नई दिल्ली. नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए मामले को जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका पर सुनवाई उस पीठ के समक्ष होगी, जो पहले से नीट परीक्षा से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई कर रही है. इसके साथ ही 21 जून को प्रस्तावित री-नीट परीक्षा पर तत्काल रोक लगाने की मांग को भी फिलहाल कोई राहत नहीं मिल सकी है.
बुधवार को यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था. सुनवाई के दौरान पीठ ने मामले पर विस्तार से विचार नहीं किया और निर्देश दिया कि इसे न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए. चूंकि न्यायालय का नियमित कार्य 13 जुलाई से पुनः प्रारंभ होगा, इसलिए अब इस मामले की सुनवाई जुलाई में होने की संभावना है.
याचिका स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ. मंगला कोहली द्वारा दायर की गई है. याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि मामले के अंतिम निपटारे तक 21 जून को प्रस्तावित री-नीट परीक्षा पर अंतरिम रोक लगाई जाए.
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप गंभीर हैं तथा इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए लाखों ईमानदार और मेहनती अभ्यर्थियों को दंडित नहीं किया जा सकता. याचिकाकर्ता का तर्क है कि कथित गड़बड़ियां कुछ सीमित व्यक्तियों, परीक्षा केंद्रों और संगठित नेटवर्क तक सीमित प्रतीत होती हैं, जबकि परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर देशभर में दोबारा आयोजित करने का निर्णय अनुपातहीन और अनुचित है.
याचिका में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की प्रशासनिक और संस्थागत विफलताओं का भार उन छात्रों पर नहीं डाला जा सकता, जिनका किसी भी प्रकार की अनियमितता से कोई संबंध नहीं है. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 के तहत प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन करता है.
याचिका में केवल री-नीट के फैसले को चुनौती ही नहीं दी गई, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में व्यापक सुधारों की भी मांग उठाई गई है. इसमें सुरक्षित डिजिटल परीक्षा प्रणाली लागू करने, एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्नपत्र वितरण, बायोमेट्रिक सत्यापन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था और कंप्यूटर आधारित परीक्षा ढांचे को विकसित करने जैसे सुझाव दिए गए हैं.
इसके अलावा याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की कार्यप्रणाली और परीक्षा संचालन में सामने आई कमियों की जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की है. उनका कहना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए संस्थागत सुधार आवश्यक हैं.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई जुलाई तक टाले जाने के बाद फिलहाल 21 जून को प्रस्तावित री-नीट परीक्षा के आयोजन पर कोई कानूनी रोक नहीं है. ऐसे में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा कराने की तैयारियों में जुटी हुई है. अब इस पूरे मामले पर देशभर के लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों की नजर जुलाई में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी रहेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

