. नारियल चटनी और सांभर के साथ गरमागरम परोसें.

बेंगलुरु की पहचान फिल्टर कॉफी के बिना अधूरी मानी जाती है. दक्षिण भारतीय घरों और कैफे में इसकी विशेष जगह है. इसकी खुशबू और स्वाद इसे साधारण कॉफी से अलग बनाते हैं.

फिल्टर कॉफी की सामग्री

कॉफी पाउडर – 3 बड़े चम्मच
उबलता पानी – 1 कप
दूध – 2 कप
चीनी – स्वादानुसार

फिल्टर कॉफी बनाने की विधि

कॉफी फिल्टर में कॉफी पाउडर डालकर ऊपर से गर्म पानी डालें. धीरे-धीरे कॉफी डेकोक्शन नीचे जमा होगा. दूध को उबालें और उसमें आवश्यकतानुसार चीनी मिलाएं. एक कप में डेकोक्शन डालें और ऊपर से गर्म दूध मिलाएं. पारंपरिक तरीके से ऊंचाई से गिराकर झाग बनाएं और परोसें.

बिसी बेले भात भी बेंगलुरु और कर्नाटक का बेहद लोकप्रिय व्यंजन है. यह चावल, दाल और सब्जियों का पौष्टिक मिश्रण होता है जिसे मसालों के साथ पकाया जाता है.

बिसी बेले भात की सामग्री

चावल – 1 कप
अरहर दाल – ½ कप
गाजर, बीन्स, मटर – 1 कप
इमली का पानी – 2 बड़े चम्मच
बिसी बेले मसाला – 2 बड़े चम्मच
घी – 2 बड़े चम्मच
नमक – स्वादानुसार

बिसी बेले भात बनाने की विधि

चावल और दाल को अलग-अलग उबाल लें. सब्जियों को भी हल्का पका लें. एक बड़े बर्तन में दाल, चावल और सब्जियां मिलाएं. इसमें इमली का पानी, मसाला और नमक डालें. आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. ऊपर से घी का तड़का लगाकर परोसें.

फूड इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मुंबई में बेंगलुरु की फूड संस्कृति और अधिक मजबूत होगी. फिल्टर कॉफी बार, आधुनिक दरशिनी, टिफिन कैफे और क्षेत्रीय व्यंजनों पर आधारित नए रेस्तरां तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. सोशल मीडिया ने भी इस बदलाव को गति दी है. आज मुंबई का युवा वर्ग इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से देशभर के स्वादों से परिचित हो रहा है और नए अनुभवों को अपनाने के लिए उत्सुक है.

मुंबई और बेंगलुरु भले ही दो अलग-अलग शहर हों, लेकिन अच्छा भोजन दोनों को एक सूत्र में बांध रहा है. एक ओर मुंबई की ऊर्जा और दूसरी ओर बेंगलुरु की आरामदायक कैफे संस्कृति, दोनों मिलकर भारतीय खानपान की नई कहानी लिख रहे हैं. फिलहाल इतना तय है कि बेन्ने डोसा, फिल्टर कॉफी और टिफिन संस्कृति अब केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं रह गई है. मुंबई ने इन्हें अपना लिया है और यही इस नए फूड मूवमेंट की सबसे बड़ी सफलता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-