पांचना बांध के पानी को लेकर किसानों का उग्र आंदोलन, दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग जाम कर सरकार को दी चेतावनी

पांचना बांध के पानी को लेकर किसानों का उग्र आंदोलन, दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग जाम कर सरकार को दी चेतावनी

प्रेषित समय :16:16:21 PM / Tue, Jun 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

सवाई माधोपुर. राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में पांचना बांध के पानी को लेकर किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. पिछले 12 दिनों से चल रहे महा पड़ाव के बीच सोमवार को किसानों ने अपना विरोध और तेज करते हुए दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमा लिया. सैकड़ों किसानों के रेलवे लाइन पर पहुंचने से देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल इस रूट पर यातायात प्रभावित हो गया और प्रशासन में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा किसानों को समझाने का प्रयास शुरू किया गया.

खंडिप कस्बे में चल रहे इस आंदोलन की अगुवाई क्षेत्रीय विधायक रामकेश मीणा कर रहे हैं. किसानों की मुख्य मांग पांचना बांध के कमांड क्षेत्र की नहरों में तत्काल सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने की है. आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि खेती का महत्वपूर्ण समय चल रहा है और यदि जल्द पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो हजारों किसानों की फसलें प्रभावित हो जाएंगी. उनका आरोप है कि कई दिनों से लगातार आंदोलन और ज्ञापन देने के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

सोमवार को आंदोलन ने अचानक तब बड़ा रूप ले लिया जब बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल से निकलकर रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए. देखते ही देखते सैकड़ों किसान रेल पटरियों पर बैठ गए और दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग को जाम कर दिया. इससे रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ गई और कई ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई. रेलवे ट्रैक पर किसानों की मौजूदगी के चलते प्रशासन को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी.

किसानों का कहना है कि वे पिछले 12 दिनों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. महा पड़ाव के दौरान लगातार धरना, प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित की गईं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली. किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है, जबकि यह मुद्दा सीधे उनकी आजीविका और भविष्य से जुड़ा हुआ है.

आंदोलन में शामिल किसानों ने कहा कि नहरों में समय पर पानी नहीं पहुंचा तो खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होगी. इससे कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा. उनका कहना है कि पांचना बांध का पानी कमांड क्षेत्र के किसानों का अधिकार है और सरकार को तत्काल सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.

आंदोलन को संबोधित करते हुए विधायक रामकेश मीणा ने सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि किसान पिछले 11 दिनों से पूरी तरह गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया गया. उन्होंने कहा कि किसानों ने हर लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया, फिर भी समाधान नहीं निकला. ऐसे में किसानों के पास आंदोलन को तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.

रामकेश मीणा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय लेकर नहरों में पानी छोड़ने की घोषणा नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं. विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह किसानों के हितों के लिए किया जा रहा है और इसका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है.

रेलवे ट्रैक पर किसानों के पहुंचने के बाद प्रशासन लगातार उनसे बातचीत कर रहा है. अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से रेल मार्ग खाली करने की अपील की है और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया है. हालांकि खबर लिखे जाने तक किसान अपने आंदोलन पर डटे हुए थे और किसी ठोस आश्वासन की मांग कर रहे थे.

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. एक ओर किसानों की सिंचाई संबंधी मांगें हैं तो दूसरी ओर देश के महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर यातायात बाधित होने का खतरा भी मौजूद है. प्रशासन के लिए स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभालना बड़ी परीक्षा बन गया है.

पांचना बांध का पानी लंबे समय से क्षेत्रीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है. सिंचाई के लिए इस जल स्रोत पर निर्भर हजारों किसान हर वर्ष समय पर पानी उपलब्ध कराने की मांग उठाते रहे हैं. इस बार भी नहरों में पानी छोड़ने को लेकर विवाद गहराने के बाद आंदोलन शुरू हुआ, जो अब रेलवे ट्रैक जाम तक पहुंच गया है.

फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर सवाई माधोपुर के इस आंदोलन पर टिकी हुई है. किसान संगठन और स्थानीय लोग सरकार की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं. यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-