नीट पुनर्परीक्षा से पहले तीन अभ्यर्थियों की मौत से मचा हड़कंप, तमिलनाडु में न्याय की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन

नीट पुनर्परीक्षा से पहले तीन अभ्यर्थियों की मौत से मचा हड़कंप, तमिलनाडु में न्याय की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन

प्रेषित समय :15:05:12 PM / Thu, Jun 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

चेन्नई. नीट-यूजी पुनर्परीक्षा से ठीक पहले देश के विभिन्न राज्यों से सामने आई तीन अभ्यर्थियों की मौत की घटनाओं ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है. तमिलनाडु, उत्तराखंड और राजस्थान में नीट की तैयारी कर रहे तीन युवाओं की मौत के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. विशेष रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर में 19 वर्षीय छात्रा की मौत के बाद विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं और प्रदर्शनकारी परिवार को न्याय तथा उचित सहायता देने की मांग कर रहे हैं.

कोयंबटूर में मृत छात्रा एक श्रमिक संगठन के पदाधिकारी की बेटी बताई गई है. छात्रा की मौत के बाद उसके पार्थिव शरीर को पहले एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से बाद में उसे कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल में शव परीक्षण की प्रक्रिया पूरी की गई. इस घटना के सामने आने के बाद वामपंथी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इससे पहले नीट से जुड़े मामलों में मृतकों के परिवारों को राहत और आर्थिक सहायता की घोषणा की गई थी, लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग उठाई. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक परिवार को उचित राहत और न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और परिवार के लिए विशेष सहायता पैकेज घोषित करने की मांग की.

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा अर्थात नीट-यूजी को लेकर पहले से ही देशभर में चर्चा और विवाद जारी है. मूल रूप से यह परीक्षा तीन मई को आयोजित की गई थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद परीक्षा को निरस्त कर दिया गया. अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है. परीक्षा को लेकर छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

तमिलनाडु की घटना के एक दिन पहले उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी एक नीट अभ्यर्थी की मौत की खबर सामने आई थी. 23 वर्षीय छात्रा अपने कमरे में मृत पाई गई. प्रारंभिक जांच में एक भावनात्मक पत्र मिलने की बात सामने आई है, जिसमें उसने अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर निराशा व्यक्त की थी. जानकारी के अनुसार छात्रा ने बारहवीं कक्षा में 96.7 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे और बाद में अपने महाविद्यालय की मेधावी छात्राओं में शामिल रही थी. इसके बावजूद वह अपने शैक्षणिक प्रदर्शन को लेकर संतुष्ट नहीं थी. पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है.

इसी दिन राजस्थान के सीकर से भी एक दुखद घटना सामने आई. 22 वर्षीय नीट अभ्यर्थी उमेश माली ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली. वह झुंझुनूं जिले का निवासी था और सीकर में रहकर चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था. पुलिस के अनुसार छात्र किराए के मकान में रह रहा था और लंबे समय से परीक्षा की तैयारी में जुटा था. सीकर में एक महीने के भीतर इस तरह की यह दूसरी घटना है. इससे पहले मई महीने में भी एक अन्य अभ्यर्थी की मौत ने क्षेत्र को झकझोर दिया था.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से भी हाल के दिनों में इसी प्रकार की एक घटना सामने आई थी. आजादपुर क्षेत्र में 20 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले में पुलिस जांच कर रही है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घटनास्थल से कोई पत्र बरामद नहीं हुआ था. परिवार ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली, जबकि पुलिस मृत्यु के कारणों की जांच में जुटी हुई है.

इन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और युवाओं पर पड़ने वाले मानसिक प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा में सफलता या असफलता को जीवन का अंतिम लक्ष्य मानने की प्रवृत्ति छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. अभिभावकों, शिक्षकों और संस्थानों को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिसमें विद्यार्थी बिना अत्यधिक दबाव के अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें.

तमिलनाडु में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने एक बार फिर नीट परीक्षा को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है. राज्य में लंबे समय से नीट का विरोध होता रहा है और कई राजनीतिक दल इसे छात्रों पर अतिरिक्त बोझ मानते रहे हैं. अब कोयंबटूर की घटना के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि केवल आर्थिक सहायता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यापक स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है.

फिलहाल पुलिस और प्रशासन सभी मामलों की जांच में जुटे हैं, जबकि नीट पुनर्परीक्षा की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं. इन दुखद घटनाओं ने देशभर में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को झकझोर दिया है तथा परीक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. आने वाले दिनों में सरकारों और संबंधित संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे छात्रों में विश्वास बहाल करें और उन्हें सुरक्षित तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करा सकें.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-