नई दिल्ली. नीट पुनर्परीक्षा से पहले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि उसके पास टेलीग्राम के कथित दुरुपयोग से जुड़े ऐसे सबूत हैं जो बेहद चौंकाने वाले हैं. वहीं टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को असंगत और अत्यधिक बताते हुए तत्काल राहत की मांग की. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने की अनुमति देते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 जून को दोपहर 2:30 बजे के लिए सूचीबद्ध किया है.
अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है. सरकार पिछले कई सप्ताह से इस मामले पर काम कर रही है और मई माह से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं. उन्होंने अदालत को बताया कि परीक्षा संबंधी गतिविधियों में शामिल कई टेलीग्राम चैनलों को बार-बार हटाए जाने के बावजूद वे नए रूप में दोबारा सक्रिय हो रहे थे.
केंद्र ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसा सामग्री और डिजिटल साक्ष्य सामने आया है, जिससे प्लेटफॉर्म के कथित दुरुपयोग की पुष्टि होती है. सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और अन्य एजेंसियों की ओर से लगातार इनपुट मिल रहे थे कि कुछ चैनलों के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक होने के दावे किए जा रहे हैं और अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूली जा रही है. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार अदालत के समक्ष विस्तृत तथ्य और आंकड़े प्रस्तुत करेगी, जो इस कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त होंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध सामग्री इतनी गंभीर है कि उसे देखकर कोई भी चिंतित हो सकता है. केंद्र का दावा है कि कई चैनलों पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्न उपलब्ध कराने के नाम पर धन की मांग की जा रही थी और यह गतिविधि लगातार जारी थी.
दूसरी ओर टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि कुछ लोगों की गलत गतिविधियों के आधार पर पूरे प्लेटफॉर्म को बंद नहीं किया जा सकता. उन्होंने अदालत को बताया कि टेलीग्राम एक जून से ही सरकार के निर्देशों का पालन कर रहा था और संबंधित सामग्री पर कार्रवाई भी की जा रही थी. ऐसे में 16 जून को अचानक प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता क्या थी, यह स्पष्ट नहीं है.
टेलीग्राम की ओर से कहा गया कि सरकार द्वारा भेजे गए ईमेल का जवाब तत्काल दिया गया था और आवश्यक कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई थी. कंपनी का दावा है कि उसने सद्भावना के साथ सहयोग किया और कई सक्रिय कदम भी उठाए. इसके बावजूद पूरे मंच को बंद करना अनुपातहीन कार्रवाई है.
कंपनी ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि प्रतिबंध संबंधी आदेश में पर्याप्त कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है. टेलीग्राम का कहना है कि आदेश में स्पष्ट तर्कों का अभाव है और इसलिए इसकी वैधता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं. कंपनी ने अंतरिम राहत की मांग करते हुए कहा कि पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि परीक्षा संबंधी कथित धोखाधड़ी में कुछ चैनलों की भूमिका को लेकर एजेंसियां लंबे समय से सतर्क थीं. सरकार का आरोप है कि कई चैनलों पर अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के दावे किए जाते थे और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती थी. इसी प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिए आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रतिबंध लगाया गया.
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने का समय दिया है. अदालत ने मामले को 18 जून को दोपहर 2:30 बजे पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां केंद्र सरकार अपने कथित "चौंकाने वाले सबूत" अदालत के समक्ष पेश कर सकती है और टेलीग्राम प्रतिबंध की वैधता पर विस्तृत बहस होने की संभावना है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

